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ज्योतिष के 16 सूत्र -

*1. चंद्र कमजोर हो तो दुश्मन से पहले अपना मन हराता है

चंद्र = मन, भावना, कल्पना। नीच, अमावस्या, राहु-केतु-शनि से पीड़ित चंद्र वाला जातक लड़ाई से पहले ही सोच लेता है “मैं हार जाऊंगा”। दुश्मन बाद में आता है, डिप्रेशन पहले। नींद नहीं, शक ज्यादा, डिसीजन जीरो। 

*उपाय:* चांदी पहनो, मां की सेवा, पूर्णिमा व्रत। मन जीता तो जग जीता।

 

*2. मंगल का असली काम लड़ाई शुरू करना नहीं, जीतना है

मंगल = एनर्जी, हिम्मत, सर्जरी। नीच का मंगल झगड़ालू बनाता है, गाली-गलौज करवाता है। पर उच्च का मंगल = कमांडर। वो बिना बोले टारगेट पूरा करता है। मंगल 10th में = एक्शन से नाम। 

*गलती:* लोग मंगल को सिर्फ गुस्सा समझते हैं। असली मंगल = अनुशासन + जीत।

 

*3. बुध मजबूत हो तो शब्द ही हथियार बन जाते हैं

बुध = वाणी, बुद्धि, हाजिरजवाबी। बुध कन्या में उच्च या मिथुन में स्वराशि = वकील, सेल्समैन, एंकर, कॉमेडियन। ऐसे लोग तलवार नहीं चलाते, 1 लाइन बोलकर सामने वाले को चुप करा देते हैं। 

*खतरा:* नीच का बुध = झूठ, चुगली, धोखा। शब्द से ही बर्बादी।

*4. गुरु जहां बैठता है, वहां वृद्धि जरूर देता है

गुरु = विस्तार। जिस भाव में बैठेगा उस भाव को बड़ा करेगा। 2nd में = पैसा बढ़ाए। 5th में = संतान/ज्ञान बढ़ाए। पर गुरु की दृष्टि ज्यादा शुभ, बैठना कभी-कभी मोटापा देता है। 

*अपवाद:* 6-8-12 में गुरु = कर्जा, बीमारी, खर्चा भी बढ़ा दे। इसलिए गुरु की प्लेसमेंट देखो।

 

*5. शुक्र जीवन को सुंदर बनाता है, आसान नहीं

शुक्र = लग्जरी, प्रेम, कला, भोग। शुक्र अच्छा = AC कार, सुंदर पार्टनर, महंगे कपड़े। पर शुक्र साथ में लालच, लगाव, ईर्ष्या भी लाता है। सुंदर बीवी = टेंशन भी। बड़ी गाड़ी = EMI भी। 

*सार:* शुक्र स्वाद देता है, पर वो स्वाद मेंटेन करने की मेहनत भी करवाता है।

 

*6. 12वां भाव खर्च नहीं, त्याग की कहानी है

12th = व्यय, विदेश, हॉस्पिटल, जेल, मोक्ष। लोग डरते हैं। पर 12th एक्टिव वाला ही संन्यासी, दानी, फॉरेन में सेटल होता है। खर्चा होगा, पर किसपर? अस्पताल में या दान में, ये कुंडली बताएगी। 

*राज:* शुभ 12th = नींद अच्छी, मोक्ष का रास्ता। खराब 12th = नींद की गोली।

 

*7. राहु जो देता है, उसकी कीमत भी वसूलता है

राहु = शॉर्टकट, भ्रम, अचानक छलांग। राहु 11th में = अचानक करोड़पति। पर 42 की उम्र के बाद या तो हेल्थ, या बदनामी, या तलाक की कीमत लेगा। राजनीति, शेयर, विदेश का राजा राहु ही बनाता है। 

*नियम:* राहु से मिला पैसा दान करो, वरना राहु ब्याज समेत वसूलेगा।

 

*8. शनि की देरी अक्सर भगवान की तैयारी होती है

शनि = देरी, मेहनत, न्याय। 30 तक शादी न होना, 35 तक नौकरी न लगना = शनि टेस्ट ले रहा है। पर जब देता है तो टिकाऊ देता है। शनि की बनाई बिल्डिंग भूकंप में भी न गिरे। 

*सोच:* जल्दी मिलने वाला जल्दी जाता है। शनि वाला पीढ़ियों तक चलता है।

 

*9. मजबूत लग्न पूरी कुंडली की आधी समस्या खत्म कर देता है

लग्न = तेरा शरीर, हेल्थ, पर्सनालिटी, इम्युनिटी। लग्नेश उच्च/स्वराशि/केंद्र में = 100 बीमारी की दवा 1 लग्न। ऐसे लोग एक्सीडेंट से भी बच जाते हैं। लग्न कमजोर = करोड़पति भी बीमार। 

*उदाहरण:* मेष लग्न + मंगल 10th में = लग्नेश दिग्बली। अकेला ही पूरी कुंडली संभाल ले।

 

*10. सूर्य कमजोर हो तो अवसर भी सम्मान नहीं दिला पाते

सूर्य = आत्मा, पिता, सरकार, इज्जत। नीच सूर्य/ग्रहण योग = प्रमोशन मिलेगा पर क्रेडिट बॉस ले जाएगा। इंटरव्यू क्लियर होगा पर सैलरी कम। लोग काम करवाएंगे पर थैंक यू नहीं बोलेंगे। 

*उपाय:* पिता के पैर छुओ, सरकारी काम ईमानदारी से करो, अहंकार छोड़ो। सूर्य चमका तो दुनिया सलाम करेगी।

*11. गुरु साथ हो तो गिरकर भी इंसान संभल जाता है

गुरु की दृष्टि = भगवान का हाथ। 5-7-9 दृष्टि जिस भाव पर पड़े, वहां बर्बादी नहीं होती। नौकरी गई = 2 महीने में बेहतर मिलेगी। तलाक हुआ = दूसरा पार्टनर ज्यादा अच्छा। गुरु केंद्र में = हजार दोष खत्म। 

*शर्त:* गुरु वक्री या अस्त न हो।

 

*12. शुक्र सिर्फ प्रेम नहीं, जीवन का स्वाद है

शुक्र = खाना, कपड़ा, परफ्यूम, गाना, सेक्स, गाड़ी। खराब शुक्र = बेस्वाद जिंदगी। खाना फीका, कपड़े बेरंग, पार्टनर से झगड़ा। अच्छा शुक्र = साधारण दाल-चावल भी 5-स्टार लगे। 

*खास:* शुक्र + चंद्र = कला। शुक्र + मंगल = पैशन। शुक्र + शनि = लेट मैरिज पर टिकाऊ।

 

*13. बुध तेज हो तो दुश्मन भी बहस में हार जाते हैं

बुध केंद्र में/आदित्य योग में = वकील, डिबेटर, न्यूज एंकर। ऐसे लोग कोर्ट में जज को भी चुप करा दें। मार्केटिंग में क्लाइंट को ना बोलते हुए भी हां कहलवा लें। 

*उल्टा:* बुध पाप पीड़ित = जुबान से रिश्ते खराब। झूठ पकड़ा जाए।

 

*14. हर मजबूत 6वें भाव के पीछे कोई बड़ा संघर्ष छुपा होता है

6th = रोग, कर्जा, दुश्मन, नौकरी, कॉम्पिटिशन। 6th का मालिक मजबूत या 6th में शुभ ग्रह = जातक लड़ाकू। पहलवान, वकील, डॉक्टर, आर्मी। पर ये ताकत फ्री में नहीं मिली। बचपन में बीमारी, गरीबी, कोर्ट केस झेले हैं तभी। 

*सार:* 6th का राजा बनने के लिए पहले 6th का गुलाम बनना पड़ता है।

 

*15. राजा सूर्य बनाता है, लेकिन साम्राज्य शनि बनाता है

सूर्य = पावर, पोस्ट, नाम। मंत्री, कलेक्टर, CEO सूर्य देगा। पर वो पोस्ट 5 साल चले या 25 साल, ये शनि तय करेगा। सूर्य एक दिन का राजा बना सकता है। शनि की मेहनत = टाटा, बिरला वाला साम्राज्य जो 100 साल चले। 

*कॉम्बो:* सूर्य 10th में + शनि 11th में = पावर + पैसा + लॉन्गेविटी। परफेक्ट।

 

*16. कुंडली में सबसे बड़ा योग वही है जो आपको सही कर्म करवाए*

लाख योग हों – गजकेसरी, पंच महापुरुष, राजयोग। पर अगर जातक कर्म न करे, नशा करे, गलत संगत में पड़े = सारे योग जीरो। 

*असली योग:* धर्म त्रिकोण 1-5-9 एक्टिव + दशमेश मजबूत। ये कर्म करवाएगा। सुबह 5 बजे उठाएगा, मेहनत करवाएगा, गलत से बचाएगा। 

*गीता का सार:* कर्मण्येवाधिकारस्ते। ग्रह रास्ता दिखाते हैं, चलना तुझे खुद है।

 

*पूरे 16 सूत्र का निचोड़ 4 लाइन में:

  1. *मन चंद्र, हिम्मत मंगल, दिमाग बुध, किस्मत गुरु* – ये 4 सही तो जीवन सेट।
  2. *शनि स्लो पर श्योर, राहु फास्ट पर फेक* – चुनना तुझे है।
  3. *लग्न बॉडी है, सूर्य बैटरी है, कर्म पेट्रोल है* – तीनों फुल तो गाड़ी रॉकेट।
  4. *योग कुंडली में नहीं, आदत में बनता है* – रोज 1% सुधर, 1 साल में 365% ग्रोथ।

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