
ज्योतिष शास्त्र में गुरु को एक सबसे अतिशुभ ग्रह का दर्जा प्राप्त है..जहाँ भी गुरु की दृष्टि पड़े उस भाव से संबंधित समस्याओं का छुटकारा गुरुदेव अवश्य करते है। उनकी दृष्टि को अमृत दृष्टि कहा गया है तो वही शनिदेव की दृष्टि को एक अतिक्रूर दृष्टि का दर्जा प्राप्त है जो मृत्युतुल्य कष्ट देती है…शनिदेव की क्रूर दृष्टि से तो शिवजी भी रूप बदलकर अशुभ समय को टालने की निरर्थक कोशिश किये थे।
जीवन का एक शाश्वत सत्य :-“मारने वाले से बचाने वाला सदैव बड़ा होता है” ये बात गीता में स्पष्ट लिखी है..गलतिया सबसे होती है,कही बड़ी तो कही छोटी पर गुरु का सिद्धांत सदैव आपको माँफ करता है..गुरु का दिल उदार वही जिसका शनि कमजोर होगा वो आपकी गलतियों को कभी माँफ नही करेगा…अब आप इन दोनों की दृष्टि में जो जमीन-आसमान का फर्क है वो समझ गये होंगे…गुरु की 9वी दृष्टि सर्वाधिक शुभ और शनि की 10वी दृष्टि सबसे क्रूर मानी गयी है..
यदि एक ही भाव पर इन दोनों की दृष्टि पड़े तो क्या होगा 1976 में बनी नागिन मूवी सभी ने देखी होगी,उसका अंतिम दृश्य अपनी पलट छाया में लाने की कोशिश कीजिये…एक छोटी बच्ची को सुनील दत्त (गुरु) बचाने की कोशिश करता है वही नागिन (शनि) किसी भी हाल में अपने अत्यंत जहरीले डंक से उस बच्ची को मारने की कोशिश करती है..बस यही हाल उस भाव का होता जहाँ गुरु-शनि दोनों की दृष्टि कैसे भी आकर टकरा जाये..
यदि लग्न पर इन दोनों की दृष्टि पड़े तो आत्मविश्वास में कमी आयेगी,जातक स्वंय को हारा हुआ मानेगा..
द्वितीय भाव पर पड़े तो वाणी दोष होंगा,जातक तुतलायेगा,जातक की कुटुंब में प्रतिष्ठा नही रहेगी
तृतिय में पड़े तो जातक की हैंडराइटिंग बहुत गंदी होगी,भाइयो से सहयोग के बजाय धोखे मिलेंगे
चतुर्थ भाव मे पड़े तो जातक के सांसारिक सुखों में न्यूनता आयेगी..जीवन नीरस रहेगा..
पंचम में पड़े तो पिता के ट्रांसफर के कारण कई बार स्कूल बदलने पड़ेंगे,एग्जाम के समय एक्सीडेंट या जातक बीमार पड़ेगा..महिलाये के कम से कम 2 गर्भपात होते है..
छठे आठवे में दोनों की दृष्टि पड़े शुभ परिणाम मिलते है..आपके दुश्मन का स्वंनाश होता है..हो सकता है वो आपको मारने आ रहे हो और उनका ही एक्सीडेंट हो जाये..कर्जे जल्दी चुकते है..
यदि सप्तम में इन दोनों की किसी भी तरह दृष्टि पड़े तो जातक/जातिका की शादी में विलंब होगा..बात बनते-बनते टूट जाएगी,दहेज की माँग के कारण शादी 36वे साल तक नही जुड़ पायेगी,वैवाहिक जीवन मे मतभेद अधिक रहेंगे…
नवे भाव पर पड़े तो जातक फकीर जैसी जिंदगी जीता है,भाग्य डाँवाडोल रहेगा..कितना भी अच्छा खिलाड़ी हो अंतिम समय मे टीम में सिलेक्शन नही होगा या चुनाव में टिकट ही नही मिलेगा….
दशम और एकादश पर पड़े तो जातक कार्यस्थल पर बुरी तरह प्रताड़ित और अपमानित होगा…जातक का पैसा उधारी में बुरी तरह फँसेगा जिसके मिलने की संभावना ना के बराबर होंगी..जातक को बार-बार व्यवसाय बदलना होगा या ट्रांसफर से परेशान रहेगा..उसकी मेहनत का श्रेय किसी और को जायेगा..
बारहवे में पड़े तो जातक पैसा तो बहुत कमाएगा पर बचत नही कर पाता है..सुदूर या विदेश जाये भी तो किसी गड़बड़ी या धांधली में फँसकर कोर्ट के चक्कर से परेशान रहता है..जातक शीघ्रपतन की समस्या से पूरी जवानी परेशान रहेगा..
विशेष:- “गुरु-शनि की युति में शनिदेव अपनी क्रूरता त्याग देते है”