
आज हम २७ योगों की श्रृंखला में अठारहवें योग ‘वरीयान’ (Variyana) के विषय में विस्तार से चर्चा करेंगे। यह योग अपने नाम के अनुरूप ही श्रेष्ठता और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है।
‘वरीयान’ का अर्थ होता है – ‘श्रेष्ठ’, ‘वरिष्ठ’ या ‘उत्तम’। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा का योग 226^\circ 40′ से 240^\circ 00’ के बीच होता है, तब यह योग बनता है। इसके स्वामी कुबेर (Lord Kubera) हैं, जो देवताओं के कोषाध्यक्ष और धन के अधिपति हैं।
🔹 स्वभाव और व्यक्तित्व (Nature & Personality)
वरीयान योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति प्रभावशाली और राजसी गुणों वाला होता है।
* व्यक्तित्व: ये जातक दिखने में आकर्षक और स्वभाव से सौम्य होते हैं। इनका रहन-सहन उच्च स्तर का होता है।
* स्थिर बुद्धि: ये किसी भी काम को बहुत सोच-समझकर और योजनाबद्ध तरीके से करते हैं। इनमें आलस्य कम और कर्मठता अधिक होती है।
* कला और विलासिता: इन्हें सुंदर वस्तुओं, अच्छे भोजन और आरामदायक जीवन का शौक होता है। ये कला के पारखी होते हैं।
* धार्मिकता: ईश्वर में इनकी गहरी आस्था होती है और ये धार्मिक कार्यों में धन व्यय करना पसंद करते हैं।
🔹 कार्य और वित्त (Work & Finance)
* वरीयान योग के जातक व्यापार और वाणिज्य (Commerce) में बहुत सफल होते हैं। कुबेर देव की कृपा से इन्हें धन कमाने के बेहतरीन अवसर मिलते हैं।
* ये जातक बैंकिंग, फाइनेंस, आभूषणों के व्यापार और विलासिता की वस्तुओं (Luxury Goods) के व्यवसाय में खूब नाम और पैसा कमाते हैं।
* आर्थिक रूप से ये बहुत भाग्यशाली होते हैं। इन्हें पैतृक संपत्ति का लाभ मिलने की प्रबल संभावना रहती है।
🔹 संबंध (Relationships)
* ये अपने परिवार के प्रति बहुत उदार होते हैं। परिवार की सुख-सुविधाओं के लिए ये कभी समझौता नहीं करते।
* इनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और समाज के प्रतिष्ठित लोगों के साथ इनके घनिष्ठ संबंध होते हैं।
* मित्रों के बीच ये अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते हैं।
🔹 प्रिडिक्शन के लिए विशेष सूत्र (Prediction Tips)
* मुहूर्त विचार: यह एक शुभ योग है। नया व्यापार शुरू करने, धन का निवेश करने, सोना खरीदने या कोई भी ऐसा कार्य जिसमें लाभ की अपेक्षा हो, उसके लिए यह योग उत्तम है।
* सफलता: इस योग में किए गए कार्यों में आर्थिक सफलता की संभावना बहुत अधिक होती है। यदि कोई रुका हुआ धन प्राप्त करना हो, तो इस योग में प्रयास करना फलदायी होता है।
* स्वामी प्रभाव: स्वामी कुबेर होने के कारण, इस योग में जन्मे जातकों को जीवन में कभी भी दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता (यदि अन्य ग्रह स्थितियाँ अनुकूल हों)।
🔹 सलाह (Advice)
* अपने धन और ऐश्वर्य को बनाए रखने के लिए जातक को माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की उपासना करनी चाहिए।
* अमावस्या के दिन दीप दान करना और श्री सूक्त का पाठ करना इनके लिए विशेष लाभकारी होता है।
* अहंकार से बचें और अपनी समृद्धि का उपयोग जरूरतमंदों की सहायता के लिए भी करें।