
जब भगवान राम की वानर सेना लंका तक पहुँचने के लिए समुद्र पर पुल (राम सेतु) बना रही थी, तो नल और नील द्वारा डाले गए पत्थर गायब हो रहे थे। रावण ने अपनी बेटी
सुवर्णमच्छा, जो एक शक्तिशाली जलपरी (Mermaid) थी, को आदेश दिया था कि वह अपने समुद्री सेना के साथ मिलकर पत्थरों को समुद्र की गहराई में ले जाए ताकि पुल न बन सके।🚩
जब हनुमान जी ने पानी के अंदर जाकर जांच की, तो उन्होंने देखा कि एक सुनहरी जलपरी पत्थरों को हटा रही है। हनुमान जी ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन सुवर्णमच्छा बहुत चतुर और तेज थी।
अंत में, हनुमान जी ने उसे प्रेम और शांति से समझाया कि वे धर्म की रक्षा के लिए यह पुल बना रहे हैं। सुवर्णमच्छा न केवल मान गई, बल्कि उसने हनुमान जी की मदद भी की और सारे पत्थर वापस लौटा दिए।