
यह तस्वीर सिर्फ एक हादसे की नहीं है, बल्कि हमारे समाज के दो अलग-अलग चेहरों का आइना है। एक चेहरा जो ‘सिस्टम’ की नाकामी दिखाता है, और दूसरा जो ‘इंसानियत’ की मिसाल पेश करता है।
“और एक बात और फर्क सिर्फ “सुविधाओं” का नहीं, “कलेजे” का होता है साहब!”
कल शाम साढ़े 7 बजे का वक्त। हरियाणा के सिरसा में एक परिवार शादी की खुशियां मना कर लौट रहा था। अचानक उनकी कार बेकाबू होकर एक गहरी नहर में जा गिरी। जरा सोचिए उस खौफनाक मंजर के बारे में,,,,-अंधेरा, गहरा पानी, और कार में फंसी 6 जिंदगियां। अंदर 3 महिलाएं, एक पुरुष और दो मासूम बच्चे (एक 4 साल का और दूसरा महज 2 साल का) मौत के मुंह में जा रहे थे।
तभी वहां से गुजर रहे एक बाइक सवार ने यह देखा। उसने अपना मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने के बजाय वो किया जो एक सच्चे इंसान को करना चाहिए,,,-उसने शोर मचाया और गाँव वालों को इकट्ठा किया।
इसके बाद जो हुआ, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला था। गाँव के युवाओं ने न तो किसी सरकारी आपदा प्रबंधन टीम का इंतजार किया और न ही अपनी जान की परवाह की। वे तुरंत उस गहरे पानी में कूद गए। महज 3 से 4 मिनट के भीतर उन्होंने कार का शीशा तोड़ा और उन 6 लोगों को मौत के जबड़े से खींच लाए। उनके बाहर निकलते ही कार पूरी तरह पानी में डूब गई।
कार डूब गई, लेकिन हरियाणा के उन युवाओं ने इंसानियत को डूबने से बचा लिया।
अब जरा इस तस्वीर को हमारी ‘हाईटेक सिटी’ नोएडा की उस शर्मनाक घटना के साथ रखकर देखिए।
एक पढ़ा-लिखा इंजीनियर नाले में गिर जाता है। किनारे पर 50 से ज्यादा पुलिसवाले मौजूद थे। वो आदमी ढाई घंटे तक चीखता रहा, जिंदगी की भीख मांगता रहा, लेकिन उन 50 “प्रशिक्षित और वर्दीधारी” लोगों में से किसी का जमीर नहीं जागा कि वो पानी में उतर कर उसे बचा लें।
कड़वा है लेकिन सच है,,,-अगर वहीं किसी गरीब ठेले वाले या सब्जी वाले से रिश्वत वसूलनी होती, तो शायद एक ही सिपाही काफी होता! लेकिन एक डूबते इंसान को बचाने के लिए 50 पुलिसवाले भी कम पड़ गए।
आखिर ऐसा क्यों होता है?
क्योंकि जान बचाने के लिए हाईटेक क्रेन, प्रोटोकॉल या महकमे की इजाजत की जरूरत नहीं होती, इसके लिए सिर्फ “जज्बा” चाहिए होता है। सिरसा के उन अनजान शूरवीरों के पास न कोई ट्रेनिंग थी, न लाइफ जैकेट, बस उनके सीने में एक धड़कता हुआ इंसान था।
हरियाणा के इन बहादुर दोस्तों को मेरा दिल से सेल्यूट! 🫡 आपने सिर्फ 6 लोगों की जान नहीं बचाई है, बल्कि इस देश के करोड़ों लोगों के दिलों में यह उम्मीद जिंदा रखी है कि आज भी दुनिया कागजी सिस्टम से नहीं, बल्कि आम आदमी की हिम्मत से चल रही है। 🙏
एक छोटी सी अपील: जब भी कभी किसी को मुसीबत में देखें, तो जेब से मोबाइल निकालकर तमाशबीन मत बनिएगा। सिरसा के इन युवाओं की तरह किसी की जिंदगी की आखिरी उम्मीद बनिएगा। इन गुमनाम बहादुरों को मेरा फिर से सैल्यूट