
कुछ राशि के जातकों के लिए मंगलकारी होंगे
ग्रहों के सेनापति मंगल ग्रह 23 फरवरी को कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे और दो अप्रैल तक रहेंगे। मंगल कुंभ राशि में पंचग्रही योग बनाएंगे। कुंभ में पहले से ही राहु और सूर्य मौजूद हैं, इसलिए यह गोचर सामान्य नहीं माना जा रहा। मंगल और राहु की युति को ज्योतिष में उग्र प्रभाव देने वाला योग कहा जाता है, जिससे कई लोगों के स्वभाव और परिस्थितियों में बदलाव आता है। कुछ राशियों को विशेष सावधानी रखने की जरूरत होगी। कुछ राशियों के लिए मंगल का कुंभ राशि में प्रवेश मंगलकारी साबित होगा।
ज्योतिषाचार्य ने कहा मंगल ग्रह 23 फरवरी को सुबह 11:49 बजे कुंभ में प्रवेश करेंगे। कुंभ राशि में सूर्य, शुक्र, बुध और राहु पहले से ही विराजमान हैं। ऐसे में कुंभ राशि में मंगल गोचर से पंचग्रही योग बनेगा। साथ ही मंगल और सूर्य की युति होने से आदित्य मंगल योग बनेगा।
मंगल के गोचर से कुंभ राशि में कई ग्रहों का मिलन होगा, जो सभी राशियों पर असर डालेगा। लेकिन विशेष तौर पर चार राशि वालों को सबसे ज्यादा लाभ देगा।
मेष राशि: मंगल गोचर मेष राशि वालों को धन लाभ करवा सकता है। खासतौर पर माता-पिता या पारिवारिक स्तर पर आर्थिक मदद मिलने के योग हैं। वहीं कारोबारी जातकों को नई डील फाइनल करने का मौका मिल सकता है।
वृष राशि: यह गोचर वृषभ राशि वालों को करियर में तरक्की और धन लाभ के योग बना रहा है। इसके अलावा आपकी अचल संपत्ति में बढ़ोतरी होगी। नए स्रोतों से आमदनी होगी। वैवाहिक जीवन अच्छा रहेगा और सेहत बेहतर होगी।
वृश्चिक राशि: मंगल गोचर वृश्चिक राशि वालों को भूमि-भवन संबंधी लाभ देगा। आपकी संपत्ति बढ़ेगी। माता से सहयोग मिल सकता है। जो लोग नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, वे सफल होंगे। अप्रत्याशित आर्थिक लाभ मिल सकता है।
मकर राशि: मंगल देव का गोचर मकर राशि वालों के जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ाएगा। आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही धार्मिक-सामाजिक आयोजन में हिस्सा लेंगे। बढ़ा हुआ आत्मविश्वास आपको महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करेगा।
हम एक ऐसे उच्च-ऊर्जा वाले ग्रह क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जो शांत तरीके से कार्य नहीं करता।
23 फरवरी से, जैसे ही मंगल कुंभ राशि में प्रवेश करता है, वह तुरंत सूर्य, राहु, बुध और शुक्र के साथ जुड़ जाता है। इससे एक ही राशि में अग्नि, भ्रम, कूटनीति और वैचारिक आक्रामकता का तीव्र संकेंद्रण बनता है — और यह राशि जनसमूह, तकनीक तथा वैश्विक समन्वय से जुड़ी हुई है।
मंगल-राहु का अंगारक प्रभाव आवेगपूर्ण निर्णयों, रणनीतिक गलत आकलनों, साइबर तनाव और अचानक सैन्य गतिविधियों को बढ़ा सकता है। जब ग्रह राहु-केतु अक्ष के भीतर संकुचित हो जाते हैं, तो कालसर्प-सदृश कर्मिक दबाव उत्पन्न होता है — जो ऐसे घटनाक्रमों का संकेत देता है जो नियत (भाग्यनिर्धारित) प्रतीत होते हैं, जिन्हें पलटना कठिन होता है और जो सामूहिक स्तर पर मनोवैज्ञानिक अस्थिरता उत्पन्न कर सकते हैं।
सबसे संवेदनशील स्थिति 27 फरवरी को बनती है, जब मंगल हाल ही के ग्रहण अंश को पार करता है — इतिहास में यह वह बिंदु माना गया है जहाँ दबा हुआ तनाव अभिव्यक्ति पाता है और छिपे हुए संघर्ष खुली कार्रवाई की ओर बढ़ते हैं।
ऐसे ग्रहयोगों के तहत, भू-राजनीतिक तनाव केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित रहना कठिन है।
यह अवधि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती शत्रुता, बढ़े हुए सैन्य संकेतों, या लक्षित हमलों तथा जवाबी कार्रवाई की संभावनाओं के साथ जुड़ सकती है।