
ज्योतिष शास्त्र में विषोंतरी दशाओं के अतिरिक्त भी बहुत सी दशाओं का वर्णन है,और उसके भी सूत्र है कि जैसे लग्नेश सप्तम में हो तो कौनसी दशा देखना चाहिये, परंतु हिन्दू ज्योतिष में सुगमता के आधार पर विषोंतरी दशा को ही अधिक मान्यता दी जाती है वही पाश्चात्य ज्योतिष दशा-महादशा के बजाय वैज्ञानिक आधार पर “गोचर” को अधिक प्रधानता देती है।
योगकारक ग्रह अर्थात लग्नेश,पंचमेश और नवमेश। कन्या लग्न में निजीतौर पर मैं शनि को पंचमेश होने के बावजूद योगकारक नहीं मानता क्योंकि इसके पीछे दो ठोस कारण है,पहला की शनि की मूल त्रिकोण राशि का त्रिक (छठे) भाव में आना और दूसरा शनि की अगली राशि पंचम में जो शिक्षा और संतान तक तो लाभदायक है परंतु दशम से अष्टम होने के कारण पंचम की ये दशा आपको नौकरी/व्यवसाय में बहुत अवरोध उत्पन्न करती है,हर चीज में देरी चाहे प्रमोशन/ट्रांसफर, व्यापार हेतु लोन आदि
योगकारक ग्रहों की दशा सदैव शुभफल नही देती यदि:-
दोनों योगकारक ग्रह एक दूसरे से “#षडाष्टक” अर्थात एक दूसरे से छठे-आठवें। ये वही बात हो गयी कि आपके मित्रमंडल में आपके दो मंत्रियों की आपस मे ही नही जमती और उनको चुनाव प्रचार में भेजना या फिर आपकी टीम के दो खिलाड़ियों की आपस में बिल्कुल नहीं पटती और इस्तेफ़ाक से दोनों साथ में बल्लेबाजी कर रहे हो। चंद्र-गुरु षडाष्टक हो तो “शकट योग” बनायेगे वही शनि-शुक्र षडाष्टक हो तो नपुंसकता और धनहानि योग बनायेगे धन का संचय मुश्किल होगा। ऐसे में दोनों की आपस में दशा-अंतर्दशा फायदे के बजाय नुकसान अधिक देगी।
मिथुन ऐसा लग्न है जिसमें शुक्र योगकारक होने के बावजूद पंचम और द्वादश भाव का स्वामी होता है अतः शुक्र की दशा-अंतर्दशा जातक को नौकरी/व्यवसाय में समस्याओं में डालती है या फिर अनावश्यक खर्च जिसकी जातक ने कल्पना भी न कि हो जैसे अस्पताल,कोर्ट-कचहरी आदि में फिजूल पैसा बर्बाद होता है।
पंचधा मैत्री चक्र निर्विवाद और सर्वोत्तम विधि है महादशा कैसी जाएगी इसकी गणना हेतु।
अंत में जातक की उम्र मायने रखती है कि वो अभी किस उम्र से गुजर रहा है और उस उम्रविशेष में कौनसा ग्रह सर्वाधिक असर जातक पर डालता है। ग्रह निम्लिखित उम्र में अपना विशेष प्रभाव जातक पर डालते है:- गुरु-16,सूर्य-22, चंद्र-24, शुक्र-25, मंगल-28, बुध-34, शनि-36,राहू-42,केतु-46। अब जातक की उम्र 16 रही और पंचमेश गुरु की दशा रही तो शिक्षा के क्षेत्र में झंडे गाड़ देगा, वही जातक की उम्र 25 रही और सप्तमेश शुक्र की दशा रही तो विवाह के बहुत जल्दी योग बनेंगे। दशमेश शनि की दशा रही,जातक की आयु भी 36 तो जातक पिता का कारोबार बहुत जल्दी ही सीखकर दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की कर डालता है।
इसके बाद दशाकारक ग्रह को अष्टकवर्ग में प्राप्त बिंदुओं पर भी नजर डालनी चाहिये, साथ ही उसकी मूल राशि वाले भाव को सर्वाष्टक वर्ग में प्राप्त बिंदुओं का अवलोकन भी जरूरी है।