Sshree Astro Vastu

मालव्य योग फल क्यों नही देता

मालव्य_योग – लक्ष्मी का शिरोमणि योग जो जीवन को ऐश्वर्य, सौंदर्य और सुखों से भर देता है, लेकिन फिर भी जातक परेशान क्यों यह सवाल लाखों कुंडलियों में घूमता है।

आइए, इस रहस्य को गहराई से खोलते हैं, शास्त्रों के आधार पर, ग्रहों की डिग्री-आधारित प्रभावों को समझते हुए, और अंत में ऐसे अत्यंत गुप्त एवं शक्तिशाली उपाय बताते हैं जो आमतौर पर किसी पुस्तक या गुरुदेव ने सार्वजनिक रूप से नहीं बताए।

मालव्य_योग_की_मूल_संरचना

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मालव्य योग पंच महापुरुष योगों में से एक है। यह तब बनता है जब शुक्र_ग्रह केंद्र भावों (1, 4, 7 या 10) में अपनी स्वराशि (वृषभ/तुला) या उच्च राशि (मीन) में स्थित हो। यह योग जातक को आकर्षक व्यक्तित्व, ऐश्वर्य, विलासिता, कला-प्रतिभा, सुखद वैवाहिक जीवन और भौतिक समृद्धि प्रदान करता है। फिर भी कई बार यह योग “सूखा” रह जाता है – फल नहीं देता। क्यों क्योंकि ग्रहों का सूक्ष्म खेल इसे बाधित करता है।

 

मालव्य_योग_फल_क्यों_नहीं_देता? – गहन ग्रह-आधारित कारण

शुक्र_पर_पाप_ग्रहों_की_दृष्टि या युति – सबसे प्रमुख कारण।

यदि शुक्र पर शनि, राहु, केतु की दृष्टि हो (विशेषकर 3°, 7° या 10° के भीतर निकट दृष्टि), तो योग का 80% फल कम हो जाता है।

सूर्य के साथ निकट युति (कमबस्ट – 8° से कम दूरी) शुक्र को जलाकर उसकी शक्ति छीन लेती है।

मंगल_की_युति_या_दृष्टि शुक्र को क्रोधी और अस्थिर बना देती है।

गुरु_की_कमजोरी – दक्षिण भारतीय परंपरा में विशेष महत्व। गुरु मीन राशि (शुक्र की उच्च राशि) का स्वामी है। यदि गुरु नीच (मकर), अस्त या शनि की दृष्टि में हो, तो मालव्य योग भंग (निष्फल) हो जाता है।

चंद्र_शुक्र युति – चंद्र शुक्र को भावुक बना देता है, फल में देरी या अस्थिरता लाता है।

अन्य दोषों का प्रभाव – पितृदोष, कालसर्प, मांगलिक या अष्टम भाव में पाप होने पर योग का फल दब जाता है।

दशा-अंतर्दशा का खेल – योग भले हो, लेकिन यदि वर्तमान में शुक्र_की_महादशा/अंतर्दशा नहीं चल रही, या पाप ग्रहों की दशा चल रही हो, तो फल सुप्त (सोया हुआ) रहता है।

मालव्य_योग 100% सटीक फल तभी देता है जब शुक्र पूर्णतः मुक्त हो – कोई पाप दृष्टि/युति न हो, गुरु बलवान हो, और शुक्र की दशा चल रही हो।

मालव्य_योग_को_पूर्ण_फल देने के लिए आवश्यक कुंडली स्थिति शुक्र_केंद्र में अकेला या केवल शुभ ग्रहों (गुरु/बुध) के साथ।

शुक्र की डिग्री 15° से 25° के बीच हो (मध्य बल)।

गुरु केन्द्र/त्रिकोण में बलवान।

कोई पाप ग्रह शुक्र से 10° के भीतर न हो।

नवांश_में_शुक्र उच्च या स्वराशि में।

अब आते हैं सबसे गुप्त, शक्तिशाली और 100% कारगर उपायों पर

ये उपाय प्राचीन तांत्रिक ग्रंथों (जैसे रुद्रयामल तंत्र, शारदातिलक, और कुछ गुप्त पांडुलिपियों) से लिए गए हैं, जो आम ज्योतिष पुस्तकों में नहीं मिलते। इन्हें अत्यंत गुप्त रखा जाता है।

  1. गुप्त तांत्रिक बीज-मंत्र साधना (सबसे शक्तिशाली) मंत्र – ॐ ऐं क्लीं द्रीं द्रां द्रौं स: शुक्राय नम: विधि – शुक्रवार की रात्रि 11:30 से 1:00 बजे (शुक्र होरा में), सफेद वस्त्र पहनकर, चांदी के पात्र में गंगाजल + दूध + शहद मिलाकर रखें। 108 बार इस मंत्र का जाप करें, प्रत्येक जाप पर सफेद चंदन की माला से। 21 शुक्रवार तक निरंतर। वैज्ञानिक आधार – यह मंत्र शुक्र की उच्च आवृत्ति (432 Hz के करीब) को जागृत करता है, जो मस्तिष्क में डोपामाइन बढ़ाता है और आकर्षण बढ़ाने वाली ऊर्जा पैदा करता है।
  1. अति-गुप्त वनस्पति उपाय (वनस्पति तंत्र) श्वेत चंदन + कमलगट्टा + सफेद कनेर की जड़ को शुक्रवार आधी रात में चंद्रमा की रोशनी में पीसकर, चांदी के टुकड़े पर लेप लगाकर कपूर से धूप दें। इसे गले में धारण करें। गुप्त रहस्य – यह शुक्र की प्राकृतिक तरंग को सीधे शरीर में प्रवाहित करता है।
  1. विशेष हवन उपाय (खगोलीय गणित आधारित) शुक्र की उच्च स्थिति (मीन 27° तक) के समय, श्वेत तिल, घी, शहद से हवन करें। मंत्र – ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय स्वाहा (1008 आहुति) वैज्ञानिक दृष्टि – हवन की अग्नि नकारात्मक आयन पैदा करती है, जो शुक्र की कम्पन ऊर्जा को शुद्ध करती है।
  1. रत्न + तांत्रिक संयोजन हीरा या ओपल (6 रत्ती) को शुक्र मंत्र से सिद्ध करके, चांदी की अंगूठी में शुक्रवार पहनें। गुप्त तंत्र – अंगूठी पहनने से पहले श्वेत कमल पर शुक्र यंत्र बनाकर 21 बार मंत्र पढ़ें।
  1. घरेलू + वैदिक संयोजन रोज सुबह सफेद वस्त्र पहनकर 6 सफेद फूल (चमेली) मां लक्ष्मी को अर्पित करें। रात्रि में दूध में केसर + इलायची उबालकर पीएं। वैज्ञानिक कारण – यह सेरोटोनिन बढ़ाता है और शुक्र की भावनात्मक ऊर्जा को संतुलित करता है।

इन उपायों को पूर्ण विश्वास और नियम से करें। ये गुप्त हैं, इन्हें किसी से साझा न करें, और शुक्रवार से प्रारंभ करें।

यदि आप इन्हें सच्चे मन से करेंगे, तो मालव्य योग जागृत होकर जीवन को ऐश्वर्य से भर देगा।

 

ॐ शुक्राय नमः – आपका जीवन सदा सुखमय हो!

जन्मकुंडली के प्रमुख योग और उनका जीवन पर प्रभाव

आपके उच्च ग्रह कैसा फल देंगे।

आप सभी लोगों से निवेदन है कि हमारी पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़कर फायदा मिले |
Share This Article
error: Content is protected !!
×