
वाक् सिद्धि योग मुख्यतः उन जातकों के लिए अत्यंत प्रभावशाली होता है जिनका जीवन और कार्यक्षेत्र वाणी पर आधारित होता है, जैसे – परामर्श, प्रशासन, शिक्षा, न्याय, चिकित्सा, आध्यात्मिक मार्गदर्शन, कला अथवा जनसंपर्क। सामान्य जीवन में यह योग उतना स्पष्ट फल न भी दे, परंतु जिनके कर्म शब्दों के माध्यम से संचालित होते हैं, उनके लिए यह योग अद्भुत सामर्थ्य प्रदान करता है।
यह भी स्मरणीय है कि वाक् सिद्धि किस ग्रह से प्राप्त हो रही है, यही उसकी वास्तविक प्रकृति और दिशा निर्धारित करता है।
वाक् सिद्धि योग वाणी को केवल मधुर नहीं बनाता, बल्कि उसमें सत्य, प्रभाव, गंभीरता और कर्म-शक्ति का संचार करता है। ऐसे व्यक्ति के शब्द साधारण नहीं होते, वे फलित होने की क्षमता रखते हैं।
वाक् सिद्धि योग का परीक्षण इस प्रकार किया जाता है:
सर्वप्रथम लग्न और लग्नेश की स्थिति देखी जाती है।
तत्पश्चात द्वितीय भाव (वाणी भाव) और उसके स्वामी ग्रह का विश्लेषण किया जाता है।
यदि लग्नेश तथा द्वितीय भाव/द्वितीयेश पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो या वे स्वयं बलवान हों, तो वाक् सिद्धि योग की संभावना अत्यंत प्रबल हो जाती है।
योग की सूक्ष्म शक्ति को समझने के लिए D-1 (लग्न कुंडली) के साथ D-20 विशमांश कुंडली का अध्ययन आवश्यक माना जाता है।
ग्रहयोग के अनुसार वाक् सिद्धि के स्वरूप:
शनि – गुरु संयोजन
यह योग गंभीर, सत्यनिष्ठ और न्यायपूर्ण वाणी प्रदान करता है।
ऐसे व्यक्ति की भाषा नियम, अनुशासन और नैतिकता से परिपूर्ण होती है।
इनकी वाणी आदेशात्मक और स्थायी प्रभाव वाली होती है।
प्रशासन, न्यायपालिका, नीति-निर्माण, प्रबंधन तथा शासन से जुड़े व्यक्तियों के लिए यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है।
सूर्य – चंद्र संयोजन
यह योग कोमल, करुणामयी और आशीर्वादात्मक वाणी देता है।
ऐसे व्यक्ति की वाणी से प्रेरणा, शांति और उपचारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है।
शिक्षक, चिकित्सक, साधु-संत, गुरु, उपदेशक और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों के लिए यह योग श्रेष्ठ फलदायक होता है।
बुध – शुक्र संयोजन
यह योग आकर्षक, कलात्मक और सृजनात्मक वाणी प्रदान करता है।
ऐसे व्यक्ति की भाषा में सौंदर्य, माधुर्य और सम्मोहन शक्ति होती है।
कलाकार, गायक, अभिनेता, लेखक, डिजाइनर, मीडिया तथा रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह योग विशेष रूप से लाभकारी होता है।
सार रूप में, वाक् सिद्धि योग वाणी को केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं बनाता, बल्कि उसे कर्म-साधना का माध्यम बना देता है। ग्रहों के अनुसार यह शक्ति कभी सत्य के रूप में, कभी करुणा के रूप में और कभी सौंदर्य के रूप में प्रकट होती है। यही इसकी वास्तविक आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्ता है।