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3 मार्च 2026 का खग्रास चंद्र ग्रहण: ज्योतिषीय संकेत, वैश्विक प्रभाव और आर्थिक संभावनाएँ

3 मार्च 2026 को ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य, मंगल, राहु और बुध कुंभ राशि में युति (संयोग) करेंगे तथा चंद्रमा केतु के साथ सिंह राशि में रहेगा।

ग्रहण जैसी स्थिति में सूर्य और चंद्रमा की यह पीड़ित अवस्था विभिन्न सरकारों पर गंभीर दबाव, बाजार में सुधार (करैक्शन), नेतृत्व में भ्रम, जनता में चिंता, भावनात्मक अस्थिरता आदि संकेत दे सकती है।

यह समय पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान, क्षमा और दान के लिए उपयुक्त माना जाता है।

अपनी भावनाओं और संवेदनाओं को नियंत्रण में रखें।

हरि ओम तत्सत 🙏

 

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उल्लेखित तिथियाँ: 28/02/2026 से 02/03/2026 तक

देखें
08/02/2026 शाम 04:50 बजे
ज्योतिषीय दृष्टिकोण (भू-राजनीतिक)

ये कुछ तिथियाँ हैं जो वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिए अत्यंत नकारात्मक मानी जा रही हैं 🌎🌍

28/02/2026 से 02/03/2026

12/03/2026 से 16/03/2026

02/04/2026 से 05/04/2026

08/04/2026 से 13/04/2026

18/04/2026 से 22/04/2026

इन तिथियों के आसपास सोना, चांदी, कच्चा तेल तथा अन्य धातुओं में अचानक तेजी देखी जा सकती है।

अन्य ग्रह वित्तीय वृद्धि के लिए अनुकूल स्थिति में हैं 👍

इसके प्रभाव से आर्थिक वातावरण अच्छा रह सकता है और शेयर बाजार में भी अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है, विशेष रूप से कुछ सेक्टर या विशिष्ट शेयरों में।

 

खगोलीय विश्लेषण: 3 मार्च 2026 का ‘चंद्र ग्रहण’ एवं सूतक निर्णय 🔥

 समय, दृश्यता और आवश्यक सावधानियाँ—एक विस्तृत अवलोकन।

आगामी 03 मार्च 2026 को वर्ष का प्रथम ‘खग्रास चंद्र ग्रहण’ (पूर्ण चंद्र ग्रहण) घटित होने जा रहा है। भारतीय समयानुसार ग्रहण की अवधि और सूतक का विवरण निम्नवत है:

 

ग्रहण की समय-सारणी (भारतीय मानक समय)

 

कुल ग्रहण काल: अपराह्न 03:25 बजे से सायं 06:46 बजे तक

 

आंशिक ग्रहण प्रारंभ: सायं 04:30 बजे

 

भारत में चंद्रोदय: सायं 06:26 बजे

 

दृश्य अवधि (भारत में): सायं 06:26 से 06:46 तक

 

कुल दृश्य समय: लगभग 20 मिनट

 

सूतक काल एवं मर्यादा

 

शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण स्पर्श से 9 घंटे पूर्व प्रारंभ हो जाता है।

सूतक प्रारंभ: प्रातः 06:25 बजे से।

चूंकि ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति) भारत में दृश्य होगा, अतः सूतक के नियम मान्य रहेंगे।

 

✨ ग्रहण काल में करणीय कर्म

 

ग्रहण के समय की गई साधना अक्षय फल प्रदान करती है:

मंत्र जप: ॐ नमः शिवाय अथवा ॐ चंद्राय नमः का मानसिक जाप करें।

ध्यान: शांत चित्त से ईष्ट देव का स्मरण करें।

 

 ग्रहण पूर्ण होने के पश्चात (सायं 06:46 के बाद) सवस्त्र स्नान एवं दान-पुण्य शुभ है।

 

विशेष: बाल, वृद्ध, रोगी और गर्भवती स्त्रियाँ यथाशक्ति अपनी शारीरिक क्षमतानुसार नियमों का पालन कर सकती हैं।

 

यह जानकारी वैज्ञानिक आंकड़ों और पंचांग की गणनाओं पर आधारित है। आपके नगर की भौगोलिक स्थिति के अनुसार चंद्रोदय और दृश्यता के समय में आंशिक अंतर संभव है।

 

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