
अपने धर्मग्रंथ में एक कथा आती है.
अब वो कथा किस धर्मग्रंथ में आती है वो मत पूछना क्योंकि वो याद नहीं है.
खैर, कथा इस प्रकार है कि…
एक बार देवराज इंद्र स्वर्गलोक में अपनी इन्द्रासन पर बैठ कर अप्सराओं के नृत्य का आनंद ले रहे रहे थे.
इसी दौरान… देवर्षि नारद का आगमन होता है.
देवर्षि नारद को देखते ही देवराज इंद्र ने अपने सिंहासन से उठकर उनका यथोचित सत्कार किया और उन्हें स्थान प्रदान किया.
फिर, बातों ही बातों में देवराज इंद्र ने कहा कि… महर्षि, आप तो पूरी दुनिया का भविष्य बताते हैं और ज्योतिष के प्रकांड विद्वान हैं तो आप मेरा भी भविष्य बताओ न..
देवराज की बात सुनकर… देवर्षि नारद एक क्षण को ध्यान लगाकर इंद्र का भविष्य जाना और फिर टालते हुए बोले कि… जाने दो देवराज, वैसा कुछ खास नहीं है.
लेकिन, देवराज ने भी कच्ची गोलियाँ नहीं खेली थी.
उन्होंने देवर्षि नारद के मुखमंडल के बदलते भाव को देखकर ही समझ लिया था कि कुछ तो भेद है.
इसीलिए, उन्होंने देवर्षि से दुबारा जिद किया.
उनके जिद के आगे झुकते हुए देवर्षि ने बताया कि… असल में बात ऐसी है न कि… अगले हफ्ते से आपके ऊपर शनि की साढ़े साती चढ़ने वाली है.
शनि की साढ़े साती सुनते ही इंद्र थोड़ा घबड़ा गए और सब कुछ जानते हुए भी उन्होंने नारद से पूछा कि… साढ़े साती लगने से क्या होता है देवर्षि ?
इस पर देवर्षि नारद ने गंभीर होते हुए बताया कि…. जब आप पर शनि की साढ़े साती लगेगी तो आपका सारा धन-दौलत और ऐश्वर्य समाप्त हो जाएगा, सारा रुतबा खत्म हो जाएगा और आप दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे.
ये सुनकर इंद्र काफी घबड़ा गए और मन ही मन इससे बचने का उपाय सोचने लगे.
अंत में उनके मन में आइडिया क्लिक किया कि अगर मैं किसी इंद्रलोक छोड़कर किसी दुर्गम स्थान पर छुप जाऊँ तो फिर शनि मुझे खोज नहीं पायेगा.
और, इस तरह मैं साढ़े साती से बच पाऊँगा.
उन्हें अपना ये यूनिक आइडिया बहुत पसंद आया और वे साढ़े साती लगने से कुछ समय पूर्व ही एक दुर्गम स्थान मौजूद एक शूकर की कोठरी में जाकर छुप गए.
वहाँ, बहुत गंदगी और बदबू थी… लेकिन, शनि को मजा चखाने हेतु देवराज इंद्र किसी तरह दम साध के साढ़े सात तक उसी कोठरी में पड़े रहे.
साढ़े सात बाद वे उस कोठरी से बाहर निकले और शान से इंद्रलोक की ओर प्रस्थान किया.
तो, जाते हुए रास्ते में उन्हें फिर से देवर्षि नारद मिल गए.
देवर्षि नारद को देखते ही इंद्र ने गर्वित भाव से मुस्कुराते हुए कहा : देख लिए न देवर्षि ?
हम शनि को सबक सिखा दिए न ?
हम ऐसी जगह जाकर छुप गए थे न कि शनि हमको खोज ही नहीं पाया तो वो वो हम पर साढ़े साती कैसे लगाता ?
देवराज की बात सुनकर नारद जोरों से हंस पड़े..
और, कहा : आपने शनि को सबक नहीं सिखाया देवराज बल्कि खुद सबक सीख कर आ रहे हैं.
असल में आप स्वयं ही जाकर उस दुर्गम और गंदे बदबूदार शूकर की कोठरी में नहीं छुप गए थे..
बल्कि, शनि की साढ़े साती की वजह से आपकी बुद्धि वैसी हो गई थी कि आप स्वर्गलोक के इस ऐश्वर्य और वैभव को छोड़कर स्वयं से उस गंदे और बदबूदार कोठरी में चले गए.
वास्तव में… यही तो शनि की साढ़े साती है..!
इसके बाद देवराज इंद्र को भी मामला समझ आ गए.
तो… इस कथा के आलोक में मुझे लगता है कि…. हमारे बहुत सारे मित्रों पर भी शनि की साढ़े साती मंडरा रही है..
इसीलिए, वे भी स्वर्गलोग के ऐश्वर्य (विश्व की चौथी बड़ी अर्थवव्यस्था, 1 दिन में गैस डिलीवरी, सबसे पावरफुल मिलिट्री पावर, विश्व में बढ़ता कद, नक्सल एवं आतंकवाद मुक्त भारत, अयोध्या और काशी में जगमगाते मंदिर, सरकारी आवासों में इफ्तार की जगह नवरात्र का कन्या-पूजन आदि) को छोड़कर शूकर की गंदी कोठरी में जाने को छटपटा रहे हैं.
असल में… इसमें उनका कोई दोष नहीं है क्योंकि स्वयं देवर्षि नारद ने देवराज इंद्र को कहा था कि… जब किसी पर साढ़े साती चढ़ती है तो फिर उसकी बुद्धि ही ऐसी हो जाती है कि वो स्वयं ही होशियारी झाड़ते हुए शूकर की कोठरी में जाने को बेचैन हो उठता है.
फिर, यहाँ तो मित्रों पर दुहरी साढ़े साती चढ़ी हुई है..
अर्थात, 15 वर्ष वाली.
तो, ऐसे में उनका दुगना बेचैन होना स्वाभाविक है.
अब आप पूछोगे कि दुहरी साढ़े साती कैसे ?
तो, इसका एक आसान सा जबाब है कि… अपने 733 अरब डॉलर के फॉरेन रिजर्व के साथ अभी भारत का खजाना All time High है.
इसके अलावा, हमारी मिलिट्री पावर भी हाई है.
तो, इस खजाने को विभिन्न सब्सिडी के तौर पर लुटा के खाली करने में और सेना के संसाधन को पुराने होकर रख-रखाव की कमी के कारण खराब होने में उतना समय तो लगेगा ही न ?
इसके अलावा दम तोड़ चुके नक्सलियों एवं पिस्लामी आतंकवाद को फिर से अपना ढांचा खड़ा कर फन उठाने में उतना समय तो लग ही जाएगा.
तब तक… खांग्रेस, सपा, राजद, टीएमसी, dmk आदि पार्टियाँ ठाट से ये पैसा लूटेंगी और सब्सिडी के नाम पर जनता को भी 733 अरब डॉलर लुटाते हुए भारत को कंगाल करती रहेगी.
जिससे जनता को 70 रुपया लीटर पेट्रोल, 12 रुपया किलो आलू और 4 रुपया किलो बैंगन मिलता रहेगा.
और, अपनी जनता तो जानबे करते हैं कि उनको अगर हाफिज सईद भी सस्ता पेट्रोल और सस्ता प्याज दे दे तो ये उन्हीं को वोट कर देंगे..
बाकी, देश और देश की सुरक्षा जाए भाड़ में.
इसीलिए, दुहरी साढ़े साती से कम नहीं लगना है.
असल में हुआ ये है कि मित्रों को टूलकिट रूपी कुछ नारदों ने समझा दिया है कि तुम पर शनि की साढ़े साती चढ़ने वाली है…
इसीलिए, तुम न… ये स्वर्गलोग छोड़कर जाकर शूकर की गंदी कोठरी में छुप जाओ.
इसीलिए, बेचारे उन नारदों को अपना माई-बाप मानते हुए शूकर की कोठरी में जाने को बेचैन हैं.
जबकि, हमलोग समझा रहे हैं कि… अबे, शूकर की कोठरी में गए तो वहाँ दुहरी साढ़े साती चढ़ जाएगी.
इससे बेहतर है कि… हमलोग स्वर्गलोक में ही रहते हैं.. ताकि, हम कम से कम अच्छे बिस्तर पर तो सोएंगे, अच्छे मौसम में रहेंगे और ढंग की जिंदगी जिएंगे.
इसके अलावा, स्वर्गलोक में तो हमारे पास महादेव (जिसने सभी गाली और जहर पीकर अपना कंठ नीला कर लिया है) के पास गुहार करने का भी विकल्प है कि…
प्रभु, इस साढ़े साती को कम करो… क्योंकि, ये ज्यादा कष्टदायक है.
जबकि… वहाँ , शूकर की कोठरी में हमारे पास क्या विकल्प रहेगा… बैगन ?
इसीलिए, भाई…. जिसको जहाँ जाना है जाओ..
हम तो स्वर्गलोक छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं.
काहे कि “विनाश काले – विपरीत बुद्धि” आप पर छाया है , हम पर नहीं.
जय महाकाल…!!!