
जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की भारतीय कमांडर निकली लखनऊ की डाक्टरनी !
दिल्ली में रेड फोर्ट के पास हुए भीषण विस्फोट की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कल गिरफ्तार की गयी लखनऊ की “डॉक्टर शाहीन शहीद” न केवल आतंकी साजिश का हिस्सा थी, बल्कि 🇵🇰 पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन “जैश-ए-मोहम्मद” की महिला विंग ‘जमात-उल-मोमिनात’ की भारत में कमांडर भी थी।
यह भारत के खिलाफ आतंकवाद के इतिहास में एक नया और खतरनाक मोड़ है।
लखनऊ की रहने वाली डॉ शाहीन शहीद को यूपी ATS जम्मू-कश्मीर पुलिस और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, डॉ शाहीन को भारत में जैश की महिला शाखा स्थापित करने और महिलाओं की भर्ती करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, डॉ शाहीन शहीद पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की प्रमुख “सादिया अजहर” के सीधे संपर्क में थीं। सादिया अजहर, जैश के सरगना “मसूद अजहर” की बहन हैं और मसूद अजहर के भाई “युसूफ अजहर” की पत्नी थीं।
“युसूफ अजहर” 1999 में हुई कंधार विमान अपहरण की साजिश का मास्टरमाइंड था, जिसे 7 मई 2025 को भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर में मार गिराया था। यह कनेक्शन केवल एक संगठनात्मक संबंध नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का हिस्सा है।
जांच में पता चला है कि “डॉ शहीद” एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों से पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के संपर्क में थीं और उसे जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिण 🇮🇳 भारत के कुछ इलाकों में महिलाओं की भर्ती का काम सौंपा गया था।
अक्टूबर 2025 में, जैश-ए-मोहम्मद ने अपने इतिहास में पहली बार ‘जमात-उल-मोमिनात’ नामक महिला विंग की स्थापना की घोषणा की थी। मसूद अजहर के नाम से जारी एक ✉ पत्र में बहावलपुर, पाकिस्तान में 8 अक्टूबर को मरकज उस्मान-ओ-अली में भर्ती शुरू होने की बात कही गई थी। इस महिला ब्रिगेड का नेतृत्व सादिया अजहर कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, यह संगठन जैश के मारे गये आतंकियों की बेवाओं, और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को बहावलपुर, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरिपुर और मानसेहरा जैसे शहरों से भर्ती कर रहा है।
विशेष रूप से, मसूद अजहर की बहन समीरा अजहर (उम्मे मसूद) और पुलवामा हमलावर उमर फारूक की विधवा अफीरा फारूक भी इस इकाई के नेतृत्व में शामिल हैं।
इस महिला विंग की स्थापना के बाद, मसूद अजहर ने 21 मिनट का एक ऑडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उसने महिलाओं को प्रशिक्षण, ब्रेनवॉश और तैनाती की विस्तृत योजना बताई।
अजहर ने कहा कि जैसे पुरुषों के लिए 15 दिन का ‘दौरा-ए-तारबियत’ कोर्स है, वैसे ही महिलाओं के लिए ‘दौरा-ए-तस्कीया’ नामक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम होगा।
अपने भाषण में, मसूद अजहर ने महिला कैडर से वादा किया कि “जो भी खातून शामिल होगी, वह इंतकाल के बाद अपनी कब्र से सीधे जन्नत में जाएगी”।
उसने यह भी कहा कि “जैश के दुश्मनों ने हिंदू महिलाओं को सेना में शामिल किया है और महिला पत्रकारों को हमारे खिलाफ खड़ा किया है”।
यह एक सुनियोजित प्रोपेगंडा रणनीति है जो धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करके महिलाओं को आतंकवाद में शामिल करने का प्रयास है।
डॉ शाहीन शहीद फरीदाबाद के धौज स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ी हुई थी। यही वह विश्वविद्यालय है जहां डॉ मुजम्मिल शकील भी पढ़ाता था, जिसके किराए के कमरे से 360 किलोग्राम RDX, 14 सूटकेस भरे विस्फोटक, टाइमर, बैटरियां और रिमोट कंट्रोल बरामद हुए थे।
अधिकारियों को संदेह है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी की प्रयोगशालाओं का उपयोग उन्नत किस्म के विस्फोटक बनाने के लिए किया जा रहा था।
जांचकर्ताओं का कहना है कि यह मॉड्यूल दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी भारत में तीन बड़े आतंकी हमलों की योजना बना रहा था। परंपरागत रूप से, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे दक्षिण एशियाई आतंकी समूहों ने महिलाओं को सक्रिय भूमिकाओं में तैनात करने से परहेज किया था पर भारत के ऑपरेशन सिंदूर में जैश के मुख्यालय पर हमले के बाद, जिसमें मसूद अजहर के 10 परिवार के सदस्यों की 💀 मौत हुई, संगठन ने अपनी रणनीति बदल दी है।
ISIS, बोको हराम, हमास और एलटीटीई जैसे समूहों ने अतीत में महिला आत्मघाती हमलावरों का उपयोग किया है। अब जैश भी इसी रास्ते पर चल रहा है।
इस सिलसिले में UP ATS और जम्मू-कश्मीर पुलिस की लखनऊ के मड़ियांव इलाक़े में IIM रोड मुतक्कीपुर स्थित 🩺 डॉक्टर परवेज अंसारी के घर पर भी छापेमारी जारी है।