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शुभ योग

आज हम २७ योगों की श्रृंखला में तेईसवें योग ‘शुभ’ (Shubha) के विषय में विस्तार से चर्चा करेंगे। यह योग अपने नाम के अनुसार ही जीवन में मंगल, पवित्रता और सौभाग्य का संचार करने वाला माना जाता है।

 

🔯 शुभ योग: विस्तृत विवेचन 🔯

 

‘शुभ’ का अर्थ होता है – ‘कल्याणकारी’, ‘सुंदर’ या ‘भाग्यशाली’। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा का योग 293^\circ 20′ से 306^\circ 40’ के बीच होता है, तब यह योग बनता है। इसके स्वामी शुभ (Lord Shubha / Lakshmi-Narayana) माने जाते हैं, जो ऐश्वर्य और नैतिकता के प्रतीक हैं।

 

🔹 स्वभाव और व्यक्तित्व (Nature & Personality)

शुभ योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति सात्विक गुणों से भरपूर और आकर्षक व्यक्तित्व का धनी होता है।

 * सदाचारी: ऐसे जातक नीति-नियमों का पालन करने वाले और धर्मपरायण होते हैं। ये कभी भी गलत मार्ग से सफलता पाना पसंद नहीं करते।

 * वाणी: इनकी वाणी में मधुरता और प्रभाव होता है। ये अपनी बातों से समाज में सकारात्मकता फैलाते हैं।

 * रूपवान: ये जातक न केवल दिखने में सुंदर होते हैं, बल्कि इनके विचार भी बहुत सुंदर और उदार होते हैं।

 * धैर्य: इनमें अद्भुत सहनशक्ति होती है। ये किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते और मुस्कुराते रहते हैं।

 

🔹 कार्य और वित्त (Work & Finance)

 * शुभ योग के जातक शिक्षा, लेखन, सलाहकार (Counseling), न्याय और धार्मिक संस्थानों में बहुत सफल होते हैं।

 * इन्हें कला, आभूषण और वस्त्रों से जुड़े व्यापार में विशेष लाभ मिलता है।

 * आर्थिक रूप से ये जातक बहुत सुखी होते हैं। माता लक्ष्मी की कृपा से इन्हें कभी भी धन के अभाव का सामना नहीं करना पड़ता। इनकी संपत्ति निरंतर बढ़ती रहती है।

 

🔹 संबंध (Relationships)

 * ये अपने परिवार के गौरव होते हैं। माता-पिता और गुरुओं के प्रति इनमें अटूट श्रद्धा होती है।

 * इनका वैवाहिक जीवन प्रेम और विश्वास की मिसाल होता है। इन्हें गुणी और आज्ञाकारी संतान प्राप्त होती है।

 * समाज में इनका मान-सम्मान बहुत अधिक होता है और लोग इनसे सलाह लेना पसंद करते हैं।

🔹 प्रिडिक्शन के लिए विशेष सूत्र (Prediction Tips)

 * मुहूर्त विचार: यह एक सर्वश्रेष्ठ शुभ योग है। विवाह, सगाई, विद्यारंभ, नए व्यापार का श्रीगणेश, या सोने-चाँदी की खरीदारी के लिए यह योग अत्यंत मंगलकारी है।

 * स्थायी सफलता: इस योग में जो भी शुभ कार्य किया जाता है, उसका फल स्थायी होता है और जातक को जीवन भर यश दिलाता है।

 * स्वामी प्रभाव: स्वामी शुभ (देवता) होने के कारण, इस योग में किए गए कार्यों में दैवीय कृपा सदैव साथ रहती है।

 

🔹 सलाह (Advice)

 * अपनी शुभता को बनाए रखने के लिए जातक को माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त 

ati gupt उपासना करनी चाहिए।

 * शुक्रवार के दिन vischist  muhurat par  सफेद वस्तुओं (मिश्री, खीर) का दान करना इनके लिए विशेष सौभाग्यवर्धक होता है।

 * ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः’ का जाप करना अत्यंत लाभकारी है।

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