नवांश कुंडली का महत्व: क्यों है यह अनिवार्य है। ज्योतिष में एक बहुत ही सटीक कहावत है— "ग्रहों की स्थिति जन्म कुंडली (D1) बताती है, लेकिन उनकी वास्तविक शक्ति नवांश (D9) बताता है।" नवांश को मुख्य रूप से दो बड़े कारणों से अनिवार्य माना जाता है: (आत्मिक बल): यदि जन्म कुंडली एक शरीर है, तो नवांश उसकी 'आत्मा' है। कोई ग्रह बाहर से (D1 में) कितना भी चमक रहा हो (जैसे उच्च का होना), यदि वह नवांश में कमजोर है, तो वह अपने पूर्ण शुभ फल कभी नहीं दे पाएगा। यह आपकी आंतरिक शक्ति, चरित्र की दृढ़ता और भाग्य के वास्तविक 'फलों' को दर्शाता है। Marriage (वैवाहिक जीवन): सप्तम भाव के सूक्ष्म विश्लेषण के लिए नवांश अनिवार्य है। जीवनसाथी का स्वभाव कैसा होगा, आपसी तालमेल कैसा रहेगा और विवाह की स्थिरता कितनी होगी, यह केवल नवांश ही स्पष्ट कर सकता है। इसे 'कलत्र भाव' का विस्तार माना जाता है। ग्रहों के लिए श्रेष्ठ तत्व (Preferable Tattvas)नवांश में ग्रह की मजबूती उसके 'तत्व' से जांची जाती है। नीचे प्रत्येक ग्रह के लिए उनके अनुकूल तत्वों का विवरण दिया गया है ताकि आप इसे आसानी से कॉपी और उपयोग कर सकें: सूर्य (Sun): पहली पसंद 'अग्नि तत्व' (Fiery) नवांश है, दूसरी पसंद 'वायु तत्व' (Airy) है। चंद्रमा (Moon): पहली पसंद 'जल तत्व' (Watery) नवांश है, दूसरी पसंद 'पृथ्वी तत्व' (Earthy) है। मंगल (Mars): पहली पसंद 'अग्नि तत्व' (Fiery) नवांश है, दूसरी पसंद 'वायु तत्व' (Airy) है। बुध (Mercury): पहली पसंद 'पृथ्वी तत्व' (Earthy) नवांश है, दूसरी पसंद 'वायु तत्व' (Airy) है। शुक्र (Venus): पहली पसंद 'जल तत्व' (Watery) नवांश है, दूसरी पसंद 'पृथ्वी तत्व' (Earthy) है। बृहस्पति (Jupiter): यह ग्रह सभी तत्वों (अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल) के नवांश में शुभ फल देता है। शनि (Saturn): पहली पसंद 'वायु तत्व' (Airy) नवांश है, दूसरी पसंद 'पृथ्वी तत्व' (Earthy) है। नवांश में विश्लेषण के तीन मुख्य स्तंभजब भी आप किसी ग्रह को नवांश में देखें, तो इन तीन स्थितियों को गहराई से समझें: Playlist 3 Videos Sshree Astro Vastu | Abroad Study, Loan Approval- Review | Yash Mehta 0:34 Sshree Astro Vastu | Student Visa, Abroad Study - Review In Eng |Sahil Warge | #sshreeastrovastu 0:58 Sshree Astro Vastu |Astro Vastu Course | Martial, Business, Kid Health Case review|Er. Ulhas Chimaji 5:10 तत्व परिवर्तन का प्रभाव: यदि ग्रह (जैसे चतुर्थेश या भाग्येश) अपने अनुकूल तत्व से अलग तत्व में जाता है, तो उस भाव के फलों (सुख या भाग्य) में 'तीव्रता' (Intensity) और 'स्थायित्व' (Stamina) की कमी आएगी। प्रभाव (उदाहरण): एक चतुर्थेश (चतुर्थ भाव का स्वामी) जन्म कुंडली में बली है, लेकिन नवांश में अपने अनुकूल तत्व से अलग तत्व में है। इसका मतलब है कि व्यक्ति के पास भौतिक संसाधन (जैसे घर, वाहन) हो सकते हैं, लेकिन उन्हें 'स्थिर' रूप से भोगने में कमी आएगी, या घरेलू सुख में 'ऊर्जा' का विरोधाभास रहेगा। इसी तरह, भाग्येश के लिए यह 'भाग्य' की स्थायित्व में कमी लाएगा। मैत्री और शत्रु राशि का प्रभाव: यदि ग्रह नवांश में अपने शत्रु की राशि में है, तो व्यक्ति उस भाव के फलों (सुख या भाग्य) को लेकर 'असुरक्षित' महसूस करेगा। संसाधन होने पर भी वह मानसिक शांति नहीं पाएगा। प्रभाव (उदाहरण): यदि चतुर्थेश नवांश में शत्रु राशि में है, तो व्यक्ति अपने घर, वाहन या सुख-सुविधाओं को लेकर 'असुरक्षित' महसूस करेगा, भले ही उसके पास पर्याप्त संसाधन हों। (जैसे बड़ा घर है लेकिन उसमें शांति नहीं है, या वाहन का दुर्घटना का डर)। भाग्येश के लिए, व्यक्ति अपने भाग्य पर भरोसा करने में असुरक्षित महसूस करेगा। सौम्य और क्रूर नवांश: यदि ग्रह सौम्य नवांश में है, तो व्यक्ति का उस भाव के फलों (सुख या भाग्य) के प्रति दृष्टिकोण 'सौम्य' और 'नीतिवान' होगा। वहीं, क्रूर नवांश में होने पर दृष्टिकोण 'कठोर' या 'जिद्दी' हो सकता है। प्रभाव (उदाहरण): यदि चतुर्थेश सौम्य नवांश में है, तो व्यक्ति का सुख और घरेलू वातावरण 'सौम्य' और 'नीतिवान' होगा। यदि क्रूर नवांश में है, तो घरेलू वातावरण 'तनावपूर्ण' या 'जिद्दी' हो सकता है, सुख प्राप्त करने के लिए कठोर तरीके अपनाए जा सकते हैं। भाग्येश के लिए, भाग्य के प्रति दृष्टिकोण तदनुसार बदल जाएगा। नवांश के 12 भावों से क्या देखेंनवांश कुंडली का प्रत्येक भाव वैवाहिक और व्यक्तिगत जीवन को गहराई से परिभाषित करता है: प्रथम भाव (1st House): आपका अपना स्वरूप। वैवाहिक जीवन में आपका स्वभाव और आपका व्यक्तिगत योगदान। द्वितीय भाव (2nd House): विवाह के बाद आपकी पारिवारिक भूमिका और परिवार के साथ आपके संस्कार/मूल्य। तृतीय भाव (3rd House): आपके ससुर (Father-in-law) और भाई-बहनों का वैवाहिक जीवन में प्रभाव। चतुर्थ भाव (4th House): घर का आंतरिक वातावरण, घरेलू सुख और इसमें आपकी माता की भूमिका। पंचम भाव (5th House): संतान (Progeny) सुख और जीवनसाथी के बड़े भाई-बहनों (Elder BIL/SIL) के साथ संबंध। षष्ठ भाव (6th House): विवाह में होने वाले झगड़े, कोर्ट-कचहरी, अलगाव (Separation) और अहंकार का टकराव। सप्तम भाव (7th House): जीवनसाथी का वास्तविक चरित्र, व्यवहार और वैवाहिक जीवन की समग्र गुणवत्ता। अष्टम भाव (8th House): अचानक आने वाली बाधाएं, ससुराल पक्ष (In-laws) का हस्तक्षेप और पारिवारिक श्राप। नवम भाव (9th House): आपका समग्र भाग्य, धार्मिक झुकाव, पिता की भूमिका और जीवनसाथी के छोटे भाई-बहन। दशम भाव (10th House): रिश्तों में आने वाली कठोरता (Rigidity) और आपकी सास (Mother-in-law) का प्रभाव। एकादश भाव (11th House): रिश्तों से मिलने वाले लाभ, एक से अधिक संबंधों की संभावना और दूसरे विवाह का विचार। द्वादश भाव (12th House): शय्या सुख (Sexual Life), मोक्ष और जीवनसाथी के साथ आपका आत्मिक (Soulmate) कनेक्शन। निष्कर्ष (Conclusion) महत्वपूर्ण सार यह है कि बल केवल 'शुभता' का प्रतीक नहीं है, बल्कि वह 'शक्ति' का पैमाना है।यदि आप जन्म कुंडली के कारक ग्रह (Functional Benefic) को नवांश में मजबूत होते देख रहे हैं, तो यह अत्यंत खुशी की बात है क्योंकि वह अपनी पूरी शक्ति से आपको सकारात्मक परिणाम देगा। वहीं, इसके विपरीत यदि कुंडली का कोई अकारक ग्रह (Functional Malefic) नवांश में बहुत मजबूत प्रतीत हो रहा है, तो सावधान हो जाएं; वह ग्रह जीवन में समस्याएं और चुनौतियां भी उसी 'तीव्रता' (Intensity) के साथ प्रदान करेगा। शक्ति जिसके पास भी होगी—चाहे वह मित्र हो या शत्रु—वह अपना प्रभाव पूरे जोर-शोर से दिखाएगा। ग्रहों की परस्पर सम्बन्ध फलविचार एवं नवमांश कुण्डली ग्रहों की परस्पर सम्बन्ध फलविचार एवं नवमांश कुण्डली 🔊 Listen to this ज्योतिष शास्त्र में कुंडली विवेचन हेतु मूल आधार हैं, 12 भाव, 12 राशियाँ, 27 नक्षत्रों में, 09 ग्रहों के परस्पर बनने वाले स्थान, युति, दृष्टि और परिवर्तन के अनेकानेक परस्पर सम्बन्ध। ग्रहों के “युति” सम्बन्ध – ग्रहों की युति अर्थात कुंडली के किसी भी भाव में एक से अधिक ग्रहों का स्थित होना। किसी भी कुंडली में अधिकतम 8 ग्रह लग्न कुंडली के एक भाव में युति कर सकते हैं। कुंडली में किन्ही 2 ग्रहों का कुंडली के किसी भी एक भाव में स्थित होना एक सामान्य नवमांश कुंडली नवमांश कुंडली 🔊 Listen to this जब नवमांश मे मंगल और शुक्र की युति हो, तो स्त्री कन्या को जन्म देने वाली, स्वयं मृग नेत्री, अभिसारिक (प्रेमी से निश्चित स्थान पर मिलने वाली) काम से व्याकुल होकर दूसरे के घर जाने वाली होती है। जब नवांश मे मंगल और शनि का राशि परिवर्तन योग हो या मंगल शनि पापग्रह से युक्त हो या दृष्ट हो, तो ऐसी स्त्री कन्या संतति प्रधान (अधिक पुत्रिया) होती है, ऐसी स्त्री विवाहेतर प्रेम सम्बन्ध रखती है और कोई-कोई स्त्री निज पति को त्याग देती है। नवांश मे सप्तम भाव मे 1, 8 मंगल आप सभी लोगों से निवेदन है कि हमारी पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़कर फायदा मिले | Join Our Whatsapp Group