
आज हम २७ योगों की श्रृंखला में दूसरे योग ‘प्रीति’ के बारे में विस्तार से जानेंगे। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह योग अत्यंत शुभ और प्रेम प्रदायक माना जाता है।
प्रीति योग: विस्तृत विवेचन
‘प्रीति’ योग का अर्थ है – ‘प्रेम, लगाव और मित्रता’। जब सूर्य और चंद्रमा का योग 13^\circ 20′ से 26^\circ 40’ के बीच होता है, तब यह योग बनता है। इसके स्वामी विष्णु (Lord Vishnu) हैं, जो जगत के पालनहार और प्रेम के प्रतीक हैं।
🔹 स्वभाव और व्यक्तित्व (Nature & Personality)
प्रीति योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति स्वभाव से बहुत ही सौम्य, मिलनसार और आकर्षक होता है।
* लोकप्रियता: ऐसे जातक समाज में बहुत लोकप्रिय होते हैं। लोग सहज ही इनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं।
* परोपकारी: ये दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं और न्यायप्रिय होते हैं।
* कलाप्रेमी: इनमें सौंदर्य बोध बहुत अच्छा होता है और ये कला, संगीत या साहित्य के शौकीन होते हैं।
* वाणी: इनकी वाणी में मधुरता होती है, जिससे ये किसी का भी दिल जीत लेते हैं।
🔹 कार्य और वित्त (Work & Finance)
* प्रीति योग के जातक टीम वर्क में बहुत सफल होते हैं। ये अच्छे मैनेजर, सलाहकार (Consultant) या पब्लिक रिलेशन ऑफिसर बन सकते हैं।
* कला, फैशन, मीडिया और सजावट (Interior Designing) के क्षेत्र में ये विशेष सफलता प्राप्त करते हैं।
* इन्हें आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है और समाज के प्रभावशाली लोगों से सहयोग मिलता रहता है।
🔹 संबंध (Relationships)
* यह योग रिश्तों के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इनका वैवाहिक जीवन सुखद होता है।
* ये अपने जीवनसाथी और परिवार के प्रति बहुत वफादार और स्नेही होते हैं।
* मित्रों का घेरा बड़ा होता है और ये मित्रता निभाने में विश्वास रखते हैं।
🔹 प्रिडिक्शन के लिए विशेष सूत्र (Prediction Tips)
* मुहूर्त विचार: प्रीति योग सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ है। सगाई, विवाह, नए प्रेम संबंध की शुरुआत, या मेल-मिलाप के लिए यह योग श्रेष्ठ फल देता है।
* सफलता: इस योग में शुरू किए गए कार्यों में लोगों का भरपूर समर्थन और सहयोग मिलता है, जिससे सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
* शुभता: क्योंकि इसके स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए यह योग जीवन में ऐश्वर्य और शांति प्रदान करता है।
🔹 सलाह (Advice)
* अपनी इस प्रेमपूर्ण ऊर्जा को बनाए रखने के लिए जातक को भगवान विष्णु या लक्ष्मी-नारायण की पूजा करनी चाहिए।
* ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप इनके लिए सौभाग्यवर्धक होता है।
* किसी को कटु वचन बोलने से बचें, क्योंकि आपकी शक्ति आपकी मधुर वाणी ही है।