
आज हम २७ योगों की श्रृंखला में उन्नीसवें योग ‘परिघ’ (Parigha) के विषय में विस्तार से चर्चा करेंगे। यह योग शक्ति और विजय का प्रतीक है, लेकिन प्रिडिक्शन में यह थोड़ा मिश्रित और चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
‘परिघ’ का अर्थ होता है – ‘नगर का मुख्य द्वार’ या ‘द्वार को बंद करने वाली लोहे की छड़/अर्गला’। यह सुरक्षा और अवरोध दोनों का संकेत देता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा का योग 240^\circ 00′ से 253^\circ 20’ के बीच होता है, तब यह योग बनता है। इसके स्वामी विश्वकर्मा (Lord Vishwakarma) हैं, जो देवताओं के वास्तुकार और शिल्पकार हैं।
🔹 स्वभाव और व्यक्तित्व (Nature & Personality)
परिघ योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति अत्यंत साहसी और अपनी बात का पक्का होता है।
* अभेद्य व्यक्तित्व: इन जातकों के मन की बात जानना कठिन होता है। ये अपने सिद्धांतों के प्रति बहुत जिद्दी (Stubborn) हो सकते हैं।
* बहुमुखी प्रतिभा: स्वामी विश्वकर्मा होने के कारण, इनमें कुछ न कुछ नया बनाने या सुधारने की अद्भुत क्षमता होती है। ये रचनात्मक (Creative) होते हैं।
* संघर्षशील: इन्हें जीवन के शुरुआती दौर में कई ‘परिघ’ (बाधाओं) को पार करना पड़ता है, जो इन्हें भविष्य के लिए मजबूत बनाता है।
* विद्वत्ता: ये जातक शास्त्रज्ञ होते हैं और कई विषयों का गहरा ज्ञान रखते हैं, लेकिन कभी-कभी इनका क्रोध इनके ज्ञान पर हावी हो जाता है।
🔹 कार्य और वित्त (Work & Finance)
* परिघ योग के जातक इंजीनियरिंग, वास्तुकला (Architecture), सेना, और कानून व्यवस्था में बहुत सफल होते हैं।
* ये जातक अच्छे प्रबंधक (Manager) होते हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी व्यवस्था बनाए रखने में माहिर होते हैं।
* आर्थिक रूप से ये समृद्ध होते हैं, लेकिन इन्हें अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए निरंतर सतर्क रहना पड़ता है। मध्य आयु के बाद इनका आर्थिक ग्राफ तेजी से ऊपर जाता है।
🔹 संबंध (Relationships)
* परिवार के प्रति ये बहुत सुरक्षात्मक (Protective) होते हैं। ये अपने परिवार के सम्मान के लिए किसी भी बाधा से टकरा सकते हैं।
* इनके जिद्दी स्वभाव के कारण कभी-कभी भाई-बहनों या जीवनसाथी के साथ वैचारिक टकराव हो सकता है।
* मित्रों के बीच ये एक मजबूत स्तंभ की तरह होते हैं, जिस पर संकट के समय भरोसा किया जा सके।
🔹 प्रिडिक्शन के लिए विशेष सूत्र (Prediction Tips)
* मुहूर्त विचार: परिघ योग का पूर्वार्ध (शुरुआती आधा भाग) अशुभ माना जाता है। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य या नया अनुबंध नहीं करना चाहिए। हालांकि, शत्रु पर विजय पाने या सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए यह योग प्रबल है।
* बाधा का संकेत: इस योग में शुरू किए गए कार्यों में अक्सर शुरुआत में बड़ी रुकावटें आती हैं, जिन्हें धैर्य और साहस से ही पार किया जा सकता है।
* निर्माण कार्य: क्योंकि इसके स्वामी विश्वकर्मा हैं, इसलिए यदि परिघ योग का उत्तरार्ध (बाद का भाग) हो, तो निर्माण कार्य या तकनीकी कार्यों की योजना बनाना फलदायी हो सकता है।
🔹 सलाह (Advice)
* अपनी रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए जातक को भगवान विश्वकर्मा या भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए।
* प्रतिदिन ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करना इनके मार्ग की बाधाओं (परिघ) को हटाने में सहायक होता है।
* स्वभाव में लचीलापन लाएं और दूसरों के विचारों का भी सम्मान करें।