
हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर नर्मदा जयंती (Narmada Jayanti मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर माता नर्मदा अवतरित हुईं थीं। इसी वजह से इस तिथि को नर्मदा जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नर्मदा नदी में स्नान करने से सभी तरह के पापों से छुटकारा मिलता है। साथ ही जीवन सफल होता है
आज यानी माघ शुक्ल सप्तमी को नर्मदा जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर लोग माता नर्मदा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही स्नान करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ कामों को करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही माता नर्मदा की कृपा प्राप्त होती है। क्या आप जानते हैं कि आखिर किस कारण नर्मदा जयंती मनाई जाती है? अगर नहीं पता, तो चलिए हम आपको बातएंगे इसकी वजह के बारे में।
पौराणिक कथा के अनुसार, माघ माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मां नर्मदा अवतरित हुईं थीं। इस वजह से इस तिथि पर नर्मदा जयंती मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर नर्मदा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से नर्मदा नदी में स्नान करने से जीवन के सभी तरह के दुख और संकट से छुटकारा मिलता है। साथ ही सुख-शांति मिलती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं और राक्षसों के बीच कई बार युद्ध हुए, जिसके कारण देवता पाप के भागीदार बन गए। इसकी वजह से देवतागण महादेव के पास पहुंचे और उनसे पाप से छुटकारा पाने के लिए कोई उपाय पूछा। ऐसे में शिव जी ने देवताओं को पाप से मुक्ति दिलाने के लिए मां नर्मदा को उत्पन्न किया था।