
नरसिंह देवता उत्तराखंड के एक प्रसिद्ध देवता माने जाते है जिन्हें काफी न्यायकारी माना जाता है
अब यह जो उत्तराखंड के नरसिंह देवता है वह विष्णु अवतार नृसिंह भगवान नहीं है बल्कि गुरु गोरखनाथ जी के शिष्य है जिनको नौ भाई नरसिंह जोगी संत के रूप में पूरे उत्तराखंड में पूजे जाते है
नौ नरसिंह के नाम है
1 इंगला बीर
9 नरसिंह देवताओं का मुख्य स्थान जोशीमठ माना जाता है जहां भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का भी धाम है।
उत्तराखंड में जागर नामक एक पूजा प्रतिष्ठा होती है जहां देवताओं को जगाया जाता है संगीत के माध्यम से जिसे यह देवता अपने पश्वा (पुजारी) पर अवतरित होते है अब जागर का अर्थ होता है जागृत करना किसे? हमारी अन्दर की चेतना को क्योंकि ईश्वर के तीन रूप है सत यानी सत्य, चित यानी चेतना (चेतना सर्व व्यापी है सभी के अंदर है वह खुद ईश्वर है) और आनंद यानी सुख जब यह चेतना जागृत होती है तब वह नरसिंह देवता के रूप में कल्याण करती है।
उत्तराखंड में नरसिंह देवता की कहानी ऐसी मानी जाती है कि महादेव ने केसर के बीच को उगाया था जिसे एक पेड़ आया उसकी डाली में नौ रंग के फूल थे जो नौ स्थानों में गिरा जिसे नौ नरसिंह की उत्पत्ति हुई जो बाद में आगे जाकर गोरखनाथ के शिष्य बने नौ भाइयों में से सबसे बड़े भाई दूधिया नरसिंह को
माना जाता है जिन्हें शांत स्वरूप में माना जाता है इनको दूध और रोट (मीठी रोटी) देकर प्रसन्न किया जाता है और सबसे छोटे डोंडिया नरसिंह है जो काफी गुस्सैल है इनको मनाने के लिए बकरे की बलि तक भी चढ़ती है और डोंडिया नरसिंह काफी न्यायकारी माने जाते है
पूरे उत्तराखंड में नरसिंह देवता की पूजा फोटो या फिर मूर्ति के रूप में नहीं बल्कि चिमटा, तिम्रु की लकड़ी, लोहे का चाबुक और पत्थर की पिंडी के रूप में पूजे जाते है। आज भी नरसिंह देवता की मान्यता पूरे उत्तराखंड बहुत पुरानी है और उत्तराखंड की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है।