
वीर सावरकर के बारे में कुछ कहने के पहले —
जिस टीपू सुलतान की शान में आप कसीदे पढ़ रहे हैं,उसी की तलवार की डर से आपके पूर्वज तुलसीराम ने सलवार पहन ली थी जो आजतक आपने उतारी नहीं पहने हुए हैं–
अब आते हैं टीपू सुलतान पर –द्वितीय मैसूर युद्ध 1792 के समय, टीपू सुलतान ने अंग्रेज़ गवर्नर लार्ड कार्नवालिस को संधि और समर्पण के लिए खत लिखा जिसे कार्नवालिस ने स्वीकार किया तथा टीपू ने कार्नवालिस के समक्ष समर्पण करते हुए संधि की जिसे इतिहास में
#श्रीरंगपटनम_संधि_18_मार्च_1792
के नाम से जाना जाता है और इतिहास की ये एक शर्मनाक संधि है -इसकी शर्तें इस प्रकार है —
1-अपना आधा राज्य टीपू ने अंग्रेजों को दिया
2-टीपू 3 करोण रूपया हर्जाना के रूप में अंग्रेजों को देखा
3-यह शर्त सबसे शर्मनाक थी-टीपू ने बंधक के रूप में अपने 8 साल के बेटे अब्दुल खालिक और 5 साल के बेटे मोहिउद्दीन को अंग्रेजों को सौंप दिया –3 करोण की अदायगी के बाद ये मुक्त होंगे —
ऐसा बहादुर था तुम्हारा टीपू औवेसी साहब