
पुष्प नक्षत्र में लाकर भैरव को अर्पित कर फिर इसे दाहिने हाथ में बांधने से कंपन के रोग में आराम मिलता है।
महुआ के बांदे को विशाखा नक्षत्र में लाकर विधिवत पूजा करने के बाद गले में धारण करने से भय समाप्त हो जाता है। डरावने सपने नहीं आते हैं और शक्ति (पुरुषत्व) में वृद्धि होती है।
कुश के बांदे के बारे में कहा जाता है कि भरणी नक्षत्र में इसे लेकर पूजा के स्थान पर रखने मात्र से आर्थिक कष्ट दूर होते हैं।
बेर के बांदे को मूल नक्षत्र में विधिवत तोड़कर लाने के पश्चात देव प्रतिमा की तरह इसको स्नान कर पूजा करें। इसके बाद इसे लाल कपड़े में बांधकर सीधे हाथ के बाजू में धारण कर लें। इस प्रकार आप जो भी मनोकामना रखेंगे वह पूरी होगी।
हरसिंगार के बांदे को पुष्य नक्षत्र में पूजा करने के बाद लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखें तो आपको कभी धन की कमी नहीं होगी। मघा नक्षत्र में हरसिंगार का बांदा लाकर घर में कहीं भी रखने से समृद्धि एवं सम्पन्नता में वृद्धि होती है।
नीम के बांदे को श्रवण नक्षत्र में लाकर पूजा करने के बाद अपने शत्रु से मात्र स्पर्श करा दें तो उसके बुरे दिन शुरू हो जाते हैं।
बरगद का बांदा शुक्रवार के ला कर लक्ष्मी जी बाजू में बांधने से हर कार्य में सफलता मिलती है और कोई आपको हानि नहीं पहुंचा सकता।
अनार के बांदे को रविपुष्य के दिन तोड़ कर अपने पास रखने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती और न ही भूत-प्रेत आदि नकारात्मक शक्तियों का घर में प्रवेश होता है।
आम के पेड़ के बांदे को किसी भी एकादशी के दिन लाकर स्नान कराकर पूजा करने के बाद भुजा पर धारण करने से कभी भी आपकी हार नहीं होती और विजय प्राप्त होती है।
आंवले का बांदा बुधवार को लाकर पूजा करके दाहिनी भुजा पर बांधने से चोर, डाकू, हिंसक पशु का भय नहीं रहता।
11 कुशा का बान्दा
वनस्पति तंत्र में बान्दों को अत्यन्त तीव्र तांत्रिक प्रभाव की वस्तु माना जाता है इसमें भी कुशा के बान्दे अत्यन्त महत्व माना जाता है। धन के लिए इसका प्रयोग अद्भुत प्रभावशाली होता है।
धन के लिए अत्यन्त प्रभावी कुशा के कुछ बान्दे प्राप्त हो गये हैं। हम इसे सिद्ध कर रख लेंगे। जिन्हें प्राप्त करने हो सम्पर्क कर सकते हैं।
धनदायक्षिणी के यंत्र के साथ कुशा का बान्दा एवं रविपुष्य योग में लायी हुयी शंखपुष्पी की जड रख लें तो रूका हुआ व्यापार भी चल पडता है। धन की तंगी कभी नहीं होती। इन्हें चांदी की डिब्बी में अपनी तिजोरी में रखना होता है।
12 *काली धतूरे की जड़*
काले धतूरे की जड भी एक अत्यन्त प्रभावशाली तांत्रिक वनस्पति होती है। इसकी तांत्रिक शक्तियों के स्फुरण के लिए इसे भली प्रकार तांत्रिक विधान से तोडकर लाना एवं सिद्ध करना आवश्यक है। जब वनस्पतियां तांत्रिक विधान से लायी जाती हैं तो उनके अभिमानी देव भी साथ में आते हैं एवं वही तांत्रिक प्रभाव के मूल कारण होते हैं।
सामान्य धतूरा हरा होता है, लेकिन काला धतूरा (जिसका तना और फूल गहरे बैंगनी या काले रंग के हों) तंत्र में बहुत महत्वपूर्ण है। इस प्रमुख प्रयोग ऊपरी बाधा निवारण, पितृ दोष शांति और गंभीर रोग मुक्ति के लिए होता है।
इसे किसी रविपुष्य नक्षत्र या अमावस्या को निमंत्रण देकर उखाड़ना चाहिए। इसपर मंत्र के जप कर इसे सिद्ध कर लेना चाहिए। इसकी जड़ को रविवार के दिन दाहिनी भुजा में धारण करने से भूत-प्रेत और ऊपरी हवाओं का असर नहीं होता।
इसके निम्न मुख्य लाभ हो जाते हैं।
शत्रु बाधा निवारण: यदि शत्रु अकारण परेशान कर रहा हो।
ऊपरी बाधा/तंत्र काट: यदि घर या व्यक्ति पर किसी ने कुछ किया-कराया हो।
अभय प्राप्ति: अकारण भय, बुरे सपने या आत्मविश्वास की कमी को दूर करने के लिए।
ग्रह शांति: विशेषकर शनि और राहु के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए।
घर के मुख्य द्वार पर इसे लटकाने से घर नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं।