
विश्व की सारी शक्ति मिलकर भी माँ बगलामुखी की बराबरी नहीं कर सकती। कई जन्म के पुण्य प्रभाव से माँ की साधना करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
भगवती की सेवा केवल मंत्र जप से ही नही होती है। बल्कि उनके नाम का गुणगान करने से भी होती है। जिस प्रकार नारद ऋषि हर पल भगवान विष्णु का नाम जपते हैं। उसी प्रकार साधकों को माँ पीताम्बरा का नाम जप हर पल करना चाहिए एवं अन्य लोगो को भी उनके नाम की महिमा के बारे में बताना चाहिए।
भगवती बगलामुखी के ध्यान से स्पष्ट हो जाता है। कि बगलामुखी अमृतत्व प्राप्ति के मार्ग में आने वाले शत्रु, कलह तिरस्कार और भय (विष रूपी) को पूर्ण रूप से समाप्त कर देती हैं। देवी विरोधियों – शत्रुओं की वाणी एवं बुद्धि को ही कुंठित कर देती है। जिससे शत्रु आपके प्रति षड्यंत्र नहीं कर सकते।
बगला शक्ति का मूल सूत्र हैं। अथर्वा प्राण सूत्र’। ये प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है। और साधना द्वारा इसे चैतन्य किया जा सकता है। जब यह प्राण सूत्र जाग्रत हो जाता है। तो व्यक्ति अपने सामने बैठे व्यक्ति पर ही नहीं अपितु किसी दूरस्थ स्थान पर स्थिति व्यक्ति को सम्मोहित कर सकता है। बगलामुखी की साधना द्वारा ही इस अथर्व प्राण सूत्र को जाग्रत किया जा सकता है। जब यह सूत्र जाग्रत हो जाता है। तो व्यक्ति अपने जीवन में स्तम्भन, वशीकरण और कीलन की शक्ति प्राप्त कर सकता है।
*पौराणिक बगलामुखी स्तोत्र*
नमो देवि बगले! चिदानंद रूपे, नमस्ते जगद्वश-करे-सौम्य रूपे। नमस्ते रिपु ध्वंसकारी त्रिमूर्ति, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ।। सदा पीत वस्त्राढ्य पीत स्वरूपे, रिपु मारणार्थे गदायुक्त रूपे। सदेषत् सहासे सदानंद मूर्ते, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ।।
त्वमेवासि मातेश्वरी त्वं सखे त्वं, त्वमेवासि सर्वेश्वरी तारिणी त्वं । त्वमेवासि शक्तिर्बलं साधकानाम, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ।।
रणे, तस्करे घोर दावाग्नि पुष्टे, विपत सागरे दुष्ट रोगाग्नि प्लुष्टे ।। त्वमेका मतिर्यस्य भक्तेषु चित्ता, सषट कर्मणानां भवेत्याशु दक्षः ।।
जय माँ बगलामुखी सब भक्तों कि रक्षा करना ।