
(इसे सेव कर लें… आगे काम आएगा)
केन्द्र भाव (1, 4, 7, 10)
“दिखने वाली ज़िंदगी”
ये सबसे प्रभावशाली और दिखाई देने वाले भाव हैं।
दुनिया आपको किस रूप में देखती है, ये बताते हैं।
उदाहरण: कोई व्यक्ति बाहर से बहुत सफल दिखे, पर अंदर से खालीपन महसूस करे।
दुष्ट स्थान / दुःस्थान (6, 8, 12)
“छुपी हुई ज़िंदगी”
ये आंतरिक और कर्मात्मक भाव हैं।
उदाहरण: कठिनाइयों से गुज़रने वाला व्यक्ति अक्सर अधिक समझदार और विरक्त बनता है।
त्रिकोण भाव (1, 5, 9)
सबसे शुभ भाव
इन्हें सबसे सहायक माना जाता है।
उदाहरण: ऐसा व्यक्ति जो सफलता भी पाए और मन की शांति भी बनाए रखे।
तीसरा और ग्यारहवाँ भाव (3, 11)
इच्छा और प्रयास
इनके फल ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
उदाहरण: जोखिम लेना — जो या तो सफलता दिलाए या समस्या खड़ी करे।
दूसरा भाव (2)
तटस्थ क्षेत्र
यह अपने आप में न बहुत शुभ है न अशुभ।
उदाहरण: धन योग या वाणी का प्रभाव पूरी कुंडली देखकर ही तय होता है।
सरल सत्य:
कुछ भाव आपकी बाहरी दुनिया बनाते हैं।
कुछ आपके अंदर की दुनिया।
कुछ दोनों को संतुलित करते हैं।
और ज़्यादातर लोग सिर्फ वही चाहते हैं जो दिखता है।