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कोकणी होली की प्रार्थना

आज जो शिमगा (होली) का त्योहार सभी बच्चे-बूढ़े मिलकर मना रहे हैं, हे महाराज, आप सभी की रक्षा करें। जो भी कष्ट, बाधा या टेढ़ी-मेढ़ी विपत्तियाँ हों, उन्हें दूर कर दें महाराज।
होय महाराज…

यदि किसी ने किसी के साथ कोई बुरा या टेढ़ा व्यवहार किया हो, तो वह सब यहीं समाप्त हो जाए महाराज।

होय महाराज…

जिन्हें संतान नहीं हो रही है उन्हें संतान सुख दें। सभी को काम-धंधे में सफलता दें। बच्चों को शिक्षा में सफलता दें। जिनका विवाह नहीं हो पा रहा है, वह आपकी कृपा से शीघ्र संपन्न हो महाराज।
होय महाराज…

हे देव महाराज, आज जो महाराष्ट्र में सूखा पड़ा है, उसे समाप्त करें और अपनी कृपा दृष्टि से भरपूर वर्षा दें महाराज।
होय महाराज…

हे देव महाराज, आजकल जो लड़कियों पर अत्याचार हो रहे हैं, उन्हें रोकें और जो ऐसा करते हैं उनका नाश करें महाराज।
होय महाराज…

हे देव, मैं सबकी ओर से नारियल अर्पित कर प्रार्थना कर रहा हूँ। अब सभी चरण स्पर्श करें और शिमगा खेलने आएँ। पानी का दुरुपयोग न करें तो अच्छा होगा।

बोलो होली रे होली,
पुरण की पोली।

आप सभी को शिमगा (होली) की हार्दिक शुभकामनाएँ।

होली पूर्णिमा – महत्वपूर्ण जानकारी

होली पूजन विधि

होली जलने के बाद घर के प्रत्येक व्यक्ति को गाय का घी, 11 लौंग, 7 बताशे, 5 पान के पत्ते, सूखा नारियल, पुरणपोली, दाल-भात आदि नैवेद्य लेकर होली की पूजा करनी चाहिए।

■ 11 प्रदक्षिणा

11 परिक्रमा करें। नारियल और घी अर्पित करें। नैवेद्य दिखाकर प्रार्थना करें। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है और कष्ट दूर होते हैं।

काले तिल उपाय

होली के दिन काले कपड़े में एक मुट्ठी काले तिल रखकर जेब में रखें और रात को होली में अर्पित कर दें। इससे कष्ट दूर होते हैं।

■ 7 गोमती चक्र उपाय

7 गोमती चक्र लेकर प्रार्थना करें कि शत्रु जीवन में बाधा न डालें। फिर उन्हें होली में अर्पित करें।

होली की राख

अगले दिन होली की राख घर लाकर उसमें थोड़ा नमक और राई मिलाकर रखें। इससे नज़र दोष, भूत-प्रेत बाधा नहीं होती।

बजरंग बाण

होली से 40 दिन तक प्रतिदिन 3 बार बजरंग बाण का पाठ करें, मनोकामना पूर्ण होती है।

शिव पूजा

होली के दिन शाम को भगवान शिव को 21 गोमती चक्र अर्पित करें, व्यापार और नौकरी में उन्नति होती है।

राहु दोष उपाय

नारियल में मीठा तेल और गुड़ भरकर 7 बार उतारें और होली में डालें। राहु दोष शांत होता है।

धन हानि रोकने हेतु

मुख्य द्वार पर गुलाल डालें, दोमुखी दीपक जलाएँ, उसमें 11 काले उड़द डालें। दीप बुझने पर उसे होली की अग्नि में अर्पित करें।

दुर्घटना/संकट निवारण

5 लाल और 5 काली गुंजा तथा 1 नारियल लेकर 11 परिक्रमा करें और सिर के ऊपर से उतारकर होली में अर्पित करें।

विवाह हेतु उपाय

2 पान पत्ते, 1 सुपारी, 1 हल्दी लेकर शिव मंदिर में चढ़ाएँ। यह क्रिया रंगपंचमी तक करें।

संत तुकाराम जी की होली

संत तुकाराम कहते हैं:

मैंने होली में अपने दोष जलाए।
दोष जलाने से दुःख और दरिद्रता पास नहीं आते।
सुख स्वयं सामने आकर खड़े हो जाते हैं, पर मुझे उनकी चाह नहीं।
मुझे तो संतों का संग और विठोबा का नाम ही प्रिय है।
मैंने अपने भीतर ही भगवान को बसा लिया है, अब मुझे किसी वस्तु की कमी नहीं।

होली (हुताशनी पूर्णिमा)

फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होली पर्व दुष्ट प्रवृत्तियों के नाश और सत्प्रवृत्ति की स्थापना का प्रतीक है।

प्रह्लाद और होलिका कथा

एक समय हिरण्यकश्यप नामक अहंकारी राजा था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। राजा की बहन होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, परंतु वरदान के दुरुपयोग के कारण होलिका जल गई और भक्त प्रह्लाद सुरक्षित रहे। तभी से होलिका दहन की परंपरा चली।

विभिन्न स्थानों पर होली

  • उत्तर भारत में अत्यधिक उत्साह से मनाई जाती है।
  • वृंदावन, गोकुल और बरसाना की होली विश्वप्रसिद्ध है।
  • मध्य प्रदेश के इंदौर में राजवाड़ा क्षेत्र में भव्य आयोजन होता है।
  • महाराष्ट्र में रंगपंचमी को विशेष महत्व है।

आयुर्वेदिक दृष्टि

होली की अग्नि से वातावरण शुद्ध होता है। ठंड में जमा कफ दोष कम होता है। हँसी-गान से मन प्रसन्न होता है और पित्त शांत होता है।

होली पर सावधानियाँ

  1. रासायनिक रंगों से बचें, प्राकृतिक गुलाल का प्रयोग करें।
  2. भांग या नशीले पदार्थों से सावधान रहें।
  3. किसी की इच्छा के विरुद्ध रंग न लगाएँ।
  4. मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचें।

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि अपने दोष, बुराइयाँ और अहंकार जलाकर नए उत्साह से जीवन में सद्गुण अपनाने का पर्व है।

आप सभी को होली (हुताशनी पूर्णिमा) की हार्दिक शुभकामनाएँ।

कोकणी होली की प्रार्थना

होलिका दहन शुभ मुहूर्त (शंका समाधान)

होली की रात्री मे नरसिंह भगवान का पूजन करके इस माला मंत्र का कम से कम एक पाठ अवश्य करें – नरसिंह माला मंत्र

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