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जैन और जैन धर्म का परिचय देते हुए

                           

मध्य प्रदेश नाम का राज्य जब नहीं था तब उसका नाम मध्य भारत था !

 

 मध्य भारत के पहले मुख्यमंत्री श्री मिश्रीलाल जी गंगवाल (जैन) का एक किस्सा जो आज के हर सनातनी और जैन को सुनना चाहिए

 

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू 1952 में अपनी महिला मित्र यानी गरल सखी  एडवीना और उनके लंदन के मेहमानों के साथ इन्दौर और उज्जैन घुमाना चाहते थे !

जिसके संदर्भ में नेहरू ने मिश्रीलाल जी जैन को खत लिख कर महाकाल की नगरी उज्जैन के सर्किट हाउस में लंदन के मेंहमनो को उनका मन पसंद (माँसाहार) भोजन रात्रि भोज में परोसने का आदेश दिया ,

 

 लेकिन मिश्रीलाल जैन जी ने जवाब ने कहा कि मैं आपको मेरा मुख्य मंत्री पद से इस्तीफ़ा भेज रहा हूँ !

 

तो नेहरू हैरान हो गए और पूछा ऐसा क्यों ?  तो मिश्रीलाल जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा “मेरे लिए मेरा धर्म पहले है बाद में आपके ये लंदन के मेहमान गए भाड़ में ” .. मैं बाबा महाकाल की नगरी में अपने

अधिकारियों को माँसाहार खिलाने का पत्र नहीं लिख सकता यह पाप मेरे से नहीं हो सकता इसके अलावा मैं खुद जैन हूँ मैं माँसाहार को प्रमोट नहीं कर सकता

 

 फिर क्या था नेहरू को उनके आगे झुकना पड़ा और बाद में उन लंदन के मेहमानों को मिश्रीलाल जी ने भारतीय परम्परा के अनुसार जमीन पर बिठा के दाल बाटी और चूरमा (DBC) खिलाया … नेहरू के लंदन वाले मेहमान उंगलियाँ चाटते रह गए और पूछा यह अति स्वादिष्ट भोजन क्या है तब मिश्रीलाल जी ने कहा यह हमारे भारत का अहिंसक भोजन है ! 🔥

 

👉 सीख : हालात कैसे भी हों, अपने धर्म, संस्कार और सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।

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