
हमारा मन ही समझ लिजये एक प्रकार से चन्द्रमा को एक तरफ कुंडली के सारे ग्रह और एक तरफ चन्द्रमा
क्योकि मन ही तो सब कुछ हैं। मन ही तो हैं जो चंचल हैं जो हमको भटकाता हैं।
चन्द्रमा बहुत सॉफ्ट ग्रह है जल्दी ही पीड़ित हो जाते हे राहु केतु शनि से और इनके पीड़ित होते ही असर हमारे मन मस्तिस्क पर दिखने लगता है
यही ग्रह है जो हमे
तनाव देते हैं डिप्रेशन देते है। कभी कभी ज्यादा पीड़ित हो जाए तो #पागल तक कर देते है।
चन्द्रमा शुक्ल पक्ष में बलि होते है। शुभ फल देते है यदि जन्म कृष्ण पक्ष का हो तो अमावश्या के पास का हो तो मानसिक तनाव रहेगा ही रहेगा
पागल खाने के पागलों की एक्टिविटी भी अमावस्या को बढ़ जाती हैं। क्योकि उस दिन चन्द्र पीड़ित होते है
और जिनके चन्द्रंमा खराब होते है। या महादशा में पीड़ित चल रहे हो उनको भी
उस दिन बेचैनी बहुत रहती है।
अब कैसे जाने की कुंडली में चन्द्रमा पीड़ित है
नवग्रहों में चन्द्रमा सवसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि बो हमारे मन के कारक है या यु कहे की हमारी मन की स्थिति उन पर ही निर्भर करती हैं।
हमारी मनोस्थिति केसी होगी ये कुंडली में चन्द्रमा को देखने से ही पता लग जाता है
चन्द्रमा जल के कारक है। जितना भी जल पृत्वी पर हैं उस पर उन्ही का आधिपत्य हैं। वही जल के कारक हैं।
अब मनुष्य के शरीर में 70% जल होता है
तो इनका महत्व हम इस तरह ही समझ सकते हैं। कि ये कितने महत्वपूर्ण है। ।हमारे लिए एक तरफ कुंडली के सारे ग्रह और एक तरफ अकेले चन्द्रमा
चन्द्रमा का महत्व तो इतना हे की चन्द्र राशि के आधार पर विवाह भी कर दिए जाते हे
चन्द्रमा एक बहुत ही नाजुक ग्रह् हे सॉफ्ट प्लेनेट बहुत जल्दी पाप प्रभाव में आने वाले ग्रह राहु,केतु साथ बेठ गय तो ग्रहण लगा गया शनि साथ बेठ गये या देख लिया तो विष योग बना गया पीड़ित हो गए
शुक्र साथ बैठ गए तो मन भोग विलास की तरफ आसक्त हो जाता है।
अब हर किसी के पास कुंडली तो नही है कि वो देख सके या दिखा सके की चन्दमा पीड़ित है या नही तो हम इसके लक्षणों से जान सकते हे की चन्द्रमा पीड़ित है।
क्या लक्षण हैं चन्द्रमा के पीड़ित होने के।
मन में अजीव सी बेचैनी रहना क्योकि चन्द्रमा मन ही तो हे एक जगह मन का लग ना पाना
बैठे बैठे ख्याली पुलाब पकाना कल्पना शक्ति ये ही देते है पर कर्म ना करके केवल
कल्पनाओ में जीते रहना ये गलत है।
पल में कुछ पल में कुछ बन जाना एक एक मिनट्स पर मूड बदलते रहना
गुस्सा चीड़ चिड़ा पन रहना अपने कहे पर टिक ना पाना
पागलपन मिर्गी बगैरा के दौरे पड़ना
जी ह्म ये चंद्रमा से ही जुड़े हे
पागल खाने के पागलों की एक्टिविटी
पूर्णिमा अमावस्या को बढ़ जाती है
ग्रहण काल में और ज्यादा
ये बात वहां के डॉक्टर्स ने भी मानी हैं।
क्योकि उस दिन चन्द्रमा का इफ़ेक्ट बहुत ज्यादा होता है।
खुद से फील करे यदि चन्द्रमा पीड़ित होंगे तो पूर्णिमा और अमावस्या को मन की स्थिति खास कर रात में बहुत बुरी रहेगी
बेचैनी होगी नीद नही आएगी और किसी ना किसी से झगड़ा भी होगा
डिप्रेसन भी यही देते है। रात को नीद ना आना नॉनस्टॉप ख्याल मन में घूमते रहना रोकना चाहो पर उन खयालो को रोक ना पाओ मन का घवराना हार्ट बीट बढ़ना
अनजाना डर हमेसा लगा रहना
मन में ही भृम बना लेना किसी भी चीज़ का
चाहे हकीकत में ना हो पर उसकी कल्पना कर लेना
चन्द्रमा माँ के कारक ग्रह है यदि आपको जीवन में माँ का प्रेम साथ दुलार नही मिला तो १००% आपके चन्द्रमा ठीक नही है।
पानी से डर लगना या ऊँचाई बगैरा से डर लगना यादाश्त का कमजोर होना
उपाय
चंद्रमा को जव श्राप लगा था तब उन्होंने
शिव जी की आराधना की
शिव आराधना से वो ठीक हुए शिव जी के मस्तक पर उनको स्थान प्राप्त हुआ
वही वो सुशोभित हैं।
चन्द्र जनित समस्याओं का निवारण केवल भोले बाबा के ही पास हैं।
शिव जी की भक्ति से चन्द्रमा ठीक होते हैं।
खराव फल मिलने ठीक हो जाते हैं। तभी तो शिव जी के उपासक का मन शांत रहता है धीर गम्भीर होते है वो लोग
डर उनको कभी किसी चीज़ से नही लगता
बड़ी से बड़ी समस्या में घवराते नही क्योकि मन एकाग्र जो हैं।
शिव आराधना से डिप्रेसन को धीरे धीरे दूर किया जा सकता है जिनको ये समस्या हो वो शिव जी की पूजा किया करे
हर सोमवार को व्रत रहे और शिव जी का रुद्राभिषेक करे ये बहुत लाभ प्रद हैं।
ॐ नमः शिवाय का जाप करे
समस्या अधिक होने पर महामृत्युमजय मंत्र का संकल्प के साथ जाप करे बड़ी से बड़ी समस्या ठीक होगी डिप्रेशन की
समस्या हो या पागलपन की धीरे धीरे सब ठीक हो जाएगा।
मेडिटेशन करे उस से भी बहुत लाभ मिलता है
रात को चन्द्रमा की रोशनी में 20 मिनट्स तक टहले बैठे या चाँदनी में ही सो जाए
शिव जी के मंदिर जाए जल से अभिषेक करे बहुत लाभ होगा
धीरे धीरे डिप्रेशन नींद ना आना, गुस्सा आना चीड़ चिड़ा पन रहना
पागलपन रहना यादाश्त कमजोर हो जाना
ये सभी समस्या का समाधान होगा।