Sshree Astro Vastu

इंजेक्शन भरा हुआ हाथ में था, लेकिन मन हिम्मत नहीं कर पा रहा था…

ऑक्सीजन 82… 80… 📉
मॉनिटर का वह लाल अंक और अलार्म की कर्कश बीप-बीप आवाज!

NICU में काम करते हुए हमें इन आवाज़ों की आदत होती है, लेकिन कल की रात अलग थी।

22 दिन का बच्चा। फेफड़ों में संक्रमण (Sepsis)।
सांस के लिए हमने उसे बबल CPAP (कृत्रिम श्वसन) मशीन पर रखा था।
हमारी टीम पूरी ताकत से लड़ रही थी—एंटीबायोटिक्स, सलाइन, नेब्युलाइज़र… सब कुछ चल रहा था।

लेकिन बच्चा मशीन को “रिस्पॉन्ड” नहीं कर रहा था।
वह बेचैन था, मशीन की नलियों से जूझ रहा था।
जितना ज़्यादा वह रोता, उतना ही ऑक्सीजन लेवल गिरता जाता।

मेरे सहकर्मी डॉक्टर ने मेरी ओर देखा,
“बच्चा बहुत रेस्टलेस है। क्या सेडेटिव (नींद का इंजेक्शन) दें?”

इंजेक्शन देकर उसे शांत करना आसान था, लेकिन उतना ही ख़तरनाक भी।
ऐसी दवाओं से बच्चे की खुद से सांस लेने की कोशिश (Respiratory Drive) धीमी पड़ सकती थी।
पहले से ही बच्चा सांस के लिए जूझ रहा था; अगर सांस और मंद हो जाती, तो हालात काबू से बाहर जा सकते थे।

वह जोखिम लेने की मेरी हिम्मत नहीं हुई।
मैंने बाहर देखा। कांच के उस पार उसकी माँ खड़ी थी—सूजी हुई आँखें, घबराया हुआ दिल।

मैंने टीम से कहा, “इंजेक्शन नहीं, पहले माँ को अंदर बुलाइए।”

उसे पूरा गाउन और मास्क पहनाकर अंदर लाया गया।
काँपते हाथों से उसने इनक्यूबेटर के अंदर हाथ डाला।
बच्चे के नन्हे, सुईयों से भरे हाथ पर उसने अपनी उँगली रखी और कान में बस एक ही शब्द कहा…
“बेटा…”

अगले 30 सेकंड में जो हुआ, उसे देखकर हम डॉक्टर होकर भी स्तब्ध रह गए।

जो बच्चा दवाओं से भी शांत नहीं हो रहा था, माँ के स्पर्श से एकदम शांत हो गया।
उसकी दिल की धड़कन सामान्य हो गई।
सांसें लय में आ गईं।

और मॉनिटर?
जो ऑक्सीजन 80 पर अटका था, देखते ही देखते 88… 92… 95… 98% पर पहुँच गया! 📈

यह कोई “जादू” नहीं था। यह विज्ञान था।
माँ के स्पर्श से बच्चे के शरीर में “ऑक्सीटोसिन” (Love Hormone) बनता है, जो दुनिया का सबसे बेहतरीन पेन-किलर और स्ट्रेस-बस्टर है।

जब बच्चा रिलैक्स होता है, तब हमारी दवाएँ भी 100% असर करती हैं।

अब बच्चा खतरे से बाहर है।
जाते समय माँ हाथ जोड़ रही थी। मैंने उसे रोककर कहा,
“बहन, हमें धन्यवाद मत दीजिए। हमने तो सिर्फ कोशिश की, उसे ठीक आपके स्पर्श ने किया।”

कभी-कभी स्टेथोस्कोप को जीत दिलाने के लिए “माँ के स्पर्श” का साथ भी ज़रूरी होता है।

यह पोस्ट हर उस माँ तक पहुँचाइए, जिसने अपने बच्चे के लिए कई रातें जागकर गुज़ारी हैं। ✨

मां का गर्व – लाल बहादुर शास्त्री

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