
शनि और राहु की युति या शनि और केतु की युति संबंध किस तरह के फल देगा इस विषय पर बात करते है।शनि के साथ राहु सामान्य रूप से प्रेत श्राप योग बनाता है लेकिन शनि के साथ राहु या केतु की युति उच्च सफलता, उन्नति, शुभ फल भी दे सकती है और असफलता, परेशानियां और नुकसान भी दे सकता है।अब निर्भर करता है आपकी जन्मकुंडली में शनि के साथ राहु या केतु का या राहु केतु का शनि के साथ संबंध कैसा है? इसमे यह सबसे महत्वपूर्ण बात होती है शनि कुंडली मे शुभ है या अशुभ साथ ही कुंडली के लिए शुभ फल देने वाला है या नही साथ ही शनि के घर मकर और कुम्भ राहु केतु से पीड़ित नही है और शनि की placemant अच्छी तब राजयोग, सफलता, आदि कुंडली के अनुसार शुभ फल देगा बाकी यदि स्थिति अशुभ है तब फल दिक्कत वाले होंगे।
उदाहरण_अनुसार:-
किसी जातक की वृष लग्न की कुंडली बनती हो यहाँ शनि 9वे-10वे भाव का स्वामी होकर योगकारक ग्रह होता है नैसर्गिक रूप से कुंडली के लिए शुभ फल कारक ग्रह है।अब यहाँ शनि के साथ राहु केतु की युति तब ही शुभ फल देगी जब दसवे भाव,नवे भाव पर राहु केतु की कोई दृष्टि न हो जैसे इसी वृष लग्न में 5वे भाव मे 11वे भाव मे शनि और राहु की युति इसी वर्ष लग्न में बने तब यह शुभ फल देगी और राजयोग ,सफलता उन्नति शुभ फल मिलेंगे क्योंकि शनि के घर पर राहु केतु का कोई प्रभाव नही और शनि स्वयम नवमेश-दश्मेश होकर राजयोगकारक है।ऐसी स्थिति शनि के साथ राहु या केतु की बेहद सफलता दायक फल देगी।।
अब अशुभ फल कैसे मिलेंगे।
उदाहरण_अनुसार:-
अब किसी जातक की धनु लग्न की कुंडली है यहाँ शनि दूसरे और तीसरे भाव का स्वामी होता है, दूसरा भाव धन का होता है अब यहाँ धन भाव मे धनेश शनि खुद बेठा हो और राहु या केतु शनि के साथ बेठे हो तब ऐसी स्थिति में जब भी राहु केतु या शनि की दशा लगेगी बहुत ज्यादा रुपया-पैसे का नुकसान व्यापार में या किसी न किसी तरह से होता रहेगा , क्योंकि यहाँ राहु केतु ने शनि के साथ साथ शनि के घर को भी पीड़ित करा जो कि दूसरा भाव है।यहाँ दिक्कत रुपये पैसे की ही देगा लेकिन यही धनु लग्न में धनेश शनि के साथ राहु 11वे भाव मे लाभ स्थान में बेठे तब राहु या केतु का कोई प्रभाव दूसरे भाव शनि के घर और नही होगा साथ ही शनि यहां धन भाव स्वामी होकर लाभ स्थान में राहु केतु के साथ परम् शुभ होकर राहु केतु की दशा में या शनि की दशा में बहुत धन लाभ या धनः लाभ के रास्ते खुल जाएंगे काफी, शनि यहाँ उच्च होने से बलवान भी होगा।
इसी तरह शनि राहु या शनि केतु की युति में शनि और शनि के घर की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।शनि का राहु केतु के साथ संबंध कुंडली अनुसार शुभ फल देने वाला बनता हो तब बहुत अच्छा है और अशुभ फल देने वाला दिखता हो तब काफी दिक्कते, शनि राहु या केतु की दशाओ में होगी।