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ग्रहण में जन्म होने पर कैसा बीतेगा जीवन क्या करे।

ग्रहण योग मतलब ग्रहण के समय या ग्रहण के दिन या ग्रहण के आस पास के दिनोंका  जन्म का होना।जिन भी लोगो की कुंडली में सूर्य चन्द्र राहु या सूर्य चन्द्र केतु एक साथ हो मतलब कुंडली के किसी एक भाव में युति करके बैठे है चन्द्र पूर्ण अस्त है तब ग्रहण के समय/ग्रहण के दिन और चन्द्र पूर्ण अस्त या अस्त नही है ग्रहण के दिनो का बहुत नजदीक आस पास का जन्म है जो कि ज्यादा शुभ नही।।                                                                                              

जिन भी जातक/जातिकाओ का ग्रहण में जन्म या ग्रहण के दिन या ग्रहण के आस पास में जन्म हुआ है यह सामान्य शुभ नही है ऐसी स्थिति में जन्म होने से जीवन में परेशानियां काफी रहेगी,  ग्रहण में जन्म होने पर कुंडली के शुभ योग व जो फल मिलने है वह भी नही मिल पाएंगे, मिलते मिलते रह जाएंगे जैसे ग्रहण का जन्म है या ग्रहण के आस पास का तो ग्रहण का प्रभाव आपके दसवे भाव या दसवे भाव पर है तब नोकरी, व्यापार, कार्यक्षेत्र के अच्छे योग होते हुए भी अच्छी सफलता नही मिल पाएगी परेशानी आती रहेगी , धन और आय की अच्छी स्थिति कुंडली मे है तब ग्रहण योग का असर धन और आय पर है तब नही आएगा धन और आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहेगी जब तक ग्रहण योग और ग्रहण में जन्म के उपाय न किये जायें, विवाह पर है तब विवाह पर परेशानी, भाग्य पर है भाग्य जैसे साथ ही न दे, विदेश जाने पर है ग्रहण तब विदेश से दिक्कत, चौथे भाव पर है तब प्रॉपर्टी, मकान वाहन से दिक्कत, संतान के घर 5वे पर है तब सन्तान कष्ट, छठे भाव मे है तो कर्ज आदि से दुखी व मानसिक तनाव देते ही रहेंगे असफलता के साथ।जिस भाव में पूर्ण ग्रहण योग है उस भाव और सूर्य चन्द्र सम्बन्धी फल आपको मिलने नही देगा बिना उपाय, लेकिन समय रहते ग्रहण योग के उपाय कर लिए जाये तब ग्रहण के प्रभाव से बचा जा सकता है, और जो भी शुभ फल प्राप्ति है जीवन मे वह भी प्राप्त हो जाएगी ग्रहण के उपाय करने से व करते रहने से। ग्रहण योग में जन्म है तब इसका प्रभाव ज्यादा है या कम और जीवन में क्या समस्या करके दिक्कत करेगा और कैसे इस ग्रहण के जन्म से मुक्ति मिले जिससे जीवन में चमक आएं।

 

अब इन्ही सब बातों को कुछ उदाहरणों से समझते है:-                                                             

 

उदाहरण_अनुसार_कर्क_लग्न1:-

कर्क लग्न में सूर्य चन्द्र , राहु या केतु के साथ बैठे है और चन्द्र अस्त है तब ग्रहण का जन्म है चन्द्र अस्त न हुआ तब ग्रहण के।आस पास का जन्म है।अब यहाँ चन्द्र लग्नेश होकर पुरे जीवन का प्रतिनिधित्व करता है तो सूर्य धन और परिवार आदि का।अब यहाँ ग्रहण योग है तब जीवन अच्छा नही रहने वाला।जीवन में कई समस्या रहेगी।ऐसी स्थिति में सूर्य चन्द्र या सूर्य चन्द्र के घरों पर शुभ ग्रहों का प्रभाव है तब उपाय करने स जीवन की समस्या कम हो जायेगी।यहाँ जीवन परिवार धन नांम, सम्मान संबंधि विशेष दिक्कत रहेगी।।                                                                           

 

उदाहरण_अनुसार_तुला_लग्न2:-

तुला लग्न में यहाँ सूर्य चन्द्रमा दोनों राहु या केतु के साथ है चन्द्र अस्त है तब ग्रहण का जन्म है ऐसी स्थिति में रोजगार, धन कमाई लाभ प्राप्ति में दिक्कत, जीवन में असफलता बनी रहेगी, ऐसी स्थिति में कुंडली के अन्य शुभ योग भी फल अपना कम देगे, शुभ ग्रह दशा होने पर उपाय करके इस दोष से छुटकारा पाकर जीवन को सुखी किया जा सकता है।।                                            

 

एक उदाहरण से समझते है ग्रहण इस भाव में लगा हुआ है और जीवन पर क्या प्रभाव होगा भाव में जिस भाव में है वहाँ से।                                 

 

उदाहरण_अनुसार_धनु_लग्न3:-

यहाँ सूर्य भाग्येश तो चन्द्रमा यहाँ आठवे भाव का स्वामी है अब सूर्य चन्द्र दोनों 7वे भाव में राहु या केतु के साथ बैठे तब वैवाहिक जीवन के लिए यह काफी समस्या देकर जीवन को दुखी करेगे, क्योंकि ग्रहण विवाह के घर में है ऐसी स्थिति में उपाय ही इस दोष से मुक्ति करेगा।।                                                          

 

इस तरह से ग्रहण का जन्म या ग्रहण के आस पास का जन्म शुभ नही है ऐसी कुंडली वाले जातक/जातिका को जीवन को शुभ करने के लिए उपाय करना ही वर्तमान ,भविष्य को अच्छा करेगा।.                                                             सबसे ज्यादा ग्रहण जीवन पर प्रभाव देगा कि सूर्य और चन्द्र आपस में शुभ भाव स्वामी है या अशुभ भाव या सूर्य चन्द्र में से एक शुभ और एक अशुभ भाव स्वामी है इस बात पर ग्रहण योग का प्रभाव जीवन पर विशेष पड़ेगा क्या प्रभाव पड़ेगा यह अब जातक जातिका की कुंडली पर निर्भर करेगा।।

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