
धनेश मतलब धन भाव का स्वामी(दूसरे भाव का स्वामी) आयेश मतलब आय भाव का स्वामी(ग्यारहवें भाव का स्वामी)।दूसरा भाव जैसे कि पता है धन का प्रतिनिधित्व करता है तो ग्यारहवा भाव का स्वामी धन आने का और कमाई का प्रतिनिधित्व करता है ।
जब दूसरे भाव के स्वामी की महादशा-अंतरदशा में ग्यारहवे भाव के स्वामी की अंतरदशा-महादशा में मिल जाती है साथ ही दूसरे/ग्यारहवे भाव के स्वामी बलवान और शुभ है तब बहुत रुपया पैसा जातक कमाएगा क्योंकि आपके धन भाव और आय भाव, धन आने वाले घर की दशाएँ चल रही है या इनकी दशाएँ आने वाली होती है तब भी इनकी दशाओ में ऐसा ही फल मिलता है इसी तरह दूसरे घर मे शुभ स्थिति में बैठे ग्रहों की महादशा-अंतरदशा में 11वे घर मे बैठे शुभ स्थिति में ग्रहों की अंतरदशा में बहुत अच्छा आर्थिक लाभ होने लगता है, वैसे तो दूसरे भाव या दूसरे भाव स्वामी की महादशा में अंतरदशा के साथ ग्यारहवें भाव या ग्यारहवे भाव के स्वामी की अंतरदशा-महादशा में बहुत धन संपत्ति जातक अर्जित कर लेता है क्योंकि दूसरा भाव धन हैं और धन आने के लिए 11वा घर रास्ते बनाता है जिसे आय/आर्थिक लाभ कहते है।
इसके अलावा केवल ग्यारहवे घर के स्वामी या ग्यारहवे घर मे शुभ स्थिति में बैठे ग्रह या केवल दूसरे घर के स्वामी या दूसरे घर मे बैठे शुभ स्थिति में ग्रहों की महादशाएं या अन्तरदशाये भी बहुत ज्यादा आर्थिक समृद्धि देती है आर्थिक लाभ और संपत्ति बढ़ती जाती है।दूसरे भाव के साथ ग्यारहवे भाव और इनके स्वामी की दशाएँ रंग को भी राजा बनाने के रास्ते खोल देती है शर्त यही है दूसरे ग्यारहवे भाव और इनके स्वामी बलवान/शुभ स्थिति में होने चाहिए।70%व्यक्ति की ज़िंदगी मे सुधार आर्थिक स्थिति से ही होते है।इन्ही ग्रहों की आपस मे शुभ और बलवान महादशा में शुभ और बलवान अन्तरदशाये जातक को करोड़पति बनाती है इन भावो की दशाएँ जातक को कार्यक्षेत्र में भी बहुत कामयाबी देने लगती हैं क्योंकि आर्थिक लाभ तब ही होगा जब रोजगार हो,इसी कारण इन दूसरे/ग्यारहवे भाव की ,इनके स्वामियों की एक साथ दशाएँ 70%जीवन सुधार देती है।अब कुछ उदाहरणों से समझते है कैसे।
उदाहरण_अनुसार:-
कन्या लग्न में शुक्र धनेश और चन्द्रमा आयेश होता है अब यहाँ शुक्र चन्द्र दोनों बलवान होकर बैठे जैसे एक छोटे से उदाहरण से धनेश शुक्र 7वे घर मे उच्च होकर बैठा हो और चन्द्र 9वे घर मे उच्च होकर बैठा हो और यह दोनों पीड़ित या अन्य तरह से अशुभ नही होंगे तब ऐसी स्थिति में जातक को शुक्र में चन्द्र चन्द्र महादशा-अंतरदशा त शुक्र चन्द्र में से किसी एक ही भी दशा होगी तब खासकर महादशा तब जातक को करोड़पति जैसी स्थिति देकर आर्थिक लाभ देगी और रोजगार में भी सफलताएं।।
उदाहरण_अनुसार:-
जैसे कुम्भ लग्न की कुंडली मे अकेला बृहस्पति दूसरे और ग्यारहवे घर का स्वामी होता है इसी तरह सिंह लग्न में भी अकेला बुध दूसरे/ग्यारहवे दोनों घरों का अकेला स्वामी होता है ऐसी स्थिति में अब कुम्भ लग्न में गुरु और सिंह लग्न में बुध बलवान होकर या राजयोग बनाकर शुभ स्थिति में बैठे जैसे गुरु कुम्भ लग्न में उच्च होकर छठे घर मे हो या केंद्र/त्रिकोण के स्वामी का सम्बंध में साथ मे हो, इसी तरह की स्थिति बुध की सिंह लग्न में बनती हो तब जातक ऐसी कुम्भ लग्न में गुरु/ सिंह लग्न में बुध की अकेला की महादशा में या शुभ बलि महादशा ग्रह के साथ इनकी अंतरदशा बहुत ज्यादा आर्थिक कामयाबी देगी, रातो रात आर्थिक रूप से किस्मत ऐसी दशा चमकाएगी क्योंकि दूसरे/ग्यारहवे भाव के स्वामी की दशा है।।
उदाहरण_अनुसार:-
मकर लग्न में शनि धनेश और मंगल आयेश होता है ऐसी स्थिति में मंगल शनि बहुत अच्छी स्थिति में बैठे जैसे कि शनि दूसरे ही घर मे हो और मंगल भी बलवान होकर बैठा होगा तब बहुत ज्यादा उन्नति आर्थिक रूप से होगी ऐसी दशाओ में।।
इस तरह दूसरे भाव/दूसरे भाव के स्वामी की महादशा-अंतरदशा में, ग्यारहवे भाव/ग्यारहवे भाव की अंतरदशा-महादशा में बहुत ज्यादा जातक आर्थिक उन्नति करेगा, आर्थिक लाभ कमाने के रास्ते बनेगे, और बनते जाते है, व्यवसाय होने पर ऐसे जातक/जातिकाओ को बहुत लाभ होता है, नोकरी करने वाले जातक/जातिकाओ की आय में वृद्धि, नोकरी में उन्नति, अपने कार्यक्षेत्र से ऐसी दशाओ में या ऐसी दशाओ के लगते ही आर्थिक लाभ कमाने के रास्ते बनते जायेगे, हर जातक/जातिका के लिए दूसरे ग्यारहवे भाव के स्वामी की एक साथ दशाएँ किस्मत के बंद दरबाजे खोलने वाली होगी है किस्मत दरबाजे खुले हुए है तब उन दरवाजो में वृद्धि करती है मतलब आर्थिक उन्नति।। इस तरह दूसरे भाव+ग्यारहवे भाव की दशा में इन दशाओ के से सम्बंधित उपाय करने से बहुत अच्छा स्तर आर्थिक रूप से ज्यादा स्व ज्यादा विकसित किया जा सकता है।