
जन्म जन्मों के दरिद्रता मिटाने वाला शक्तिशाली प्रयोग
आज हम एक ऐसे मंत्र प्रयोग की बात करने जा रहे हैं, जिसे उस परिस्थिति में जप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है, जब आप जीवन में चारों ओर से निराश हो चुके हों, आर्थिक संकट से पूरी तरह त्रस्त हों, और आपको कहीं से उधार धन भी न मिल रहा हो।
धन संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली है। परंतु इस मंत्र का प्रयोग तभी करना चाहिए, जब वास्तव में अत्यधिक आवश्यकता बन जाए, अथवा जब जीवन में आए दिन लगातार कोई न कोई समस्या बनी रहती हो, विशेष रूप से धन को लेकर।
जब स्थिति यह हो जाए कि एक-एक रुपये के लिए मोहताज होना पड़े, छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी दूसरों की ओर देखना पड़े, दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़े—ऐसी परिस्थिति में यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध होता है।
यदि इस मंत्र का जप पुष्य नक्षत्र के समय किया जाए, तो इसके अत्यंत विशिष्ट और शीघ्र प्रभाव देखने को मिलते हैं। और यदि इस मंत्र का नित्य जप किया जाए, तो जीवन में कभी भी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता। इतना प्रभावशाली यह मंत्र प्रयोग है।
इसमें केवल एक माला का ही जप करना होता है, और उसी से समस्याओं का समाधान प्रारंभ हो जाता है। जीवन में समस्या से बाहर निकलने का मार्ग बन जाता है। कोई न कोई ऐसा व्यक्ति अवश्य मिलता है, जिसके माध्यम से आर्थिक उन्नति की दिशा में प्रगति होने लगती है।
कहने का तात्पर्य यह है कि किसी भी प्रकार से—येना केना प्रकारेण—यदि आप आर्थिक रूप से परेशान हैं, चाहे कर्ज की स्थिति बन गई हो, या व्यापार में नुकसान चल रहा हो, जिसके कारण आप आर्थिक संकट में फंसे हुए हों, तो इस मंत्र का विधान एक बार अवश्य कर लेना चाहिए।
लगभग प्रत्येक जातक को जीवन में एक बार इस विधान को अवश्य करना चाहिए, ताकि भविष्य में विपत्तियों का सामना न करना पड़े।
इसी कारण आज हम इस मंत्र प्रयोग की विस्तृत चर्चा कर रहे हैं।
पुष्य नक्षत्र और शुभ योग
जैसा कि बताया गया है, इस मंत्र का जप पुष्य नक्षत्र में किया जाता है।
मकर संक्रांति के अगले दिन, बुधवार को भद्रा तिथि में पुष्य नक्षत्र का आरंभ हो रहा है।
बुधवार के दिन भद्रा का होना सिद्धि योग बनाता है। साथ ही बुधवार धन प्राप्ति, लक्ष्मी कृपा, बुध और शुक्र से संबंधित कार्यों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।
वैसे तो पुष्य नक्षत्र गुरु पुष्य और रवि पुष्य के रूप में भी अत्यंत श्रेष्ठ होता है, परंतु जब धन की कामना हो और उसमें बुधवार अथवा शुक्रवार का संयोग बन जाए, तो यह योग और भी अधिक फलदायी हो जाता है।
ऐसे में भद्रा तिथि, मकर संक्रांति का प्रथम चरण और पुष्य नक्षत्र—तीनों का एक साथ होना अत्यंत शुभ और श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाला योग बन गया है।
हालाँकि यह आवश्यक नहीं है कि आप केवल इसी दिन करें। जब भी पुष्य नक्षत्र आए, उस दिन भी इस मंत्र का विधान किया जा सकता है।
साधना का समय
संध्या काल अथवा रात्रि काल
यदि किसी दिन पुष्य नक्षत्र प्रातःकाल हो, तो प्रातः भी कर सकते हैं
आवश्यक सामग्री
सामान्य पूजन सामग्री
कमलगट्टे की प्राण-प्रतिष्ठित माला
यदि उपलब्ध न हो, तो स्फटिक की माला का प्रयोग कर सकते हैं
भोग सामग्री
खीर (श्रेष्ठ)
अथवा गुड़ की शक्कर में थोड़ा सा घी मिलाकर
दीपक
तिल तेल या गाय के देसी घी का
थोड़ी सी अग्नि व्यवस्था (हवन अग्नि), जिसमें घी का धुआँ चलता रहे
विधान विधि
उत्तर या पश्चिम मुख होकर बैठें।
अपने सामने चौकी या पट्टे पर लाल, पीला अथवा गेरुए रंग का वस्त्र बिछाएँ।
उस पर नवनाथ या गुरु गोरखनाथ जी का चित्र स्थापित करें।
दीपक प्रज्वलित करें और अग्नि प्रज्वलित रखें।
सबसे पहले शुद्धि आचमन करें।
दाहिने हाथ में जल लेकर स्वयं पर, सामग्री पर और स्थान पर छिड़काव करें।
संकल्प विधि
दाहिने हाथ में अक्षत और पुष्प लें।
अपना नाम
गोत्र
तिथि, वार, नक्षत्र
और अपनी आर्थिक समस्या व कामना
स्पष्ट शब्दों में बोलें।
संकल्प के अक्षत-पुष्प को दीपक के सामने या थाली में छोड़ दें।
पूजन क्रम
गणपति पूजन
गुरु पूजन
कुलदेव
पितृदेव
स्थान देव
शिव-शक्ति
नवनाथ / गुरु गोरखनाथ
भैरव जी
सभी का सामान्य पंचोपचार पूजन करें।
जप क्रम
गणपति मंत्र – 11 बार
गुरु मंत्र – 11 बार
साबर सिद्धि मंत्र – 11 बार
मुख्य मंत्र (एक माला जप)
मंत्र को पहले कंठस्थ कर लें, फिर जप आरंभ करें।
समापन विधि
आरती करें
अग्नि में 5 बार भोग अर्पित करें
जल से आचमन व अग्नि शांति करें
क्षमा प्रार्थना करें
आसन के नीचे रखा जल मस्तक पर लगाएँ
अनुष्ठान अवधि
न्यूनतम: 11 या 21 दिन
पूर्ण साधना: 41 दिन
41 दिन करने पर जीवन में दोबारा आर्थिक संकट नहीं आता।
गुरु गोरखनाथ जी की महामाई की विशेष कृपा आप सभी पर बनी रहे—यही कामना है।