
आज के समय में जब समाज में संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना कम होती जा रही है, ऐसे में कुछ बच्चे अपने कार्यों से यह साबित कर देते हैं कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन सोच और दिल बहुत बड़ा होता है। ऐसे ही एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं श्रीयश, जिनकी कला न केवल लोगों का ध्यान खींचती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल भी पेश करती है।
मुंबई के अंधेरी स्थित होटल कोहिनूर कॉन्टिनेंटल में आयोजित ‘Paint-a-Life’ नामक वार्षिक बाल कला प्रदर्शनी में श्रीयश की पेंटिंग का चयन हुआ। यह प्रदर्शनी Sanskriti Arts द्वारा आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य बच्चों की रचनात्मकता को मंच देना और साथ ही एक सामाजिक उद्देश्य को पूरा करना था। इस प्रदर्शनी में देशभर से बच्चों की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं, लेकिन श्रीयश की पेंटिंग ने अपनी अलग पहचान बनाई।
श्रीयश की पेंटिंग प्रदर्शनी के लिए चयनित हुई | यह किसी भी बाल कलाकार के लिए गर्व का क्षण होता है, लेकिन श्रीयश ने इसे केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी पेंटिंग की पूरी राशि समाजसेवा के लिए दान कर दी। यह राशि वंचित और जरूरतमंद बालिकाओं की मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समर्पित की गई।
आज भी हमारे देश में कई लड़कियाँ ऐसी हैं जिन्हें मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता से जुड़ी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो पातीं। यह न केवल उनके स्वास्थ्य पर असर डालता है, बल्कि उनकी शिक्षा और आत्मसम्मान को भी प्रभावित करता है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे को समझना और उसके समाधान में योगदान देना एक बच्चे के लिए असाधारण सोच को दर्शाता है। श्रीयश ने यह साबित कर दिया कि सच्ची शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने में भी झलकती है।
Sanskriti Arts द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी केवल कला का उत्सव नहीं थी, बल्कि यह बच्चों को समाज से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बनी। श्रीयश को इस उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘Sanskriti Arts Champion’ के सम्मान से भी नवाजा गया। यह सम्मान उनके लिए एक प्रेरणा है और साथ ही अन्य बच्चों के लिए एक उदाहरण भी।
श्रीयश वर्तमान में Parle Tilak Vidyalaya ICSE School के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ कला में उनकी रुचि और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूकता यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और संस्कार मिलने पर बच्चे किस तरह समाज का भविष्य संवार सकते हैं। उनके परिवार और शिक्षकों की भूमिका भी इस सफलता में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने उनकी कला और सोच को निरंतर प्रोत्साहित किया।
प्रदर्शनी के दौरान कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों और कला प्रेमियों ने श्रीयश की पेंटिंग की सराहना की। उनकी कला में रंगों के साथ-साथ भावनाओं की गहराई भी दिखाई देती है। यही कारण है कि उनकी पेंटिंग लोगों के दिलों तक पहुँची और सामाजिक उद्देश्य से जुड़ पाई।
श्रीयश की यह पहल हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि अगर बच्चे इतनी कम उम्र में समाज के लिए सोच सकते हैं, तो हम सभी को भी अपने स्तर पर कुछ न कुछ सकारात्मक योगदान अवश्य देना चाहिए। उन्होंने यह साबित किया कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि बदलाव का सशक्त हथियार भी बन सकती है।
अंततः, श्रीयश पाटोले की यह यात्रा केवल एक पेंटिंग के बिकने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, करुणा और जिम्मेदारी की कहानी है। उनके रंगों ने न केवल कैनवास को सजाया, बल्कि कई ज़िंदगियों में उम्मीद और सम्मान के रंग भी भरे हैं। ऐसे बाल कलाकार निस्संदेह हमारे समाज की सच्ची प्रेरणा हैं और भविष्य की उज्ज्वल तस्वीर भी।