माघ मास का माहात्म्य छब्बीसवाँ अध्याय पथिक कहने लगा कि हे प्रेत! तुमने सारस के वचन किस प्रकार
माघ मास का माहात्म्य छब्बीसवाँ अध्याय
माघ मास का माहात्म्य छब्बीसवाँ अध्याय पथिक कहने लगा कि हे प्रेत! तुमने सारस के वचन किस प्रकार
माघ मास का माहात्म्य पच्चीसवाँ अध्याय पिशाच कहने लगा कि हे मुनि! केरल देश का ब्राह्मण किस प्रकार
माघ मास का माहात्म्य चौबीसवाँ अध्याय लोमश जी कहने लगे कि वह राजा पहले तो तामिश्र नामी नरक
माघ मास का माहात्म्य तेईसवाँ अध्याय लोमश ऋषि कहने लगे कि जिस पिशाच को देवद्युति ने मुक्त किया
माघ मास का माहात्म्य बाईसवाँ अध्याय इतना कहकर भगवान अन्तर्ध्यान हो गए तब देवनिधि कहने लगे हे महर्षि!
माघ मास का माहात्म्य इक्कीसवाँ अध्याय लोमश जी कहने लगे कि पूर्व काल में अवंती देश में वीरसैन
माघ मास का माहात्म्य बीसवाँ अध्याय वेदनिधि कहने लगे कि हे महर्षि! धर्म को जल्दी ही कहिए क्योंकि
माघ मास का माहात्म्य उन्नीसवाँ अध्याय वह पाँचों कन्याएँ इस प्रकार विलाप करती हुई बहुत देर प्रतीक्षा करके
माघ मास का माहात्म्य अठारहवाँ अध्याय श्री वशिष्ठ ऋषि कहने लगे कि हे राजन! मैंने दत्तात्रेयजी द्वारा कहा
माघ मास का माहात्म्य सत्रहवाँ अध्याय अप्सरा कहने लगी कि हे रा़क्षस! वह ब्राह्मण कहने लगा कि इंद्र