जिंदगी में सुख कितना दुख कितना। कुंडली में सुख स्थान चतुर्थ स्थान जाना जाता है लग्न स्थान व्यक्ति
जिंदगी में सुख कितना दुख कितना
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पंचांग पंचांग को पत्रा, तिथिपत्र, पंजी, पंजीका आदि हिन्दी में वअंग्रेजी में एफेमेरीज कहते हैं| पंचांग अर्थात पाँच
वंश वृद्धि करं दुर्गा कवचम् / वंश कवचम् || गर्भ रक्षा देवी कवच || भगवन् देव देवेशकृपया
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ग्रहों की युति फल सूर्य-चंद्र सूर्य और चंद्र एक स्थान पर हो तो जातक लोहा या पत्थर का
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