
भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती है। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अभाव हो परन्तु भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन करना चाहिये। यदि भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूँछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। परन्तु भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये। धर्मसिन्धु में भी इस मान्यता का समर्थन किया गया है। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भद्रा मुख में किया होली दहन अनिष्ट का स्वागत करने के जैसा है जिसका परिणाम न केवल दहन करने वाले को बल्कि शहर और देशवासियों को भी भुगतना पड़ सकता है। किसी-किसी साल भद्रा पूँछ प्रदोष के बाद और मध्य रात्रि के बीच व्याप्त ही नहीं होती तो ऐसी स्थिति में प्रदोष के समय होलिका दहन किया जा सकता है। कभी दुर्लभ स्थिति में यदि प्रदोष और भद्रा पूँछ दोनों में ही होलिका दहन सम्भव न हो तो प्रदोष के पश्चात होलिका दहन करना चाहिये।
निर्णय सिंधु के भी मतानुसार होलिका दहन भद्रा रहित प्रदोष काल व्यापिनी – फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है।
होलिका दहन मुहूर्त
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इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा केवल 02 मार्च को ही प्रदोष व्यापिनी है। 03 मार्च को पूर्णिमा तिथि सायं 05:07 पर समाप्त हो रही है। 02 मार्च को भद्रा पृथ्वी लोक की पूर्णिमा तिथि लगने के साथ ही सायं 05:55 से अंत रात्री 03 मार्च की प्रातः 05:28 पर समाप्त हो रही है।
भद्रा पूँछ – 02 मार्च को मध्यरात्री 01:25 से रात्री 02:35 बजे तक रहेगी।
भद्रा का मुख 02 मार्च रात्री 02:35 से अंतरात्रि 04:31 बजे तक रहेगा।
धर्म सिंधु के मतानुसार
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फाल्गुनीपौर्णमासी मन्वादिः ॥ सा पौर्वाह्निकी इयमेव होलिका ।। सा प्रदो-षव्यापिनी भद्रारहिता ग्राह्या ॥ दिनद्वये प्रदोषव्याप्तौ परदिने प्रदोषैकदेशव्याप्तौ वा परैव ॥ पूर्वदिने भद्रादोषात् ॥ परदिने प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिने प्रदोषे भद्रासत्त्वे यदि पूर्णिमा परदिने सार्धत्रियामा ततोधिका वा तत्परदिने च
प्रतिपद्-वृद्धिगामिनी तदा परदिने प्रतिपदि प्रदोषव्यापिन्यां होलिका ॥ उक्तविषये यदि प्रतिपदो द्वासस्तदा पूर्वदिने भद्रापुच्छे वा भद्रामुखमात्रं त्यक्त्वा भद्रायामेव वा होलिकादीपनम् ॥ परदिने प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिने यदि निशीथात्प्राक् भद्रासमा-प्तिस्तदा भद्रावसानोत्तरमेव होलिकादीपनम् ॥ निशीथोत्तरं भद्रासमाप्तौ भद्रामुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव ॥ प्रदोषे भद्रामुखव्याप्ते भद्रोत्तरं प्रदोषोत्तरं वा ॥ दिनद्वयेपि पूर्णिमायाः प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिन एव भद्रापुच्छे तदलाभे भद्रायामेव प्रदोषो-त्तरमेव होलिका ॥ रात्रौ पूर्वार्धभद्राया ग्राह्यत्वोक्तेः ॥ न तु पूर्वप्रदोषादौ चतुर्द-श्यां न वा परत्र सायाह्नादौ ॥ दिवा होलिकादीपनं तु सर्वग्रन्थविरुद्धम् ॥
अर्थात 👉 फागुन की पूर्णिमा मन्वादि कहाती है, वह पूर्वाह्वव्यापिनी ग्रहण करनी चाहिये। इसी को होलिका कहते हैं वह प्रदोषव्यापिनी और भद्रा से रहित ग्रहण करनी चाहिये। यदि पूर्णिमा दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी होय वा परदिन में प्रदोष के एकदेश (छोटे से भाग) में भी होय तो परली (अगली) ग्रहण करनी। क्योंकि, पहिले दिन भद्र का दोष है और दूसरे दिन पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी न होय और पहिले दिन प्रदोष के समय भद्रा हो तो जो दूसरे दिन पूर्णिमा साढे तीन प्रहर हो वा उतने से भी अधिक हो और उससे परे प्रतिपदा बढ गई होय तो परले दिन प्रदोष व्यापिनी प्रतिपदा में ही होली करनी चाहिये। और जो पूर्व कहे विषय में प्रतिपदा घट गई होय तो, भद्रा की पुच्छ वा भद्रा के मुख को छोडकर वा भद्रा में ही होलिका का दाह करै । और जो परले (अगले) दिन प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा न हो और पहिले दिन अर्द्ध रात्रि से पूर्व ही भद्रा की समाप्ति हो जाय तब तो भद्रा के अंत में ही होलिका का दाह करना चाहिए। और जो अर्द्धरात्र से पीछे भद्रा की समाप्ति होय तो भद्रा के मुख को त्यागकर वा भद्रा में ही होली दीपन करना चाहिए। और जो प्रदोष के समय भद्रा का मुख होय तो होलीदीपन भद्रा से पीछे वा प्रदोष के अंत में करै। जो दोनों दिन पूर्णिमा प्रदोष के समय न होय और पहिले दिन भद्रा होय तो पहिले दिन ही भद्रा की पुच्छ में जो वह न मिलै तो भद्रा में ही प्रदोष के अंत में होलिका का दाह करें। क्योंकि, रात्रि में पूर्वार्द्ध भद्रा का ग्रहण शास्त्र से सिद्ध है। परन्तु चतुर्दशी के प्रदोष में वा परले दिन सायं आदि में न करै। दिन में होली का दाह सर्वशास्त्र से विरुद्ध है अर्थात् किसी में नहीं लिखा।
भद्रा पूँछ – 02 मार्च को मध्यरात्री 01:25 से रात्री 02:35 बजे तक रहेगी।
शास्त्र आज्ञा अनुसार मध्य रात्री बाद तक भद्रा व्याप्त हो तो भद्रा मे ही होलिका दहन कर लेना चाहिये अतः 02 मार्च सायं 6 बजकर 27 मिनट से रात्री 8 बजकर 55 मिनट तक की अवधि मे होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत है ।
उपरोक्त समय मे संभव ना हो तो 03 मार्च सायं 06:47 चन्द्र ग्रहण की समाप्ति के उपरांत से सायं 08:25 के बीच भी ऊपर बताये शास्त्र नियमानुसार प्रतिपदा युक्त प्रदोष काल मे होलिका दहन किया जा सकता है यही समय होलिका दहन के लिये बताये नियम अनुसार सबसे उपयुक्त भी रहेगा।
रंगवाली होली (धुलण्डी) 👉 04 मार्च शुक्रवार को मनाई जाएगी।
होली पर धन प्राप्ति के सरल उपाय
उपाय १👉 यदि आप आर्थिक संकट में है तो होली की रात्री में सर्वप्रथम निवास के पूजा स्थल में माँ लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष रोली में लाल गुलाल मिलाकर माँ को तिलक करें इस दौरान माँ लक्ष्मी के किसी भी मंत्र का यथा सामर्थ्य जप करें इसके बाद निवास अथवा व्यावसायिक स्थल की एक कील के ऊपर कलावा (मौली) बांधकर जिस स्थान पर होली जलनी है वहाँ मिट्टी में दबा दें अगले दिन उस कील को निकाल कर मुख्य द्वार के बाहर की मिट्टी में दबा दें। इस उपाय के प्रभाव से आपके निवास अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान में नकारत्मक शक्ति का प्रवेश नही होगा।
विशेष👉 यदि कील को होली जलने वाले स्थान पर दबाना संभव ना हो तो जब होली जल जाए तो उसकी राख लाकर किसी मिट्टी के पात्र में रख कर इस राख के नीचे कील को दबा दें ध्यान रहे राख को घर से बाहर ही सुरक्षित स्थान पर रखें दूसरे दिन राख में से कील निकाल ऊपर बताये अनुसार ही प्रयोग करें एवं होली की राख को जल में प्रवाहित कर दें।
उपाय २👉 आपके ऊपर किसी भी प्रकार का कोई कर्ज है अथवा आय में कमी है तो होली की रात्रि में जहाँ होली जलनी है वहां की जमीन में छोटा सा गद्दा खोद कर उसमे ५ अभिमंत्रित गोमती चक्र व इतनी ही कौड़िया दबा दें साथ ही हरे गुलाल से गड्ढे को भर के ऊपर से मिट्टी डाल दें। गड्ढे के ऊपर एक पान का पत्ता रखकर उस पर पीला गुलाल, एक सिक्का, एक छोटी कील और सुपारी रखें अब जब होली जले तब एक पान के पत्ते पर एक बताशा, एक जोड़ी लग्न घी में डुबोकर, एक बड़ी इलायची, काले तिल, पीली सरसों, एक सुपारी व एक गुड़ की डली रख कर पीला गुलाल छिड़क दें और दूसरे पान के पत्ते से ढक दें उस के ऊपर ७ गौमती चक्र रखें और होली की सात परिक्रमा करते हुए प्रत्येक परिक्रमा में निम्न मंत्र का जाप करते हुए एक गौमती चक्र होली में डालते जाएं।
मंत्र फ्रीम फ्रीम अमुक (जिसका कर्ज देना है) कर्ज विनशयते फट स्वाहा।
यहाँ अमुक के स्थान पर कर्जदार का नाम लें परिक्रमा पूर्ण होने पर प्रणाम कर वापस आ जाये। अगले दिन होली जलने वाले स्थान पर जाकर सर्वप्रथम गड्ढे के निकट ३ अगरबत्ती दिखाकर गड्ढे से सारी सामग्री निकाल लें इसमे कुछ सामग्री जल भी सकती है। सामग्री के साथ उस स्थान की थोड़ी मिट्टी भी ले लें और सारी सामग्री के साथ मिट्टी को किसी नीले कपड़े में लाल गुलाल के साथ बांधकर पोटली को तीव्र प्रवाह के जल में प्रवाहित कर दें इस उपाय से कुछ ही समय मे कर्ज मुक्ति के मार्ग खुलने लगेंगे।
विशेष 👉 होली जलने के बाद वहाँ दबी सामग्री आपको शायद ना भी मिले ऐसी स्थिति में परेशान होने की आवश्यकता नही है। आप केवल राख प्राप्त करें और ऊपर बताई सामग्री पुनः राख में रख पोटली बनाकर जल में प्रवाहित करें।
उपाय ३👉 यदि आपको लगता है आपको मेहनत के अनुसार लाभ अथवा सुविधाए नही मिलती है तो होली से पहले किसी सुनार से मिलकर उससे अपनी मध्यमा उंगली के माप के छल्ले के लिये ५०% चांदी, ३०% लोहा एवं २०% पीतल के अनुसार तीन धातुएँ ले और होली जलने से पहले उस स्थान पर ईशान कोण में गड्ढा खोदकर लाल गुलाल के साथ तीनो धातुएँ और ११ लौंग भी दबा दें और गद्दा बन्द करके ऊपर से पीले गुलाल से स्वस्तिक बना कर होली की पूजा करे होलिका दहन होने के बाद एक पान के पत्ते पर कर्पूर, थोड़ी हवन सामग्री, शक्कर, शुद्ध घी में डुबोकर लौंग का जोड़ा, काले तिल और पीली सरसों रखें व दूसरे पान के पत्ते से उस पत्ते को ढक दें और जिस स्थान पर आपने धातुएँ दबाई है उस स्थान से ही परिक्रमा आरम्भ करें प्रत्येक परिक्रमा में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करते हुए होली की अग्नि में एक बताशा डालते जाए सात परिक्रमा होने पर पान के पत्ते की सारी सामग्री होली में अर्पित कर दें तथा प्रणाम कर वापस आ जाएं। अगले दिन नए पान के पत्ते वाली सामग्री पुनः ले जाकर जो धातुएँ दबाई है उन्हें निकाल लें तथा पान के पत्ते की सामग्री गड्ढे में रकह कर लाल गुलाल से गड्ढा भर के उसके ऊपर ३ अगरबत्ती जला दें और प्रणाम कर आ जाये अब किसी सुनार से तीनों धातुओं को मिलाकर अपनी मध्यमा उंगली की नाप का छल्ला बनवाकर १५ दिन बाद आने वाले शुक्ल पक्ष के गुरुवार के दिन धारण करें जब तक आपके पास यह छल्ला रहेगा तब तक आर्थिक समस्या बनने पर भी परेशान नही करेंगी।
विशेष 👉 अगर होलिका दहन के स्थान पर धातु दबाना सम्भव ना हो तो इसे भी होलिका की राख लाकर दबा दें लेकिन घर के बाहर ही रखें इसके बाद समस्त क्रिया ऊपर बताये अनुसार ही करे और अगके दिन तीनो धातु निकाल कर छल्ला बनवालें और ऊपर बताये अनुसार ही धारण करें। यदि सम्भव हो तो ऊपर बताये अनुसार उपाय करने का प्रयास करें यह ध्यान रहे तीनो धातुओं का अगले दिन मिलना आवश्यक है यदि धातुएँ दबाई जगह नही मिली तो उपाय विफल हो जाएगा।
उपाय ४👉 आपके निवास के पास जब होली जल जाए तब आप होली की थोड़ी सी अग्नि लाकर अपने निवास व व्यवसाय स्थल के बाहर आग्नेय कोण की ओर उस अग्नि की सहायता से एक सरसो के तेल का दीपक जला दें। इस दीपक की मदद से एक दूसरा दीपक जलाएं और मुख्य द्वार के बाहर रख दें। जब दीपक जल कर ठंडा हो जाये तो इसे किसी चौराहे पर जाकर फोड़ दे और बिना पीछे देखे सीधे घर आ जाये। अंदर आने से पहले अपने हाथ पांव अवश्य धो लें। इस उपाय के प्रभाव से आपके निवास एवं व्यवसाय की सारी नकारत्मक उर्जा जलकर समाप्त हो जाएगी।
उपाय ५ 👉 आप होली की रात्रि में होलिका दहन से पहले अपने घर अथवा व्यवसाय के मंदिर में माँ लक्ष्मी को रोली व गुलाल मिलाकर तिलक करें। शुद्ध घी का दीपक, धूप बत्ती दिखाने के बाद पीले रंग का भोग अर्पण करें इसके बाद माँ के चरणों मे पीला गुलाल व ३ गौमती चक्र अभिमंत्रित करने के बाद अर्पित करें। माँ के सामने लाल अथवा सफेद ऊनि आसान पर बैठकर कमलगट्टे की माला से ५ माला “(श्रीं ह्रीं श्रीं कमलवासिन्यै नमोस्तुते)” का जाप करें जाप के बाद पृथ्वी पर जल छोड़े उसे माथे पर लगाकर उठ जाए। अब अगले दिन माँ के चरणों से गौमती चक्र और पीला गुलाल उठाकर एक लाल वस्त्र मे बांधकर घर के शुद्ध स्थान पर रख दें। इस उपाय से माँ लक्ष्मी के चरण एक वर्ष आपके घर मे रहेंगे ऐसी आस्था रखें अगले वर्ष पुनः इस उपाय को करने से पहले पुरानी पोटली को होलिनसे एक दिन पहले धूप दीप दिखाकर बहते जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग को प्रत्येक वर्ष होली पर अवश्य करें।
उपाय ६ 👉 होली की रात्रि में आप एक चांदी का गिलास अथवा कटोरी लेकर उसमे जल भर कर थोड़ा गंगाजल मिला दें सम्भव हो तो गंगाजल ही लें अब इसमें ३-३ अभिमंत्रित गौमती चक्र और धनकारक कौड़िया डाल दें। माँ लक्ष्मी के विग्रह पर लाल गुलाल और रोली मिलाकर तिलक करें धूप दीप दिखाकर खीर का भोग अर्पण करें चरणों मे भी लाल गुलाल अर्पण करें इसके बाद अधिक से अधिक संख्या में श्री लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें पाठ के बाद 5 माला श्री लक्ष्मीभ्यो नमोस्तुते का जप करें। जप के बाद उस जल को पूजा स्थल पर ही रखा रहने दें अगले दिन एक लकड़ी अथवा चांदी की डिब्बी में माँ के चरणों से लाल गुलाल उठाकर भर दें तथा जल में से गौमती चक्र और कौड़िया निकाल कर डिब्बी में रख दें डिब्बी में गुलाल कम हो तो अलग से गुलाल लेकर डिब्बी को पूरा भर दें और एक लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर धन वाले स्थान पर रख दें आपके पास जो जल बचा है उसे निवास स्थान की दीवारों पर छिड़क दें।
उपाय ७👉 यदि आपको लगता है कि आपको मेहनत के अनुसार आय नही मिल रही है तथा निवास – व्यवसाय में कोई नकारात्मक ऊर्जा है अथवा किसी नजर के प्रभाव से हानि उठानी पड़ रही है तो आप होली जलने से पहले होलिकादहन वाले स्थान पर रात्रि के समय उस जमीन की पश्चिम दिशा में छोटा गड्ढा कर ४ बड़ी कीलें दबा दें किलो के ऊपर ११ लौंग रख हरा गुलाल भरने के बाद ऊपर से मिट्टी से ढक दें। जब होलिकादहन का समय हो तब एक पान पत्ते पर ५ बताशे, एक छोटी कील, एक लौंग का जोड़ा, कुछ काले तिल व पीली सरसों रखकर एक अन्य दूसरे पान के पत्ते से ढक दें। उस पान के पत्ते पर सात बताशे रखें इसके बाद परिक्रमा आरम्भ करें। प्रत्येक परिक्रमा की समाप्ति पर एक बताशा होलिका में अर्पित करते जाए सात परिक्रमा पूर्ण होने पर अंतिम परिक्रमा में पान के पत्ते पर रखी सामग्री भी होलिका में अर्पित कर प्रणाम कर आ जाएं। होली की मध्यरात्रि में शरीर शुद्धि के बाद मा लक्ष्मी को गुलाल से तिलक कर धूप, दीप, भोग अर्पण कर लाल आसन पर बैठ कर कमलगट्टे की माला से (श्रीं ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नमोस्तुते) निम्न मंत्र का कम से कम ५ माला जप करें जप के बाद धरती पर जल छोड़ उसे सर से लगा कर उठ जाए। अगके दिन आप होलिकादहन स्थान पर जाकर गड्ढे से चारो कीले निकाल कर अपने निवास अथवा व्यवसाय के चारो कोनो में बाहर की ओर एक-एक कील ठोक दें इसके प्रभाव से आपका निवास एवं व्यवसाय नकारात्मक ऊर्जा के प्रबहव से बचा रहेगा।
उपाय ८ 👉 होली की रात्रि में आप माँ लक्ष्मी को पूरे भाव से लाल गुलाल से तिलक करें शुद्ध घी का २ दीपक दोनो तरफ जलाए एवं धूप दिखाकर खीर का भोग लगाये इसके बाद एक लाल वस्त्र में लाल गुलाल व एक पीले वस्त्र में पीला गुलाल रख दोनो को पोटली का रूप देकर माँ लक्ष्मी के चरणों मे रख दें इसके बाद (ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं श्री महालक्षमये नमः) निम्न मंत्र का ११ माला जप करें जप के बाद धरती पर जल छोड़ उसे सर से लगाकर उठ जाए।अगके दिन दोनो पोटलियों को पहले माँ को धूप दीप भोग अर्पण करने के बाद पोटली को भी धूप दीप दिखाकर धन वाले स्थान पर रख दें इसके बाद इसका प्रभाव स्वयं अनुभव करें।
उपाय ९ 👉 होली की रात्रि में आप अपने निवास के पूजा स्थल में एक लाल वस्त्र पर नागकेशर बिछाकर उस के ऊपर एक प्रतिष्ठित श्री यंत्र को स्थापित करें यंत्र को लाल गुलाल से तिलक कर घी का दीपक जलाये और धूप दिखाए इसके बाद खीर का भोग लगाएं इसके बाद श्री यंत्र के सामने आसान लगाकर पहले श्री ललिता सहस्त्रनाम का पाठ करे इसके बाद (ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं श्री महालक्षमये नमः) मंत्र की ११ माला जप करे जप कर भूमि पर जल छिड़क उसे माथे से लगाकर उठ जाए अगले दिन प्रातः ही श्री यंत्र को पुनः मंदिर में प्रतिष्ठित कर लाल वस्त्र को नागकेशर समेत उठाकर बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें यह उपाय कितना लाभ देगा आप स्वयं ही अनुभव करेंगे।
होली के सरल उपाय
1👉 एक श्रीफल अर्थात नारियल ओर नींबू एक कागज की पूडिया के अंदर राई बांध लेवे जिसको काली सरसों भी कहते हैं कुछ नमक सादा या काला जो उपलब्ध होे उन सभी को एक साथ बांधे ओर पूरे मकान के अंदर सात बार घुमाए जो बीमार रहते हैं विविध प्रकार के जादू टोने के चक्कर में आए हुए हो या कोई प्रेत बाधा किसी प्रकार की हवा के चक्कर में आए हुए हैं उन सब के लिए सात सात बार सर से पैर तक उतार लेना चाहिए या घुमा लेना चाहिए पुरे मकान के अंदर भी घुमाएं अन्दर से बाहर की ओर घुमाया फिर रात्रि को जब होलिका दहन होता है उसके अंदर होली के अंदर प्रवाहित कर दें जिस तरह होलिका दहन होगी आपके कष्टो का भी निवारण जरूर होगा ये उपाय अपने ऑफिस या दुकान मे भी कर सकते है।
2👉 घर के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में देशी घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए । होली की ग्यारह परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है, कष्ट दूर होते हैं।
3👉 होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। यदि पहले से ही कोई टोटका होगा तो वह भी खत्म हो जाएगा।
4👉 होली दहन के समय 7 गोमती चक्र लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र दहन में डाल दें।
5 👉 होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर उसमें थोडी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूतप्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है।
6 👉 होली के दिन से शुरु होकर बजरंग बाण का 40 दिन तक नियमित पाठ करनें से हर मनोकामना पूर्ण होगी।
7 👉 यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो, तो 21 गोमती चक्र लेकर होली दहन के दिन रात्रि में शिवलिंग पर चढा दें।
8 👉 नवग्रह बाधा के दोष को दूर करने के लिए होली की राख से शिवलिंग की पूजा करें तथा राख मिश्रित जल से स्नान करें।
9 👉 होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें।
10 👉 होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर पूजा करें व भगवान से सुख – समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण होता है।
11 👉 यदि बुरा समय चल रहा हो, तो होली के दिन पेंडुलम वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए। परिणाम स्वयं देखे।
12 👉 राहु का उपाय – एक नारियल का गोला लेकर उसमे अलसी का तेल भरकर..उसी में थोडा सा गुड डाले..फिर उस नारियल के गोले को राहू से ग्रस्त व्यक्ति अपने शारीर के अंगो से स्पर्श करवाकर जलती हुई होलिका में डाल देवे पुरे वर्ष भर राहू से परेशानी की संभावना नहीं रहेगी.
13 👉 मनोकामना की पूर्ति हेतु होली के दिन से शुरू करके प्रतिदिन हनुमान जी को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं, मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी।
14 👉 होली की प्रातः बेलपत्र पर सफेद चंदन की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए शिवलिंग पर सच्चे मन से अर्पित करें। बाद में सोमवार को किसी मंदिर में भोलेनाथ को पंचमेवा की खीर अवश्य चढ़ाएं, मनोकामना पूरी होगी।
15 👉 स्वास्थ्य लाभ हेतु मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिए जौ के आटे में काले तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।
16 👉 व्यापार लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपड़े में लाल मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, व्यवसाय में लाभ होगा।
17 👉 होली के अवसर पर एक एकाक्षी नारियल की पूजा करके लाल कपड़े में लपेट कर दूकान में या व्यापार स्थल पर स्थापित करें। साथ ही स्फटिक का शुद्ध श्रीयंत्र रखें। उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होगी।
18 👉 धनहानि से बचाव के लिए होली के दिन मुखय द्वार पर गुलाल छिड़कें और उस पर द्विमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय धनहानि से बचाव की कामना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में डाल दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि से बचाव होगा।
19 👉 दुर्घटना से बचाव के लिए होलिका दहन से पूर्व पांच काली गुंजा लेकर होली की पांच परिक्रमा लगाकर अंत में होलिका की ओर पीठ करके पांचों गुन्जाओं को सिर के ऊपर से पांच बार उतारकर सिर के ऊपर से होली में फेंक दें।
20 👉 होली के दिन प्रातः उठते ही किसी ऐसे व्यक्ति से कोई वस्तु न लें, जिससे आप द्वेष रखते हों। सिर ढक कर रखें। किसी को भी अपना पहना वस्त्र या रुमाल नहीं दें। इसके अतिरिक्त इस दिन शत्रु या विरोधी से पान, इलायची, लौंग आदि न लें। ये सारे उपाय सावधानीपूर्वक करें, दुर्घटना से बचाव होगा। आत्मरक्षा हेतु किसी को कष्ट न पहुंचाएं, किसी का बुरा न करें और न सोचें। आपकी रक्षा होगी।
21 👉 अगर आपके घर में कोई शारीरिक कष्टों से पीड़ित है – ओर उसको रोग छोड़ नहीं रहे है – तो 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र बीमार ब्यक्ति के शरीर से 21 बार उसार कर होली की अग्नि में डाल दे शारीरिक कष्टों से शीघ्र मुक्ति मिल जायेगी
22 👉 अगर बुध ग्रह आपकी कुंडली में संतान प्राप्ति में बाधा दाल रहा है तो किसी भी बच्चे वाली गरीब महिला को होली वाले दिन से शुरु कर एक महीने तक हरी-सब्जियाँ दें। माता वैष्णो-देवी से संतान की प्रार्थना करें।
23 👉 शीघ्र विवाह हेतु : जो युवा विवाह योग्य हैं और सर्वगुण संपन्न हैं, फिर भी शादी नहीं हो पा रही है तो यह उपाय करें। होली के दिन किसी शिव मंदिर जाएं और अपने साथ 1 साबूत पान, 1 साबूत सुपारी एवं हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद पीछे देखें बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। इसके साथ ही समय-समय शुभ मुहूर्त में यह उपाय किया जा सकता है। जल्दी ही विवाह के योग बन जाएंगे।