
हुआ कुछ यूँ की 👇👇👇👇
बीवी दोपहर की नींद लेकर उठी ही थी कि शौहर का व्हाट्सएप पर मैसेज और सेल्फी आया “काठमांडू ठीक से पहुँच गया हूँ, थोड़ी देर में लुम्बिनी की फ्लाइट है!”
कुछ घन्टों बाद फिर मैसेज और सेल्फी आए लुम्बिनी ठीक से पहुँच गया हूँ!” उसके बाद शौहर का फोन बंद हो गया।
हबीब ने रिटायर होने के बाद अपने लिंक्डइन प्रोफ़ाइल पर लिखा था ‘ओपन टू वर्क फ़ॉर UNO’
जिसके कुछ दिनों बाद उसे किसी मार्क नाम के व्यक्ति ने संपर्क करके कहा कि UNO को नेपाल में एक प्रोजेक्ट के लिए सैन्य बैकग्राउंड के व्यक्ति की आवश्यकता है, उच्च पद, अच्छी पगार, घर, कार और यात्रा का सारा खर्च UNO वहन करेगा। इंटरव्यू के लिए उसे नेपाल आना होगा।
उसे तय समय पर वीसा, लाहौर- ओमान-काठमांडू हवाई टिकट दिया गया। ओमान में दो फोन, नेपाली सिमकार्ड और नेपाली करंसी दिए गए और हबीब सही सलामत लुम्बिनी पहुँच गया….
यहाँ तक सब ठीक था, बस एक ही गड़बड़ थी, लुम्बिनी से भारत की सीमा मात्र 5 किलोमीटर दूर है!!
जैसे ही हबीब ने लुम्बिनी पहुँचकर मैसेज और सेल्फी भेजे उसका सिम बन्द हो गया।
जिस वेबसाइट पर उसे बायोडाटा अपलोड करने को कहा गया वह भी डिलीट हो गई। जिस मार्क से उसकी बातचीत हुई थी वह नम्बर भी बंद हो गया! और उसके बाद हबीब और मार्क का कहीं पता नहीं चला!
पाकिस्तान ने दावा किया कि हबीब को भारत ने अगवा किया है। भारत सरकार ने हबीब अपहरण में अपना हाथ होने से साफ इंकार कर दिया।
कहानी में सॉलिड ट्विस्ट यह है कि हबीब जहीर वही व्यक्ति था जिसने ईरान से भारतीय उद्योगपति कुलभूषण जाधव को अगवा करके ISI को सौंपने में प्रमुख भूमिका निभाई थी….
है न दिलचस्प किस्सा…..