
*1. सूर्य – राजा*
सूर्य प्रकाश, वर्चस्व, पिता, सरकार का कारक।
कमजोर होने पर – शिक्षा अधूरी, करियर में बार-बार असफलता, सरकारी काम अटकना, नौकरी में बॉस से अनबन। शरीर में – आँखों में ज्योति कम होना, मोतियाबिंद, चश्मा, दिल की बीमारी, BP, सिरदर्द, चर्म रोग। पारिवारिक – पिता से संबंध खराब, पिता की सेहत खराब, पिता से सहयोग न मिलना। सूर्य कमजोर तो आत्मविश्वास खत्म।
उपाय – तांबे के लोटे से रोज सूर्य को जल, आदित्य हृदय स्तोत्र।
*2. चंद्रमा – मन*
चंद्र मन, माता, ठंड, पानी का कारक।
कमजोर होने पर – मन कभी शांत नहीं, रात को नींद न आना, घबराहट, अवसाद, मानसिक रोग। शरीर में – सर्दी-जुकाम साल भर, कफ, अस्थमा, निमोनिया, गठिया, पानी से एलर्जी। ऐसे व्यक्ति हमेशा किसी न किसी चिंता से घिरा रहता है, खुद ही अपनी असफलता का कारण बनता है।
उपाय – शिव जी को जल, सफेद चीज का दान, मोती की जगह चांदी के साथ चंद्र शांति।
*3. मंगल – सेनापति*
मंगल हिम्मत, भाई, खून, जमीन का कारक।
कमजोर होने पर – मति भ्रम, गुस्सा कंट्रोल न होना, गुस्से में गलत फैसला। शरीर में – बवासीर, खून की कमी या खून गाढ़ा, हाई BP, शरीर में गर्मी। जीवन में – भाइयों से झगड़ा, जमीन के मामले अटकना, आए दिन छोटी दुर्घटना, कभी बड़ी दुर्घटना जो उम्र भर निशान छोड़ दे।
उपाय – हनुमान जी की पूजा, मंगलवार को सिंदूर।
*4. बुध – राजकुमार*
बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार, हिसाब का कारक।
कमजोर होने पर – याददाश्त कमजोर, पढ़ा हुआ भूल जाना, तर्क न कर पाना, सही समय पर सही निर्णय न लेना। शरीर में – कान, नाक, गले के रोग, हकलाना, स्किन एलर्जी। व्यापार में – सौदा फंसना, हिसाब में गलती, दलाली में नुकसान।
उपाय – पन्ना, 4 मुखी रुद्राक्ष, गणेश जी।
*5. बृहस्पति – गुरु*
गुरु धन, किस्मत, ज्ञान, संतान का कारक।
कमजोर होने पर – आर्थिक तंगी। मुखिया की कुंडली में गुरु कमजोर तो पूरे घर में पैसा न टिकना। आय अच्छी पर संचय नहीं, कमाया हुआ फिजूलखर्च। सामाजिक इज्जत कम। शादी में रुकावट, शादी के बाद संतान में देरी या परेशानी। शरीर में – गठिया, कब्ज, लिवर, मोटापा।
उपाय – केले के पेड़ में जल, पीले वस्त्र का दान, विष्णु पूजा।
*6. शुक्र – सुख*
शुक्र पत्नी, पैसा, सुंदरता, गाड़ी-बंगला का कारक।
कमजोर होने पर – दांपत्य जीवन में रोज कलह, प्यार खत्म, तलाक तक। शरीर में – डायबिटीज, यकृत, मूत्र रोग, आँखों की चमक कम, वीर्य दोष। भौतिक – कितनी भी मेहनत कर लो, लग्जरी लाइफ नहीं, गाड़ी-बंगला होते हुए भी सुख नहीं।
उपाय – सफेद चीज, लक्ष्मी पूजा, हीरा या ओपल।
*7. शनि – न्याय*
शनि कर्म, नौकरी, नौकर, लोहा, उम्र का कारक।
कमजोर या नाराज होने पर – गैस, लकवा, कैंसर, मिर्गी, पैरों में दर्द, हड्डी-कमर-घुटने की बीमारी। ठीक होने के बाद भी लंगड़ाहट रहना। नौकरी में बार-बार अड़ंगा, नौकर से धोखा, लोहे-तेल-मशीन में नुकसान। शनि बुरे कर्मों का दंड देता है।
उपाय – मजदूर की सेवा, शनिवार तेल दान, पीपल में जल, नीलम।
*8. राहु – छाया*
राहु भ्रम, विदेश, ऑनलाइन, अचानक का कारक।
अशुभ होने पर – आलस्य बढ़ना, बुद्धि भ्रमित, किसी भी चीज का सही निर्णय न ले पाना। सीधा तंत्रिका तंत्र पर असर – नसों में खिंचाव, मस्तिष्क रोग, पक्षाघात। शेयर, सट्टा, लॉटरी में पैसा डूबना, भूत-प्रेत का डर, रात में डरावने सपने।
उपाय – शिव जी, भैरव जी, नारियल-कंबल दान, 8 मुखी रुद्राक्ष।
*9. केतु – मोक्ष*
केतु पेट, पैर, रीढ़, अचानक घटना और मोक्ष का कारक।
बुरी दशा में – गले से नीचे के हिस्से में रोग – पेट में गैस, एसिडिटी, पथरी, पैरों में दर्द, रीढ़ में तकलीफ। अचानक चोट, ऑपरेशन। आदमी को अकेला कर देना, भीड़ में भी अकेलापन, दुनिया से मन हटना।
उपाय – गणेश जी, कुत्ते को रोटी, झंडा दान, 9 मुखी रुद्राक्ष।