
जन्मकुंडली का सप्तमेश बताता है मुलाकात की जगह और माध्यम
विवाह केवल सप्तम भाव से नहीं देखा जाता। सप्तम भाव विवाह और जीवनसाथी का क्षेत्र है, जबकि सप्तम भाव का स्वामी किस भाव में बैठा है, इससे यह संकेत मिलता है कि जीवनसाथी से मुलाकात जीवन के किस क्षेत्र, परिस्थिति या माध्यम से होगी।
सप्तमेश प्रथम भाव में – जीवनसाथी स्वयं आपके जीवन में आता है। मुलाकात अपने आसपास के वातावरण, व्यक्तिगत संपर्क, किसी परिचित के माध्यम से या ऐसी परिस्थिति में होती है जहाँ सामने वाला पहले आपमें रुचि दिखाता है। कई बार विवाह का प्रस्ताव सीधे जातक तक पहुँचता है।
सप्तमेश द्वितीय भाव में – परिवार, रिश्तेदार, पारिवारिक समारोह, विवाह समारोह या परिवार के परिचित व्यक्ति के माध्यम से जीवनसाथी से मुलाकात होती है। परिवार की भूमिका विवाह तय कराने में प्रमुख रहती है।
सप्तमेश तृतीय भाव में- पड़ोस, छोटी यात्रा, भाई-बहन, मित्र, संचार माध्यम, लेखन, प्रशिक्षण या बार-बार होने वाली बातचीत जीवनसाथी से जोड़ती है। सोशल मीडिया, संदेश या ऑनलाइन बातचीत भी इस भाव से संबंध रखती है।
सप्तमेश चतुर्थ भाव में – अपने शहर, घर के आसपास, विद्यालय-महाविद्यालय, संपत्ति, वाहन या पारिवारिक परिचय के माध्यम से मुलाकात होती है। कई बार परिवार पहले से एक-दूसरे को जानते हैं।
सप्तमेश पंचम भाव में – पढ़ाई, महाविद्यालय, मनोरंजन, कला, खेल, मित्र मंडली या किसी पसंदीदा गतिविधि के दौरान मुलाकात होती है। यहाँ पहले आकर्षण या प्रेम और बाद में विवाह की कहानी विशेष रूप से दिखाई देती है।
सप्तमेश षष्ठ भाव में – नौकरी, कार्यस्थल, सहकर्मी, सेवा क्षेत्र, प्रतियोगिता, दैनिक कामकाज या किसी समस्या को सुलझाने के दौरान परिचय होता है। जीवनसाथी से पहली पहचान व्यावहारिक परिस्थिति में होती है।
सप्तमेश सप्तम भाव में – विवाह प्रस्ताव, सामाजिक परिचय, साझेदारी, सार्वजनिक संपर्क या सीधे आमने-सामने की मुलाकात से संबंध बनता है। जीवनसाथी स्वयं विवाह की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाता है।
सप्तमेश अष्टम भाव में – मुलाकात अचानक और अप्रत्याशित परिस्थिति में होती है। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति, संयुक्त धन, बीमा, बैंकिंग, शोध, ज्योतिष, गूढ़ विषय या जीवन में आए बड़े परिवर्तन के दौरान संबंध बनता है। कई बार रिश्ता आरंभ में गोपनीय भी रहता है।
सप्तमेश नवम भाव में – लंबी यात्रा, तीर्थस्थान, धार्मिक आयोजन, उच्च शिक्षा, गुरु, शिक्षक या दूसरे शहर-प्रदेश से जुड़ी परिस्थिति जीवनसाथी से मिलाती है। जीवनसाथी का पारिवारिक या सांस्कृतिक परिवेश अलग भी रहता है।
सप्तमेश दशम भाव में – कार्यक्षेत्र, व्यवसाय, कार्यालय, पेशेवर संपर्क, अधिकारी या सार्वजनिक जीवन के माध्यम से मुलाकात होती है। कई बार काम के कारण परिचय होता है और वही संबंध धीरे-धीरे विवाह तक पहुँचता है।
सप्तमेश एकादश भाव में – दोस्तों, बड़े सामाजिक समूह, संस्था, परिचितों के समूह, सोशल मीडिया या किसी नेटवर्क के माध्यम से जीवनसाथी मिलता है। पहले मित्रता और फिर संबंध बनने का योग विशेष रूप से दिखाई देता है।
सप्तमेश द्वादश भाव में – विदेश, दूसरे शहर, लंबी दूरी की यात्रा, होटल, आश्रम, अस्पताल, एकांत स्थान या ऑनलाइन संपर्क के माध्यम से जीवनसाथी से मुलाकात होती है। कई बार संबंध दूर रहते हुए शुरू होता है या जीवनसाथी का संबंध जन्मस्थान से दूर स्थान से होता है।
लेकिन केवल सप्तमेश का भाव देखकर अंतिम निर्णय नहीं करना चाहिए।
सप्तमेश किस राशि और नक्षत्र में है, उस पर किन ग्रहों की दृष्टि या युति है, शुक्र की स्थिति, विवाह कारक गुरु का प्रभाव, राहु-केतु का संबंध और नवांश कुंडली ये सभी मिलकर एक्चुअल फल बताते हैं।
उदाहरण के लिए सप्तमेश तृतीय भाव में हो और राहु से संबंध बनाए, तो सोशल मीडिया या ऑनलाइन बातचीत की भूमिका बढ़ती है। सप्तमेश दशम भाव में बुध से जुड़ा हो तो कार्यक्षेत्र, व्यावसायिक बातचीत या पेशेवर संपर्क से परिचय प्रमुख होता है। सप्तमेश नवम या द्वादश भाव में राहु से जुड़ा हो तो दूर स्थान, अलग संस्कृति या विदेश से संबंध अधिक स्पष्ट होता है।
इसलिए जन्मकुंडली केवल यह नहीं बताती कि विवाह कैसा रहेगा, यह इस बात के भी संकेत देती है कि वह व्यक्ति आपकी जिंदगी में किस रास्ते से प्रवेश करेगा।