
ओडिशा के अंगुल जिले के डीएवी पब्लिक स्कूल (एनटीपीसी, तलचर थर्मल पावर प्लांट) के कक्षा 9 के छात्र प्रतीक सेठी ने अपनी प्रतिभा, नवाचार और वैज्ञानिक सोच के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने Vivo Ignite: Technology and Innovation Initiative Version 3.0 प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता (National Winner) का खिताब अपने नाम किया। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और विद्यालय के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे देश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
प्रतीक सेठी ने WISECAD (AI Powered Passive Criminal Activity Detection System) नामक एक अभिनव प्रोटोटाइप विकसित किया है। यह एक कम लागत (Low-Cost) वाला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित अपराध पहचान प्रणाली है, जो Sensorless Sensing Technology का उपयोग करके संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने में सक्षम है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें महंगे सेंसरों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इसकी लागत काफी कम हो जाती है और इसे व्यापक स्तर पर उपयोग में लाया जा सकता है।
आज के समय में सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। सार्वजनिक स्थानों, विद्यालयों, कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर अपराधों की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रतीक का यह नवाचार भविष्य की सुरक्षा प्रणालियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है। यदि इस तकनीक को और विकसित किया जाए, तो यह संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान कर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रतीक का यह प्रोजेक्ट प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया। इस भव्य आयोजन का आयोजन द अशोक, नई दिल्ली में 15 जून को किया गया था। देशभर से आए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और उनके नवाचारों के बीच WISECAD को शीर्ष स्थान प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि यह परियोजना तकनीकी दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली और उपयोगी है। निर्णायक मंडल ने प्रतीक की वैज्ञानिक समझ, समस्या समाधान क्षमता और सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए उन्हें विजेता घोषित किया।
इस शानदार उपलब्धि के लिए प्रतीक सेठी को एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति तथा आकर्षक ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, लगन और नवाचार की भावना की पहचान है। इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करना किसी भी विद्यार्थी के लिए अत्यंत गौरव की बात है।
प्रतीक की सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन, संसाधन और प्रोत्साहन मिले, तो वे बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान खोज सकते हैं। आज भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच को मंच प्रदान करना है। Vivo Ignite जैसी पहलें युवाओं को अपनी कल्पनाओं को वास्तविक तकनीकी समाधान में बदलने का अवसर देती हैं।
प्रतीक सेठी की उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि नवाचार केवल बड़े वैज्ञानिकों या इंजीनियरों तक सीमित नहीं है। यदि किसी विद्यार्थी के भीतर जिज्ञासा, सीखने की इच्छा और समाज के लिए कुछ नया करने का संकल्प हो, तो वह कम उम्र में भी असाधारण कार्य कर सकता है। उनका उदाहरण उन लाखों विद्यार्थियों को प्रेरित करता है जो विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
विद्यालयों की भूमिका भी इस प्रकार की उपलब्धियों में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। डीएवी पब्लिक स्कूल ने प्रतीक को ऐसा शैक्षणिक वातावरण प्रदान किया, जहाँ उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ। परिवार, शिक्षकों और विद्यालय के सहयोग से ही किसी विद्यार्थी की क्षमता पूरी तरह विकसित हो पाती है।
आज भारत “डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों के माध्यम से तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है। ऐसे समय में प्रतीक सेठी जैसे युवा आविष्कारक देश के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक हैं। उनका WISECAD प्रोजेक्ट यह संदेश देता है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि समाज को अधिक सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
अंततः, प्रतीक सेठी की सफलता प्रत्येक विद्यार्थी के लिए यह प्रेरणा है कि उम्र कभी भी उपलब्धियों की सीमा नहीं होती। मेहनत, रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरंतर प्रयास के बल पर कोई भी छात्र राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकता है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।