
जन्मकुंडली अध्ययन में लग्नेश यानि लग्न के स्वामी को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है, व्यक्ति के जीवन स्वास्थ्य उसके व्यक्तित्व, आत्मबल और उसकी सफलता का जो प्राथमिक कारक ग्रह है वो लग्नेश ही है और जन्मकुंडली में जब लग्नेश मजबूत हों तो जीवन में स्थिरता लाते हैं लेकिन वहीं जब लग्नेश त्रिक भाव अर्थात् छठे, आठवें या बारहवें भाव में जाकर बैठ जाएं तब ये एक दुर्योग का निर्माण करते हैं जिसे हम कहते हैं *अव योग*।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि छठा भाव रोग, रिपु, ऋण और संघर्ष का भाव है और लग्नेश का यहां होना व्यक्ति को निरंतर संघर्ष, स्वास्थ्य समस्या, कानूनी विवाद और परेशानियों में डाल देते हैं, जातक आजीवन आजीविका के लिए जूझता रहता है।
आठवें भाव में जाकर के लग्नेश यदि बैठ जाएं तो अकस्मात संकट, आयु से संबंधित परेशानी, दुर्घटना, गम्भीर परेशानियां जातक के जीवन में आने लगती हैं।लग्नेश का यहां होना जीवन में अचानक विपत्तियों को ला देता है, विपत्तियों के मध्य घेरकर रख देता है और व्यक्ति हमेशा एक अज्ञात भय से भयभीत रहता है।
बारहवें भाव में यदि लग्नेश जाकर बैठ जाएं तो ये खर्च का भाव है, ये हानि का भाव है, ये विदेश यात्रा और आध्यात्मिकता का भाव जरूर है लेकिन ये भाव लग्नेश के यहां होने से अस्थिरता उत्पन्न करता है, लग्नेश का यहां होना व्यक्ति को आर्थिक संकट में डाल देता है, व्यर्थ का व्यय, विदेश यात्रा या विदेश यात्रा में बाधा, मानसिक अस्थिरता देता है।
लग्नेश का जन्मकुंडली के छठे भाव में होना जीवन में शत्रुओं को सक्रिय कर देता है व्यक्ति हमेशा किसी न किसी विवाद में उलझ जाता है, लगातार आर्थिक संघर्ष, ऋण का दबाव उसके ऊपर बन जाता है, उसके जीवन काल में बार बार बीमारियां आ जाती हैं, नौकरी कर रहा है तो नौकरी में परेशानी, व्यापार कर रहा है तो व्यापार में लगातार समस्या यानी वो किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं चाहता पर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि लोग उसी से प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं कुल मिलाकर उसे मानसिक तनाव में जीना पड़ता है, कानूनी मामले में उलझ जाता है, कोर्ट कचहरी का चक्कर उसको काटना पड़ता है, शत्रु सदैव उसके पीछे पड़े रहते हैं जैसे उसी ने सबका सब कुछ बिगाड़ा है।
लग्नेश आठवें भाव में हों तो आकस्मिक परेशानियां ऐसी आती हैं कि अचानक व्यक्ति संकट में आ जाएगा, दुर्घटना हो जायेगी, गंभीर स्वास्थ्य संबंधित परेशानी उसके जीवन में आ जायेगी।
(जन्मकुंडली में चार त्रिकोण का निर्माण होता है – धर्म त्रिकोण, अर्थ त्रिकोण, काम त्रिकोण और मोक्ष त्रिकोण) अब जो लग्न है वो धर्म है और जन्मकुंडली का आठवां भाव वैराग्य है तो धर्म के स्वामी का वैराग्य में चले जाना खराब नहीं होना चाहिए लेकिन चूंकि हम गृहस्थ आश्रमी हैं और गृहस्थ आश्रमी के जीवन में जो तमाम चीजें होनी चाहिए उसमें बाधा उत्पन्न होती है। अष्टम में लग्नेश के होने से अचानक आर्थिक हानि, परिवार के मध्य विवाद, मानसिक भय, तनाव जातक को बना रहेगा, कोई गुप्त रोग या ऐसी बीमारी जो स्पष्ट न हो बार बार वो सामने आती रहेगी, जीवन में गहरा असंतोष होगा, बेचैनी, अस्पष्ट भय बना रहेगा।
लग्नेश बारहवें में हो तो व्यय इत्यादि तो कराता ही कराता है लगातार व्यर्थ की धनहानि कराता है, आर्थिक अस्थिरता जीवन में बनी ही रहती है, ऐसे जातक विदेश यात्रा आदि का प्रयत्न करें तो उसमें भी परेशानियां आती हैं यानी कुल मिलाकर छोटी मोटी बाधाएं आती ही रहती हैं, मानसिक अशांति, नींद की कमी हालांकि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ये बहुत अच्छा है लेकिन एक गृहस्थ आश्रमी जब मन से अशांत रहे तो क्या वो आध्यात्म से जुड़ पायेगा? व्यक्ति अत्यधिक संवेदनशील, बेचैन, मानसिक रूप से परेशान और अस्थिर हो जाता है।
अब जानते हैं इसके उपाय :
आइए इस अव योग का एक समाधान आपको बताते हैं इसके लिए आपको कुछ सामग्री चाहिए होगी :
एक तुलसी जी का पौधा (आपके घर में पहले से है तो भी एक नया स्वस्थ पौधा आपको लेना है )
एक गरी गोला ( सूखा नारियल)
एक लाल रंग का कपड़ा (जो साफ सुथरा हो )
एक तांबे का सिक्का या तांबे का टुकड़ा।
अक्षत (अखंडित चावल)
काला तिल
लौंग ( लगभग 7)
लाल चंदन
ये उपाय आपको गुरुवार के दिन गुरु की होरा ( सुबह सूर्योदय से लेकर एक घंटे तक) में करना है।
स्नानादि से निवृत्त होकर लाल या पीले वस्त्र धारण करें गरी गोला ऊपर से काट कर अन्य सभी सामग्री को उसके अंदर डालकर गोले का कटा हिस्सा उसके ऊपर से बंद करके लाल कपड़े से उसको बांध दें, अब सावधानी पूर्वक इसे मिट्टी में नीचे रखकर उसी के ऊपर तुलसी जी का पौधा लगा दें, इसके बाद उस तुलसी के पौधे में तीर्थ का जल या गंगाजल अर्पित करें (ध्यान रहे उस दिन विशेष रूप से आपको गंगाजल या तीर्थ का जल ही अर्पित करना है) इसके बाद सात गुरुवार दूध अर्पित करें, फिर तुलसी जी के पौधे की विधिवत पूजा करें।
ये उपाय यदि आप श्रद्धा पूर्वक कुछ दिनों तक करते हैं तो अव योग से आपको राहत मिलेगी, जीवन में धनागमन की स्थिति बनेगी, कार्यक्षेत्र में संघर्ष, परेशानी जो भी उपस्थित हो रही थी उससे राहत मिल जायेगी।