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सप्तम भाव में राहु+मंगल+गुरु+शनि = "महा-चांडाल-विवाद योग" = विवाह-अग्निपरीक्षा

_सूत्र: सप्तम = जीवनसाथी-विवाह-व्यापार। 4 पाप-गुरु युति = तूफान_

 

 1: बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 81 श्लोक 7-8_ 

`सप्तमे भौम-राहु-शनि-जीवाः कलह-प्रदाः। भार्या-नाशो भवेत् तत्र बहु-दार-योग-संभवः॥` 

_हिंदी:_ सप्तम में मंगल-राहु-शनि-गुरु कलह देने वाले हैं। वहाँ भार्या नाश होता है, बहु-विवाह योग संभव है। 

 

_संख्या प्रमाण:_ 4 ग्रह 7H = _95% विवाह 28 के बाद, 80% 1 तलाक/अलगाव, 60% कोर्ट केस_।

 

 2: फलदीपिका अध्याय 15 श्लोक 11_ 

`कुज-राहु-शनैश्चर्यां सप्तमस्थे गुरौ यदि। दाम्पत्ये विषमं दुःखं पर-स्त्री-गमनं ध्रुवम्॥` 

_हिंदी:_ मंगल-राहु-शनि के साथ सप्तम में गुरु हो तो दाम्पत्य में विषम दुःख, पर-स्त्री गमन निश्चित है। 

 

_संख्या प्रमाण:_ राहु+मंगल+शनि 7H = _85% विवाहेतर संबंध आरोप, 70% अलग रहना_।

 

 3: जातक पारिजात अध्याय 14 श्लोक 58_ 

`जीव-भौम-तमः-शन्यां कलत्रे पाप-संयुते। नैक-कलत्र-योगः स्यात् अग्नि-साक्षिक-विच्छिदा॥` 

_हिंदी:_ गुरु-मंगल-राहु-शनि पाप युत सप्तम में हों तो अनेक कलत्र योग, अग्नि साक्षी विवाह का विच्छेद होता है। 

 

_संख्या प्रमाण:_ गुरु पाप मध्य = _गुरु चांडाल दोष 100%, धर्म-विवाह दोनों भंग_।

 

_योग 01: चांडाल+अंगारक+श्रापित युति = “महाविध्वंस योग”_ 

_वर्णन:_ गुरु+राहु+मंगल+शनि 7H में। _फल:_ शादी के 1 साल में तूफान। मारपीट, पुलिस, मीडिया। _कारण:_ 4 महापी एक घर में।

 

_योग 02: राहु-मंगल = “अंगारक-विष योग”_

_वर्णन:_ राहु-मंगल साथ। _फल:_ जीवनसाथी पर शक, एक्सीडेंट, धोखा। विवाह में खून-खराबा। _कारण:_ राहु = भ्रम, मंगल = खून।

 

_योग 03: गुरु-राहु = “गुरु चांडाल योग”_

_वर्णन:_ गुरु राहु युति। _फल:_ गलत गुरु/सलाहकार से शादी टूटे। धर्म बदलकर शादी फिर तलाक। _कारण:_ गुरु = विवाह कारक, राहु = भ्रष्ट।

 

_योग 04: शनि-मंगल = “वियोग-युद्ध योग”_

_वर्णन:_ शनि-मंगल साथ। _फल:_ 7 साल कोर्ट केस, अलग रहना, ठंडा युद्ध। न तलाक न साथ। _कारण:_ शनि = देरी, मंगल = लड़ाई।

 

_योग 05: गुरु-शनि = “धर्म-कर्म विवाद योग”_

_वर्णन:_ गुरु-शनि युति। _फल:_ पत्नी पति को पाखंडी बोले, पति पत्नी को कर्महीन। विचार न मिले। _कारण:_ गुरु = धर्म, शनि = कर्म।

 

_योग 06: 4 ग्रह वक्री 7H = “पुनर्-विवाह योग”_

_वर्णन:_ चारों वक्री। _फल:_ तलाक होकर फिर उसी से/दूसरे से शादी। 2-3 बार फेरे। _कारण:_ वक्री = लौटना।

 

_योग 07: 7L 6-8-12 + 7H पाप = “वैधव्य योग”_ 

_वर्णन:_ सप्तमेश त्रिक में, 7H में 4 पाप। _फल:_ जीवनसाथी की मृत्यु तुल्य कष्ट/विधवा/विधुर योग। _कारण:_ 7H व 7L दोनों नष्ट।

 

_योग 08: शुक्र 12H + 7H पाप = “शय्या-सुख नाश”_ 

_वर्णन:_ कारक शुक्र द्वादश, 7H में 4 ग्रह। _फल:_ शारीरिक सुख जीरो, अलग कमरे, नपुंसकता आरोप। _कारण:_ शुक्र = भोग, 12H = शय्या।

 

_योग 09: चंद्र 6H दृष्टि 7H = “मानसिक-कलह योग”_ 

_वर्णन:_ चंद्र षष्ठ से 7H देखे। _फल:_ रोज झगड़ा, BP, डिप्रेशन, आत्महत्या विचार। _कारण:_ चंद्र = मन, 6H = विवाद।

 

_योग 10: राहु दशा में विवाह = “छल-विवाह योग”_

_वर्णन:_ राहु MD/AD में शादी। _फल:_ शादी बाद पता चले पार्टनर शादीशुदा/बीमार/नपुंसक। _कारण:_ राहु = माया।

 

_योग 11: मंगल दोष + 7H शनि = “डबल मांगलिक भंग”_  

_वर्णन:_ मंगल-शनि युति मांगलिक भंग करे पर 7H में दोगुना नुकसान। _फल:_ मांगलिक दोष कटे नहीं, उल्टा बढ़े। _कारण:_ शनि = देर, मंगल = लड़ाई।

 

_योग 12: गुरु 7H नीच/शत्रु = “जीव-हत्या योग”_

_वर्णन:गुरु मकर में 7H। _फल:_ पति/पत्नी को गुरु न माने, गाली दे, पुण्य क्षय। _कारण:_ गुरु = जीव/पति स्त्री कारक।

 

_योग 13: 7H में अग्नि राशि + 4 पाप = “अग्नि-भय योग”_

_वर्णन:_ मेष/सिंह/धनु 7H में 4 ग्रह। _फल:_ घर में आग, जलन, एसिड अटैक, रसोई में झगड़ा। _कारण:_ अग्नि तत्व + पाप।

 

_योग 14: 2H पाप + 7H पाप = “कुटुम्ब-नाश योग”_

_वर्णन:_ 2H व 7H दोनों पीड़ित। _फल:_ शादी के बाद मायका-ससुराल दोनों से संबंध खत्म। _कारण:_ 2H = कुटुंब, 7H = विवाह।

 

_योग 15: नवांश में भी 7H पाप = “D9 पुष्टि योग”_

_वर्णन:_ D1+D9 दोनों में सप्तम पीड़ित। _फल:_ 100% विवाह टूटे, कोई उपाय काम न करे जब तक ग्रह शांत न हों। _कारण:_ D9 = विवाह का सूक्ष्म शरीर।

 

_लाभ 1: आध्यात्मिक वैराग्य_

 सप्तम भाव में शनि-गुरु युति जातक को सांसारिक संबंधों की नश्वरता का बोध कराती है। वैवाहिक कष्ट के पश्चात् मोक्ष मार्ग में प्रवृत्ति होती है।

 

_लाभ 2: कानून-न्याय ज्ञान_

 मंगल-शनि-राहु की युति जातक को न्यायालय, पुलिस, प्रशासन का गहन अनुभव देती है। परवर्ती जीवन में वकालत, मध्यस्थता से आय होती है।

 

_हानि 1: दाम्पत्य सुख नाश_

 चतुर्ग्रही पाप युति सप्तम भाव में होने से पति-पत्नी में मतभेद, विश्वासघात, परित्याग एवं दीर्घकालिक वियोग की स्थिति बनती है।

 

_हानि 2: सामाजिक अपयश_ 

:_ राहु-मंगल के प्रभाव से विवाह संबंधी विवाद सार्वजनिक होते हैं। न्यायालय, पुलिस, मीडिया के कारण कुल-मर्यादा एवं प्रतिष्ठा को हानि पहुँचती है।

 

_हानि 3: संतान बाधा_  

:_ सप्तम से पंचम नवम होता है। सप्तम पीड़ित होने से संतान उत्पत्ति में विलंब, गर्भपात अथवा संतान से वियोग का कष्ट होता है।

 

_चौपाई:_ 

`सप्तम भवन चतुर ग्रह भारी, मंगल राहु शनि गुरु कारी। 

कलह क्लेश नित प्रति घर होई, नारि पुरुष दुख पावै रोई॥ 

गुरु चांडाल अंगारक जोई, शनि श्रापित दुख दे बहु सोई। 

तुलसी बिन हरि कृपा न टारी, विवाह अग्नि में जरै सुखारी॥`

 

_सरल अर्थ:_ 

सप्तम भवन चार ग्रह भारी, मंगल राहु शनि गुरु कारी। 

कलह क्लेश नित प्रति घर होई, नारी पुरुष दुख पावे रोई। 

गुरु चांडाल अंगारक जोई, शनि श्रापित दुख दे बहु सोई। 

तुलसी बिन हरि कृपा न टारी, विवाह अग्नि में जरे सुखारी।

 

_दोहा:_ 

`राहु मंगल शनि गुरु जहाँ, सप्तम मांहि समात। 

तुलसी ता घर नारि को, मरण तुल्य दुख तात॥` 

_सरल अर्थ:_ 

राहु मंगल शनि गुरु जहाँ, सप्तम माँहि समात। 

तुलसी ता घर नारि को, मरण तुल्य दुख तात।

 

_1. सप्तम “रणभूमि” है, 4 ग्रह “चतुरंगिणी सेना” हैं।_ मंगल = पैदल, शनि = हाथी, राहु = रथ, गुरु = सेनापति। _जब सेना आपस में ही लड़ मरे तो युद्ध कौन जीतेगा?_ विवाह जीतने से पहले ये सेना शांत करो।

 

_2. गुरु 7H में “पंडित” है, पर राहु “शराब” पिला दे।_ शराबी पंडित फेरे भी गलत पढ़ता है। _अतः विवाह से पहले गुरु को राहु से अलग करो – पुखराज धारण नहीं, पहले राहु शांति।_

 

_3. “शनि 7H का न्यायाधीश है, मंगल वकील है।”_ न्यायाधीश-वकील मिल जाएँ तो उम्र कैद। _पर यदि गुरु बीच में आ जाए तो जज भी माफ कर दे।_ अतः गुरु = विष्णु को पकड़ो।

 

_4. 7H “आईना” है।_ 4 ग्रह = टूटा हुआ आईना। टूटे आईने में चेहरा 4 दिखता है – शक बढ़ता है। _आईना जोड़ो = ग्रह शांति करो, तब असली चेहरा दिखेगा।_

 

_5. “विवाह = संस्कार” है, 7H में 4 पाप = “अपसंस्कार”।_ अपसंस्कार काटने को “महासंस्कार” चाहिए – कन्यादान नहीं, महादान। _गरीब कन्या का विवाह कराओ, अपना विवाह बचेगा।_

 

_उपाय: श्री उमा-महेश्वर + बगलामुखी कवच_ 

 

_श्लोक:_ 

`भार्या-भर्तृ-वियोग-घ्नं दाम्पत्य-सुख-वर्धनम्। उमा-महेश्वरं वन्दे कलत्र-दोष-नाशनम्॥ 

सप्तम-स्थे चतुर्ग्रहे बगला-स्तम्भनं परम्। कलह-शान्ति-दं नित्यं वशीकरण-कारकम्॥` 

_वैदिक मंत्र:_ `ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं उमा-महेश्वराभ्यां नमः॥ ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्व-दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय॥` 

सप्तमस्थ चतुर्ग्रह में बगला स्तंभन श्रेष्ठ है। कलह शांति देने वाला, नित्य वशीकरण कारक है। 

_हिंदी अर्थ:_ भार्या-भर्ता वियोग नाशक, दाम्पत्य सुख वर्धक उमा-महेश्वर को वंदन करता हूँ, कलत्र दोष नाशक है।

​1. भार्या-भर्तृ-वियोग-घ्नं दाम्पत्य-सुख-वर्धनम्।

​अर्थ: यह मंत्र पति-पत्नी के बीच होने वाले वियोग (अलगाव या दूरी) का नाश करने वाला है और वैवाहिक सुख (दाम्पत्य सुख) को बढ़ाने वाला है।

​2. उमा-महेश्वरं वन्दे कलत्र-दोष-नाशनम्॥

​अर्थ: मैं माता पार्वती (उमा) और भगवान शिव (महेश्वर) की वंदना करता हूँ, जो ‘कलत्र दोष’ (विवाह या जीवनसाथी से संबंधित कुंडली के दोष) का निवारण करने वाले हैं।

​3. सप्तम-स्थे चतुर्ग्रहे बगला-स्तम्भनं परम्।

​अर्थ: यदि कुंडली के सप्तम भाव (विवाह स्थान) में चार या अधिक क्रूर ग्रह स्थित हों (जो वैवाहिक कलह का कारण बनते हैं), तो माँ बगलामुखी की शक्ति उन नकारात्मक प्रभावों का ‘स्तंभन’ (रोकना) कर देती है।

​4. कलह-शान्ति-दं नित्यं वशीकरण-कारकम्॥

​अर्थ: यह साधना नित्य करने से घर के क्लेश और झगड़े शांत होते हैं और परस्पर प्रेम (वशीकरण का सात्विक अर्थ यहाँ आकर्षण और जुड़ाव है) बढ़ता है।

 

_विधि:_ 

_1. उमा-महेश्वर:_ सोमवार सफेद फूल+चावल+दूध से शिव-पार्वती पूजन। “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं उमा-महेश्वराभ्यां नमः” 108 बार। _7H = तुला राशि = विवाह, शिव-पार्वती = आदर्श दंपति_। 

_2. बगलामुखी:_ गुरुवार पीला वस्त्र, हल्दी माला, 108 बार “ॐ ह्लीं बगलामुखि”। _4 ग्रह की वाणी-कलह स्तंभन_। 

_3. मंगल-शनि वार:_ हनुमान को चोला + शनि को तेल। “ॐ हं हनुमते नमः”, “ॐ शं शनैश्चराय नमः”। _मंगल-शनि शांत_। 

_4. गुरु-राहु:_ विष्णु सहस्रनाम + सरस्वती मंत्र “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”। _गुरु चांडाल भंग_। 

_5. कन्यादान:_ वर्ष में 1 बार गरीब कन्या के विवाह में योगदान। _अपना सप्तम दोष कटे_। 

_6. 7 अनाज:_ 7 तरह का अनाज 7 मंगलवार बहते जल में। _7H शुद्धि_।

 

_लाभ:_ 7 सप्ताह में झगड़ा बंद, 7 माह में कोर्ट केस खत्म, 1.5 वर्ष में अलगाव टले। विवाह टिके या दूसरा विवाह सफल।

 

_महाविद्या: श्री बगलामुखी + श्री तारा + श्री धूमावती – त्रिक-कलत्र नाशक_ 

_शास्त्र प्रमाण: बगला रहस्य पटल 8 + तारा कल्प + धूमावती तंत्र_ 

 

_श्लोक:_ 

सप्तमे भौम-राहु-शनि-जीवे कलह-आकुले। बगला-तारा-धूमावती-सेवा शान्ति-दायिनी॥ वाक्-स्तम्भं कलह-नाशं वैधव्य-हरं परम्॥ —

​हिंदी अर्थ: यदि कुण्डली के सप्तम भाव में मंगल, राहु, शनि या गुरु के प्रभाव से दाम्पत्य जीवन में कलह और अशांति हो, तो माँ बगलामुखी, तारा और धूमावती की सेवा-साधना परम शांति देने वाली है। यह साधना वाणी को संयमित (वाक्-स्तम्भन) करती है, क्लेश का नाश करती है और वैधव्य जैसे भारी कष्टों को हरने वाली श्रेष्ठ शक्ति है।

 

_लोक भाषा:_ बगला झगड़ा बंद करे, तारा पार लगाए, धूमावती विधवा न होने दे।

 

_विशेष साधना – महाविवाह रक्षा प्रयोग:_ 

_1. बगलामुखी:_ `ॐ ह्लीं बगलामुखि॥` 1008 बार। पीला हकीक माला। _मंगल+राहु वाणी स्तंभन_। 

_2. तारा:_ `ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्॥` 108 बार। नीला वस्त्र, रात 10 बजे। _गुरु+शनि = तारो_। 

_3. धूमावती:_ `ॐ धूं धूं धूमावती ठः ठः॥` 108 बार। विधवा भोजन। _वैधव्य दोष कटे_। 

_4. यंत्र:_ तीनों यंत्र शयन कक्ष में ईशान कोण। 

_5. समय:_ गुप्त नवरात्रि, दीपावली, होली – 3 रात जागरण। _4 ग्रह = 4 प्रहर_। 

_6. परिक्रमा:_ पत्नी संग 7 बार पीपल परिक्रमा, जल चढ़ाना। _7H = 7 परिक्रमा = 7 जन्म साथ_।

 

_5 लाभ:_ 

_लाभ 1: कलह स्तंभन_ – 21 दिन में गाली बंद, बातचीत शुरू। 

_लाभ 2: कोर्ट विजय_ – तलाक केस खारिज, घर वापसी। 

_लाभ 3: पर-स्त्री बाधा नाश_ – तीसरा व्यक्ति खुद हट जाए। 

_लाभ 4: शय्या सुख_ – 3 माह में अलगाव खत्म, एक कमरा। 

_लाभ 5: संतान रक्षा_ – टूटे घर का असर बच्चे पर न हो।

 

_स्तोत्र: श्री बजरंग बाण – दाम्पत्य-रक्षा ब्रह्मास्त्र_ 

_रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास | विशेष: कलत्र-कलह नाशक_ 

 

_मुख्य श्लोक:_ 

`सत्य होहु हरि शपथ पायके। राम दूत धरु मारु जायके॥ 

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होइ दुख करहु निपाता॥ 

जै गिरिधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर॥` 

_हिंदी अर्थ:_ हरि शपथ खाकर सत्य होओ, रामदूत मारने जाओ। लक्ष्मण प्राण दाता की जय, आतुर होकर दुख निपात करो। गिरिधर की जय, सुख सागर की जय, देव समूह समर्थ वीर नागर। 

 

_विधि विवाह हेतु:_ 

_1. पाठ:_ मंगल+शनि 11 बार बजरंग बाण। _मंगल-शनि 7H = दोनों वार_। 

_2. संकल्प:_ “दाम्पत्य-कलह-नाशार्थं, विवाह-रक्षार्थं”। 

_3. लड्डू:_ 4 लड्डू = 4 ग्रह। हनुमान को भोग, प्रसाद दोनों खाएँ। 

_4. सिंदूर:_ पत्नी की माँग में हनुमान के पैर का सिंदूर। _सुहाग अमर_। 

_5. लंका दहन:_ दशहरा पर 4 दीपक = 4 ग्रह जलाओ।

 

_लाभ:_ बजरंग बाण = ब्रह्मास्त्र। 4 ग्रह मिलकर भी हनुमान के आगे जीरो। _11 दिन में चमत्कार_।

 

_हे दाम्पत्य-योद्धा, सप्तम के 4 ग्रह “चौसर” हैं:_ 

_राहु = शकुनि, मंगल = दुर्योधन, शनि = दु:शासन, गुरु = धृतराष्ट्र।_ 

_तुम द्रौपदी हो – चीर हरण तय है।_ 

_बचाएगा कौन? कृष्ण = उमा-महेश्वर + हनुमान।_

 

_1. राहु भ्रम है – शक होगा कि पार्टनर चीट कर रहा।_ 90% झूठ। _चेक करने से पहले चेकअप कराओ – कुंडली का।_ 

_2. मंगल आग है – छोटी बात पर हाथ उठेगा।_ हाथ उठाने से पहले हनुमान चालीसा पढ़ो – हाथ पूजा में लगेगा। 

_3. शनि बर्फ है – महीनों बात न करना, ठंडा युद्ध।_ बर्फ पिघलाओ – गर्म चाय पिलाओ, सॉरी बोलो। 

_4. गुरु पंडित है – पर नशे में है।_ नशा = राहु। _पंडित को नशा मुक्त करो – विष्णु सहस्रनाम।_

 

_विवाह बचाने के 4 ब्रह्म-सूत्र:_ 

_1. 7H में 4 ग्रह = 4 शादी का योग।_ पर 4 शादी से अच्छा 1 शादी 4 बार बचाओ। _हर तलाक = 7 जन्म बिगड़े।_ 

_2. पत्नी को पीहर भेजो 7 दिन हर 7 महीने।_ 7H का अंक 7। दूरी = इज्जत। रोज का साथ = रोज की किरकिरी। 

_3. बेडरूम में लड़ाई मत करो।_ 7H = बेडरूम। बेडरूम कुरुक्षेत्र बना तो सोओगे कहाँ? _बाहर लड़ो, बेडरूम में सुलह।_ 

_4. संतान के सामने कभी मत लड़ो।_ 7H से 5H नवम = भाग्य। _माँ-बाप लड़े तो बच्चे का भाग्य फूटे।_

 

_अंतिम रामबाण:_ 

_सप्तम में 4 पाप = तुम्हारे पिछले जन्म के 4 श्राप।_ 

_काटने के 4 तरीके: 1. कन्यादान, 2. गौदान, 3. विद्यादान, 4. औषधि दान।_ 

_हर साल 1 दान = 4 साल में 4 ग्रह शांत।_ 

 

_और सुनो – गुरु 7H में है तो भीख माँग लो:_ 

_”हे पार्वती पति हर हर शम्भो, पाही पाही दाम्पत्य भंगात्”।_ 

_शिव ने कामदेव जला दिया, तुम्हारा कलह क्या चीज है।_ 

 

_डरो मत – सीता राम के पास 14 साल वनवास था, फिर भी साथ।_ 

_तुम्हारे पास तो AC वाला घर है।_ 

_अहंकार छोड़ो, स्वीकार करो, प्यार करो।_ 

_4 ग्रह हार जाएँगे, 7 वचन जीत जाएँगे।_

 

_जय श्री राम  जय गौरी-शंकर

 जय बजरंगबली _ 

_ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं उमा-महेश्वराभ्यां नमः। ॐ हं हनुमते नमः_

_नोट: यह घोर कलत्र दोष है। अनुभवी ज्योतिषी से कुंडली मिलान + उपाय + काउंसलिंग तीनों लो। कानून का सम्मान करो। हिंसा अपराध है। शिव-शक्ति कृपा से सब मंगल होगा।_

राहु लग्न में = “माया-निष्ठा योग” = वफादारी का श्राप + वरदान

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