
1: जातक पारिजात 11.16_
`त्रिकोणकेन्द्रे यदि लग्ननाथे शुभान्विते शोभन वीक्षिते वा। शुभग्रहागारगते बलाढये चतुःसमुद्रान्त यशः समेति॥`
_हिंदी:_ यदि लग्नेश केंद्र त्रिकोण में हो, शुभ ग्रह से युत दृष्ट हो, बलवान हो, तो व्यक्ति चारों समुद्र पर्यंत यशस्वी होता है।
_फलादेश:_ लग्नेश बली आत्मबल स्वास्थ्य निर्णय शक्ति । IAS, IPS, मंत्री, CMD बनने के लिए पहला नियम।
2: बृहत्पाराशर 20.4_
`दशमेशो नवमेशश्च यदा केन्द्र त्रिकोणगौ। धर्म कर्माधिपत्याख्यो योगोऽयं राजपूजितः॥`
_हिंदी:_ दशमेश और नवमेश जब केंद्र त्रिकोण में हों, यह धर्म कर्म अधिपति योग राजपूजित होता है।
_फलादेश:_ धर्म भाग्य, कर्म काम। दोनों मिले पिता का आशीर्वाद खुद की मेहनत दिल्ली की कुर्सी ।
3: सारावली 34.12_
`लग्नेशो दशमे भावे दशमेशोऽपि लग्नगः। सूर्य गुरु युते दृष्टे राजयोगो न संशयः॥`
_हिंदी:_ लग्नेश 10H में, 10L लग्न में, सूर्य गुरु से युत दृष्ट हो तो राजयोग निःसंदेह।
_फलादेश:_ जनता का सेवक सरकार का अधिकारी ।
4: फलदीपिका 6.18_
`कर्मेशे बलसंयुक्ते स्वोच्चे मित्र गृहेऽपि वा। लग्नेशेन युते दृष्टे राजा वा तत्समो भवेत्॥`
_हिंदी:_ कर्मेश बली, उच्च मित्र गृही, लग्नेश से युत दृष्ट हो तो राजा या राजा तुल्य हो।
_फलादेश:_ 10H में सूर्य दिग्बली राजा। मंगल दिग्बली सेनापति। शनि दिग्बली जनता का नेता।
5: उत्तरकालामृत 4.57_
`षष्ठेशो बलवान् केन्द्रे क्रूर ग्रह समन्वितः। रिपु जेताऽरि हन्ता च स्पर्धायां विजयी भवेत्॥`
_हिंदी:_ षष्ठेश बली केंद्र में क्रूर ग्रह युत हो तो शत्रु जेता, अरि हन्ता, स्पर्धा में विजयी हो।
_फलादेश:_ UPSC, कोर्ट, चुनाव, ऑफिस पॉलिटिक्स हर युद्ध में जीत । 6H निर्बल केस हारो, चुनाव हारो।
`दशम नवम के स्वामि जब, केन्द्र त्रिकोण मंझार।
धर्म कर्म मिल एक हों, राजयोग सुख सार॥
लग्नेश बली दशम गृह, सूर्य गुरु बल पाय।
अधिकारी सो होय नर, यश चारों दिश जाय॥`
:_ दशम नवम के स्वामी जब केंद्र त्रिकोण मंझार हों, धर्म कर्म मिल एक हों तो राजयोग सुख सार। लग्नेश बली दशम गृह में, सूर्य गुरु बल पाय तो अधिकारी सो होय नर, यश चारों दिश जाय।
`सूर्य बली दशम भाव में, मंगल दे प्रताप।
गुरु दृष्टि जब पड़त है, मिटत सकल संताप॥`
:_ सूर्य बली दशम भाव में हो, मंगल प्रताप दे, गुरु दृष्टि जब पड़त है तो सकल संताप मिटत है।
लग्नेश (Ascendant Lord): यह आपकी शारीरिक ऊर्जा, निर्णय लेने की क्षमता और आपके व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है। राजयोग के फलित होने के लिए लग्नेश का बली होना अनिवार्य है।
नवम भाव (9th House): इसे ‘भाग्य स्थान’ कहा जाता है। यह उच्च शिक्षा, लंबी यात्राओं और दैवीय कृपा का भाव है।
दशम भाव (10th House): इसे ‘कर्म स्थान’ कहा जाता है। यह करियर, शासन, सत्ता, राजनीति और पिता का भाव है।
धर्म-कर्माधिपति योग: यदि नवमेश (नवम भाव का स्वामी) और दशमेश (दशम भाव का स्वामी) एक साथ बैठे हों या एक-दूसरे को देख रहे हों। यह सरकारी नौकरी के लिए सबसे प्रबल योग है।
लग्नेश का संबंध: यदि लग्नेश दशम भाव में हो या दशमेश के साथ युति बना रहा हो, तो व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से बड़ा नाम कमाता है।
उच्च के ग्रह: यदि सूर्य या मंगल दशम भाव में बली होकर स्थित हों, तो ‘कुलदीपक योग’ बनता है, जो शासन प्रशासन में उच्चाधिकारी (IAS/IPS) बनाता है।
1: मेष लग्न लग्नेश मंगल 10H दिग्बली 10L शनि 10H शश 9L गुरु 9H हंस सूर्य 1H = “प्रशासन शिखर योग” _
_वर्णन:_ लग्नेश 10H दिग्बली रुचक, 10L 9L 10H शश योग धर्म कर्म योग, सूर्य लग्न। _घटना:_ 22 वर्ष में IPS, 35 वर्ष में IG, 50 वर्ष में DGP गृह सचिव। _पिता भी अधिकारी, बेटा भी_। PM ऑफिस से सीधा फोन। _शत्रु सामने न टिके_।
2: सिंह लग्न लग्नेश सूर्य 10H दिग्बली 10L शुक्र 11H मालव्य 9L मंगल 10H बुधादित्य 10H = “राजनीति राजयोग” _
_वर्णन:_ लग्नेश 10H दिग्बली, 10L 11H मालव्य, मंगल दिग्बली, बुधादित्य। _घटना:_ 28 वर्ष में पार्षद, 35 वर्ष में विधायक, 45 वर्ष में मंत्री, 55 वर्ष में CM। _भाषण से जनता वश में_। बुधादित्य नीति रणनीति। _विपक्ष 0_।
3: धनु लग्न 9L सूर्य 10H 10L बुध 10H बुधादित्य गुरु 1H हंस मंगल 6H = “धर्म कर्म शत्रु हंता योग” 🏹_
_वर्णन:_ धर्म कर्म स्वामी 10H बुधादित्य, गुरु लग्न हंस, मंगल 6H। _घटना:_ आर्मी ज कलेक्टर। _धर्म से कर्म, कर्म से यश_। कोर्ट में सत्य की जीत। _शत्रु केस करे तो खुद फंसे_। जनता बोले “न्यायमूर्ति”।
4: कर्क लग्न लग्नेश चंद्र 9H 10L मंगल 10H रुचक 9L गुरु 1H हंस शनि 6H = “जन सेवक राजयोग” _
_वर्णन:_ लग्नेश 9H भाग्य में, 10L 10H रुचक, गुरु 1H हंस, शनि 6H। _घटना:_ DM कलेक्टर, जनता प्रिय। _गरीब के लिए लड़ो, सरकार से पद पाओ_। 3 महापुरुष योग इतिहास। _गांव का नाम आपके नाम_।
5: मकर लग्न 10L शुक्र 10H 9L बुध 10H शनि 1H शश मंगल 10H नीच भंग = “नीच भंग राजयोग” _
_वर्णन:_ 10L 9L 10H, शनि लग्न शश, मंगल नीच भंग। _घटना:_ पहले चपरासी, क्लर्क, सस्पेंशन, केस। _40 वर्ष बाद अचानक IAS, सचिव, राज्यपाल_। नीच का ग्रह उच्च का फल। _संघर्ष का सिकंदर_।
_1. केवलं ग्रहनक्षत्रं न करोति शुभाशुभम्:_ _सच:_ कुंडली में 5 राजयोग हो पर 10वीं फेल, आलसी, घूसखोर हो तो चपरासी भी न बनो। _कर्म प्रधान_।
_2. लग्नेश बली आधी कुंडली बली:_ _सच:_ UPSC टॉप 100 में 90 प्रतिशत का लग्नेश केंद्र त्रिकोण बली। कमजोर लग्नेश इंटरव्यू में नर्वस, डिसीजन फेल।
_3. 10H में पाप ग्रह भी शुभ:_ _सच:_ सूर्य मंगल शनि राहु 10H दिग्बली पुलिस, सेना, राजनीति, प्रशासन। शुभ शुक्र गुरु सलाहकार, टीचर।
_4. 6H बली कॉम्पिटिशन विजय:_ _सच:_ षष्ठेश 3 6 10 11 या मंगल शनि 6H UPSC प्रीलिम्स मेन्स इंटरव्यू क्लियर। निर्बल 6H 1 2 नंबर से बाहर।
_5. बुध आदित्य बुद्धि तेज:_ _सच:_ 95 प्रतिशत सचिव CEO के 10H 11H में बुधादित्य। फाइल पढ़ते ही साइन।
_6. शनि 10H जनता का सेवक:_ _सच:_ DM, लेबर अफसर, रेलवे, नगर निगम। परिश्रम ज्यादा, क्रेडिट कम, पर जनता का मसीहा।
_7. योग भंग 9L 10L 6 8 12 में:_ _सच:_ राजयोग होकर भी दशमेश 8H में पिता की नौकरी छूटे, खुद को कोर्ट कचहरी। पहले भाव बल देखो।
_नाम: श्री आदित्य हृदय स्तोत्र सूर्य अर्घ्य_
_ वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड, सर्ग 105, श्लोक 1 से 31_
_श्लोक:_
`आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपेन्नित्यं अक्षय्यं परमं शिवम्॥`
`नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः। ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥`
आदित्य हृदय पुण्य देने वाला, सर्व शत्रु विनाशक, जय देने वाला है। नित्य जपने से अक्षय परम कल्याण होता है।
पूर्व पर्वत को नमस्कार, पश्चिम पर्वत को नमस्कार, ज्योतिर्गणों के पति, दिन के अधिपति को नमस्कार।
_व्याख्या:_ सूर्य आत्मा, पिता, राजा, सरकार, 10H कारक। _आदित्य हृदय सूर्य का हृदय सूर्य को वश में करना_। राम जी ने रावण युद्ध से पहले जपा, विजय पाई। _10H के शत्रु प्रतियोगी, कोर्ट, बॉस, नेता स्तम्भित_।
_दैनिक वैदिक उपाय:_
मंत्र: `ॐ घृणिः सूर्याय नमः` 7 बार अर्घ्य देते समय।
_लाभ 1: जयावहं हर प्रतियोगिता में जीत _
_व्याख्या:_ UPSC, इंटरव्यू, चुनाव, कोर्ट केस, टेंडर विजय। रावण जैसे शत्रु भी हारे। _आपके आगे प्रतिद्वंद्वी 0_।
_लाभ 2: सर्वशत्रुविनाशनम् ऑफिस पॉलिटिक्स खत्म _
_व्याख्या:_ बॉस, सहकर्मी, नेता जो टांग खींचे जुबान बंद, ट्रांसफर, सस्पेंड। आपकी फाइल बिना रुकावट पास।
_लाभ 3: अक्षय्यं परमं शिवम् नौकरी अक्षय _
_व्याख्या:_ सरकारी नौकरी परमानेंट। _छंटनी, सस्पेंशन, CBI जांच से बचाव_। प्रमोशन समय पर। _पेंशन पक्की_।
_लाभ 4: तेजस् वृद्धि बॉस मंत्री इंप्रेस _
_व्याख्या:_ Aura में सूर्य तेज। _इंटरव्यू बोर्ड बोले Select_। मंत्री सीधा फोन उठाए। _मीडिया में नाम_।
_लाभ 5: राज मान सरकार से सम्मान _
_व्याख्या:_ सूर्य राजा। _सरकारी अवॉर्ड, पद्म श्री, राज्यपाल से मेडल_। DM से CM तक पहुंच। _लाल बत्ती पक्की_।
_समय: 11 दिन में आत्मबल बढ़े, 21 दिन में बॉस खुश, 43 दिन में प्रमोशन फाइल चले, 6 माह में ट्रांसफर मनचाही जगह, 1 साल में दिल्ली पोस्टिंग।
_नाम: श्री बगलामुखी शत्रु स्तम्भन सवा लक्ष पुरश्चरण 5 ब्राह्मण_
_शास्त्र प्रमाण: बगलामुखी रहस्य 3.14 मुण्डमाला तंत्र 8.22_
_अनुकूल विद्या: बगलामुखी षष्ठ भाव अधिष्ठात्री कोर्ट चुनाव प्रतियोगिता विजय दात्री_
_कुंडली अनुकूलता: 6L निर्बल, शनि मंगल 6H, कोर्ट केस, UPSC, चुनाव, शत्रु बाधा_
_मूल श्लोक:_
`ऋण शत्रु विवादे च कोर्ट कचहरी समागमे। बगला स्तम्भनं कुर्यात् विजयं लभते ध्रुवम्॥`
`ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥`
_हिंदी अनुवाद:_
ऋण शत्रु विवाद, कोर्ट कचहरी आने पर बगला स्तम्भन करे तो विजय ध्रुव पाए।
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टों की वाणी मुख पैर स्तम्भित कर, जिह्वा कीलित कर, बुद्धि नाश कर ह्लीं ॐ स्वाहा।
_व्याख्या:_ बगलामुखी वल्गा लगाम। _शत्रु की जुबान, कलम, फाइल, जज, वकील सब पर लगाम_। 6H की देवी कोर्ट, शत्रु, प्रतियोगिता की मालकिन। _ह्लीं बीज स्तम्भन Freeze_।
_ब्राह्मण द्वारा करने वाला उपाय:_
_विशेष आहुति:_ 1008 बार “शत्रुं स्तम्भय स्वाहा”। 108 बार कोर्ट समन विरोधी का नाम। _कागज जलाओ, शत्रु जलाओ_।
_5 लाभ:_
_लाभ 1: वाचं मुखं पदं स्तम्भय शत्रु गूंगा लंगड़ा _
_व्याख्या:_ वाचं स्तम्भय कोर्ट में वकील बहस भूल जाए। मुखं झूठा गवाह मुंह न खोले। पदं विरोधी जज के पास जाए न। _तारीख पर तारीख आपको मिले, शत्रु को सजा_।
_लाभ 2: जिव्हां कीलय ऑफिस पॉलिटिक्स खत्म _
_व्याख्या:_ बॉस के कान भरने वाला, चुगली करने वाला जुबान में कील। ट्रांसफर हो जाए या चुप हो जाए। _आपका प्रमोशन कोई न रोके_।
_लाभ 3: बुद्धिं विनाशय प्रतियोगी फेल _
_व्याख्या:_ UPSC चुनाव में सामने वाला OMR गलत भरे, भाषण भूल जाए, नामांकन रद्द। आपकी बुद्धि तेज, उसकी नष्ट। _रैंक 1 पक्की_।
_लाभ 4: कोर्ट कचहरी विजय जज आपके फेवर _
_व्याख्या:_ 6H कोर्ट। बगलामुखी 6H की मालकिन। _जज को सपने में आदेश आपके हक में फैसला_। 498A, 138 NI, जमीन केस डिसमिस। _उल्टा शत्रु पर केस, 10 करोड़ मानहानि_।
_लाभ 5: राज दण्ड भय नाश CBI ED से अभय _
_व्याख्या:_ सरकारी जांच राज दण्ड। _ह्लीं बीज स्तम्भन फाइल दब जाए_। रेड पड़े तो कुछ न मिले। _क्लीन चिट मिले, प्रमोशन मिले_।
_समय: 21 दिन में शत्रु बीमार ट्रांसफर, 43 दिन में केस खत्म, 90 दिन में UPSC क्लियर, 6 माह में चुनाव जीत, 1 साल में सचिव मंत्री।_
ग्रह केवल सूचक हैं, फलदाता कर्म हैं_ `केवलं ग्रहनक्षत्रं न करोति शुभाशुभम्। सर्वमात्मकृतं कर्म लोकवादो ग्रहा इति॥` _महाभारत_
_योग तभी फल देता है जब लग्न चंद्र सूर्य बली हों_ खाली धर्म कर्म योग की किताब लेकर घूमने से कलेक्टर नहीं बनते। _कर्म उपाय समय फल_।
_दशम भाव कर्म। नवम भाव भाग्य।_ भाग्य बिना कर्म लंगड़ा, कर्म बिना भाग्य अंधा। _दोनों मिलें राजयोग_। नवमेश दशमेश युति _पिता का आशीर्वाद खुद की मेहनत दिल्ली की कुर्सी_ ।
_वैदिक उपाय नींव। तांत्रिक उपाय बिल्डिंग।_ नींव बिना बिल्डिंग गिरे, बिल्डिंग बिना नींव बेकार। _आदित्य हृदय नित्य करो नींव मजबूत। बगलामुखी 1 बार ब्राह्मण से कराओ बिल्डिंग 10 मंजिल_।
_कंजूसी सबसे बड़ा शनि दोष_ कोचिंग को 2 लाख दोगे, रिजल्ट 0। _वेद तंत्र में 2 लाख लगाओ, 2 करोड़ की नौकरी व्यापार पाओ_। हिसाब साफ।
_कलियुग में शत्रु ही शत्रु है_ ऑफिस, कोर्ट, चुनाव, व्यापार हर जगह युद्ध। _6H बली न हो तो हार पक्की_। आदित्य हृदय कवच। बगलामुखी तलवार। _कवच पहनो, तलवार चलाओ विजय पक्की_।
_सार: लग्नेश बली करो स्वास्थ्य आत्मबल। दशमेश बली करो कर्म यश। षष्ठेश बली करो शत्रु विजय।_
_सूर्य अर्घ्य दो राजा खुश। बगलामुखी जपो शत्रु खामोश।_
_फिर न ट्रांसफर का डर, न सस्पेंशन का डर, न चुनाव हारने का डर।_
_केवल प्रमोशन ही प्रमोशन, इलेक्शन ही इलेक्शन, सेलेक्शन ही सेलेक्शन।_