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मूर्खता और पागलपन

एक आदमी की गाड़ी का टायर ठीक एक मानसिक अस्पताल के सामने पंचर हो गया। सड़क के किनारे गाड़ी पार्क करते समय उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी। उसने गाड़ी की डिक्की खोली, जैक निकाला, स्टेपनी (स्पेयर व्हील) और व्हील स्पैनर बाहर निकाले।

पंचर हुए टायर को निकालने के लिए उसने चारों नट खोल दिए। लेकिन दुर्भाग्य से, वे चारों नट लुढ़कते हुए सीधे नाली में गिर गए। नाली का ढक्कन खोला नहीं जा सकता था और नट पानी में गायब हो चुके थे।

वह आदमी हताश होकर इधर-उधर देखने लगा और आखिरकार निराश होकर फुटपाथ पर बैठ गया।

अस्पताल का एक मरीज यह सब शुरू से देख रहा था। वह जोर से बोला,
“अरे मूर्ख! क्या कर रहे हो वहां?” 🤔

आदमी ने जवाब दिया,
“भाई, मत पूछो। टायर पंचर हो गया और चक्का बदलते समय चारों नट नाली में गिर गए।” 🥴

वह मरीज तुरंत बोला,
“अरे, तुम बात को बेवजह मुश्किल बना रहे हो! यह तो बहुत आसान है। बाकी तीनों पहियों में से एक-एक नट निकाल लो, इससे हर पहिए में तीन-तीन नट रह जाएंगे। नजदीकी पेट्रोल पंप या टायर रिपेयर की दुकान तक जाने के लिए इतना काफी है!”

उस आदमी ने वैसा ही किया जैसा मरीज ने कहा था और खुश होकर उससे पूछा,
“वाह! फिर तुम इस मानसिक अस्पताल में क्या कर रहे हो?”

मरीज का जवाब सच में लेजेंडरी था—

“दोस्त, हम यहां ‘पागलपन’ की वजह से हैं, ‘मूर्खता’ की वजह से नहीं!
पागलपन एक अलग चीज है…
और मूर्खता बिल्कुल अलग।
पागलपन का इलाज हो सकता है, लेकिन मूर्खता का नहीं!”

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