
भारतीय ज्योतिष शास्त्र केवल भविष्य जानने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने और समस्याओं का समाधान पाने का एक दिव्य विज्ञान है। इसी परंपरा में एक अत्यंत रहस्यमयी और प्रभावशाली विधा है “अष्टमंगलम प्रश्नम्”, जिसे सामान्यतः काउड़ी ज्योतिष (Kaudi Jyotish) या प्रश्न कुंडली के नाम से जाना जाता है।
यह विधा विशेष रूप से तब उपयोगी होती है जब किसी व्यक्ति के पास जन्म कुंडली उपलब्ध न हो, या वह किसी विशेष प्रश्न का तुरंत और सटीक उत्तर जानना चाहता हो। काउड़ी (शंख जैसे छोटे खोल) के माध्यम से देव संकेतों को समझकर जो फलादेश किया जाता है, वह अत्यंत सटीक और प्रभावशाली माना जाता है।
आज के समय में, जहां जीवन में अनिश्चितता और समस्याएं बढ़ रही हैं, वहां इस प्रकार की दैविक विधाओं का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इसी उद्देश्य से Sshree Astro Vastu द्वारा एक विशेष 2-दिवसीय कार्यशाला (Workshop) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें इस प्राचीन और गूढ़ विद्या को सरल और व्यावहारिक रूप में सिखाया जाएगा।
क्या है अष्टमंगलम प्रश्नम्?
अष्टमंगलम प्रश्नम्, केरल की प्राचीन ज्योतिषीय परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसमें 8 मंगल वस्तुओं (जैसे चावल, दीपक, दर्पण, फल आदि) का उपयोग कर देवताओं से संकेत प्राप्त किए जाते हैं। काउड़ियों को विशेष विधि से बिछाकर और उनकी स्थिति को देखकर ज्योतिषी प्रश्न का उत्तर निकालता है।
यह केवल गणना नहीं, बल्कि दैविक संकेतों को समझने की कला है। मंदिरों में भी इस विधि का उपयोग देव क्रोध, दोष, बाधा या किसी अदृश्य समस्या को जानने के लिए किया जाता है।
काउड़ी ज्योतिष / प्रश्न कुंडली की विशेषता
काउड़ी ज्योतिष का आधार “प्रश्न का समय” होता है।
जिस क्षण प्रश्न पूछा जाता है, उसी समय की ऊर्जा और ग्रह स्थिति के आधार पर उत्तर दिया जाता है। इसे Horary Astrology (प्रश्न ज्योतिष) भी कहा जाता है।
इस विधा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि:
कार्यशाला का उद्देश्य
इस 2-दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है:
यह कोर्स विशेष रूप से उन लोगों के लिए है:
केरलीय ज्योतिषीय कक्षा का पाठ्यक्रम
इस कार्यशाला में आपको केरल ज्योतिष की गहराई से जानकारी दी जाएगी। पाठ्यक्रम को इस प्रकार तैयार किया गया है कि आप 2 दिनों में एक मजबूत आधार बना सकें।
केरल पद्धति की सबसे बड़ी विशेषता है — प्रश्न कुंडली।
जिस समय प्रश्न पूछा जाता है, उसी क्षण की कुंडली बनाकर उत्तर दिया जाता है।
इसे “देवप्रश्न” भी कहा जाता है।
यह एक दैविक विधि है जिसमें 8 मंगल द्रव्यों (चावल, दीप, दर्पण आदि) का उपयोग कर देव संकेतों से फलादेश किया जाता है।
मंदिरों में दोष, देव क्रोध, बाधा आदि जानने के लिए प्रयुक्त।
केरल ज्योतिष में केवल जन्म लग्न ही नहीं देखा जाता, बल्कि:
का अत्यंत सूक्ष्म विश्लेषण किया जाता है, जिससे परिणाम और अधिक सटीक बनते हैं।
इस पद्धति में मुख्यतः:
का प्रयोग किया जाता है, परंतु फलादेश में ग्रह की भावगत शक्ति और दृष्टि बल को विशेष महत्व दिया जाता है।
केरल परंपरा में ग्रहों की शक्ति (षड्बल) का गणितीय विश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसी के आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन सा ग्रह कितना प्रभाव डाल रहा है।
इस पद्धति के माध्यम से:
का अत्यंत सटीक विश्लेषण किया जाता है।
केरल ज्योतिष केवल भविष्य बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपाय प्रधान प्रणाली है।
इसमें:
के माध्यम से जीवन में संतुलन स्थापित किया जाता है।
आपको इस कोर्स से क्या मिलेगा?
इस कार्यशाला के बाद आप:
कार्यशाला की विशेषताएं
अष्टमंगलम प्रश्नम् और काउड़ी ज्योतिष केवल एक विद्या नहीं, बल्कि दैविक ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम है। यह हमें सिखाता है कि हर प्रश्न का उत्तर ब्रह्मांड में पहले से मौजूद है, बस उसे सही विधि से समझने की आवश्यकता है।
यदि आप भी इस प्राचीन और प्रभावशाली विद्या को सीखकर अपने जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं, या दूसरों की सहायता करना चाहते हैं, तो यह कार्यशाला आपके लिए एक सुनहरा अवसर है।
1 और 2 मई को आयोजित इस विशेष कोर्स में शामिल होकर आप ज्योतिष के एक नए आयाम को जान पाएंगे।
Date : 1st And 2nd May 2026
Time: 13:00 To 17:00