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विभीषण सज्जन होकर भी अपनी बहन शूर्पणखा को धर्म मार्ग पर नहीं ला सके।

रामचरितमानस के सुंदरकांड की यह चौपाई तब आती है जब हनुमान जी लंका में प्रवेश करते हैं।

“लंका निसिचर निकर निवासा। इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा॥

  अर्थ : “लंका तो राक्षसों के समूह का निवास स्थान है, फिर यहाँ सज्जन का निवास कहाँ से है ?”

हनुमान जी मन में यह तर्क कर ही रहे थे कि तभी विभीषण जी जाग गए, जो राक्षस वंश में होकर भी राम भक्त थे।

 

विभीषण सज्जन थे, बावजूद इसके वो अपनी सगी बहन शूर्पणखा को धर्म मार्ग पर नहीं ला सके।

 

शूर्पणखा काम-वासना और अनियंत्रित इच्छा का प्रतीक है….

किंतु विभीषण धर्म, सत्य तथा आसक्ति मुक्त जीवन के प्रतीक हैं ।

शूर्पणखा काम-वासना में इतनी आतुर थी कि पंचवटी में राम को देखकर वह वासना से अभिभूत हो गई और विवाह का प्रस्ताव रखा।

शूर्पणखा का कामवासना की अग्नि इतने चरम बिंदु पर था राम द्वारा अस्वीकार किए जाने पर, वह लक्ष्मण के पास गई ।

लक्ष्मण के अस्वीकार करने पर और फिर सीता पर हमला करने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी।

 

सूर्पनखा और विभीषण का चरित्र हमें यह शिक्षा देता है कि भले ही भाई सज्जन हो, जीव प्रेमी हो तो ये जरूरी नहीं हो की वो अपनी सगी बहन को भी सदमार्ग पर ला सके।

 

रामायण के अनुसार, शूर्पणखा ने भी दानव  विद्युतजिह्वा से प्रेमविवाह किया था।

 

भाई गौ रक्षक है ।

लेकिन बहन क्या है . सूअरी….???

जो भाई नाले में गिरी गाय बचाता था अपनी बहन को गटर में गिरते हुए देख रहा है बचा नहीं पाया…।

 

जानते हैं क्यों? क्योंकि गाय मर्जी से नाले में नहीं गिरती है न फंसती है….

लेकिन उसे पता है कि बहन ने खुद सुअरिया बनना चुना है मर्जी से !

इसलिए यदि धर्म मार्ग पर चलना है तो घर का त्याग कीजिए जिसे  विभीषण ने किया था !

अथवा कुल में ही रहना है तो पहले अपनी बहन को सुधारिए…।

 

आपकी बहन, बेटी की दोस्ती यारी सब पर नज़र रखिए

वरना आप गाय बचाते रह जाएंगे और आपकी बहन गाय खाने वाले के साथ आपके मुंह पर थूक कर चली जाएगी.!

 

 

 घुमाने के बहाने हिंदू लड़कियों को रिसॉर्ट ले जाने का था प्लान, फिर किया जाता रेप: TCS कांड में SIT जाँच से खुल रहीं साजिश की पर्तें

TCS में कार्पोरेट जिहाद

 

TCS में कार्पोरेट जिहाद

महाराष्ट्र के नासिक में TCS के दफ्तर में हिंदू महिलाओं के यौन शोषण और जबरन धर्म परिवर्तन की कोशिश का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। इस केस की जाँच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को एक पूर्व कर्मचारी से अहम जानकारी मिली है। इसके बाद जाँच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।

 

‘आज तक’ की रिपोर्ट के मुताबिक, SIT को यह भी जानकारी मिली है कि आरोपित लड़कियों को बाहर घुमाने के बहाने रिसॉर्ट ले जाने की योजना बनाते थे, जहाँ उनके साथ रेप करने का प्लान था। चूँकि आरोपी एक ही इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं और इसलिए यह शक भी जताया जा रहा है कि उन्होंने कंपनी के अंदर एक संगठित नेटवर्क बना लिया था।

 

जाँच में पता चला है कि आरोपित सिर्फ ऑफिस टाइम में ही नहीं बल्कि काम खत्म होने के बाद भी कंपनी के अंदर रुकते थे और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहते थे। SIT को शक है कि मुख्य आरोपी साल 2022 से ही कंपनी के अंदर कट्टरपंथी सोच फैलाने और एक खास धर्म को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा था।

 

एक पूर्व कर्मचारी ने SIT को बताया कि आरोपी लोग ऑफिस के बाद भी कंपनी में रुककर अपने इरादों को अंजाम देने के लिए तरह-तरह की गतिविधियाँ करते थे। इस जानकारी के बाद जाँच एजेंसी अब और गहराई से पूरे नेटवर्क की जाँच कर रही है।

 

जाँच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में खास तौर पर साड़ी पहनने वाली या भारतीय परंपराओं का पालन करने वाली लड़कियों को आसान टारगेट समझकर उन्हें फँसाया जाता था। इस्लामी कट्टरपंथियों ने इन युवतियों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है।

 

इस मामले में निदा खान नाम की एक महिला का नाम भी सामने आया है, जिसे इस पूरे मामले की अहम कड़ी माना जा रहा है। आरोप है कि वह नई लड़कियों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ती थी और फिर उन्हें अलग-अलग ग्रुप में शामिल कर उनसे दोस्ती बढ़ाई जाती थी।

 

शुरुआत में सामान्य बातचीत होती थी लेकिन धीरे-धीरे बातों का रुख धर्म से जुड़े मुद्दों की ओर मोड़ दिया जाता था। इसके बाद पीड़ितों के धर्म की आलोचना की जाती थी और दूसरे धर्म को बेहतर बताने की कोशिश की जाती थी।

 

यह भी आरोप है कि निदा खान लड़कियों को दूसरे धर्म के रीति-रिवाज अपनाने के लिए प्रेरित करती थी और उन्हें नमाज पढ़ने से लेकर खास तरह के कपड़े पहनने तक की जानकारी और ट्रेनिंग देती थी।

 

Agey aur hey

 

 “Corporate जिहाद”

 

कुछ समय पहले टाटा कंपनी के तनिष्क ब्रांड का एक ऐड आया था जिसमें एक हिंदू महिला जिसकी शादी एक मुस्लिम से हुई है, उसका मुस्लिम परिवार हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की रस्में करवाता हुआ दिखाया गया है।

 

हिंदू महिला अपनी मुस्लिम सास से पूछती है, “अगर यह रिवाज आपके यहां नहीं है, तो फिर यह क्यों है?” मुस्लिम सास कहती है, “यह तो हर जगह बेटियों को खुश रखने का रिवाज है!”

 

पिछले दो दशकों में कितने टीवी ऐड आए हैं/आएंगे जिनमें इस तरह का सॉफ्ट लव जिहाद या एकतरफा मुस्लिम तारीफ या तारीफ दिखाई गई हो और हिंदू नजरिए-दिमाग-सोच को कमजोर या मामूली दिखाया गया हो!

 

ऐसे ऐड या फिल्मों को हथियार बनाकर कई दशकों से जो बहसें खड़ी की गई हैं और की जा रही हैं, उनके कठोर और कड़वे नतीजे हिंदू समाज भुगत रहा है।

 

टाटा समेत सभी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों (चाहे भारत में हों या विदेश में) में ऊंचे पदों पर ऐसे लोग बैठे हैं जो हिंदू सोच, दिमाग और सोच के खिलाफ हैं। जो लोग इस बारे में ऐड देते हैं या बनाते हैं या पॉलिसी बनाते हैं, वे भी हिंदू विरोधी लेफ्टिस्ट हैं।

 

सोचिए कि TCS जैसी कंपनी के ऑफिस में मुस्लिम HR और कुछ मुस्लिम एम्प्लॉई जो कन्वर्जन और लव जिहाद का रैकेट चलाते हैं, वह चौंकाने वाला है। यह बात सामने आई है कि इस रैकेट में मुस्लिम महिला एम्प्लॉई भी शामिल हैं। ये लोग एक स्कीम के तहत हिंदुओं में से सिर्फ महिलाओं को भर्ती कर रहे थे और इन मुस्लिम पुरुष एम्प्लॉई और मुस्लिम महिला एम्प्लॉई ने एक ऑर्गनाइज्ड सिंडिकेट बनाकर इन हिंदू महिलाओं को फंसाया, उनका शोषण किया और उनका शोषण किया; यह सोचना भी चौंकाने वाला है। TCS में जो घटना हुई, वह “ऊन की गाड़ी में टांके” जैसी है!

 

यह सिर्फ TCS में ही नहीं बल्कि देश के सभी मेट्रोपोलिस में चल रहे सभी बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस की कहानी है। और ऐसे सॉफ्ट जिहादी ऐड या फिल्में हमारे कॉर्पोरेट हिंदू “मुर्गियों” जैसी महिलाओं का दिमाग खराब कर देती हैं और उन्हें आसानी से “हलाली” की ओर ले जाती हैं!

 

ऐसे प्रोपेगैंडा ऐड या फिल्में उन सूअरों (महिलाओं और पुरुषों) का दिमाग नहीं बदलतीं क्योंकि वे जानते हैं कि ये ऐड या फिल्में किसके लिए बनाई गई हैं!

 

अगर तुम नहीं जागे तो एकदिन तुम्हें बिना लड़े अब्दुल का मामा बनना पड़ेगा!

मैंने एक ट्रक के पीछे लिखा एक संदेश देखा, जिसने  झकझोर कर रख दिया !! “धीरे हॉर्न बजा रे पगले… हिंदू समाज सोया है…!!!

‘हिंदू’ शब्द की ऐतिहासिक उत्पत्ति और वास्तविक अर्थ

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