Sshree Astro Vastu

वाक सिद्धि योग

वाक सिद्धि योग में व्यक्ति के कहे हुए शब्द या विचार सिद्ध होते दिखाई देते हैं, यानी जो कहा वही घटित हो जाता है। जीवन में कभी कभी ऐसी घटनाएं सभी के साथ होती हैं, लेकिन जब यह क्रम लगातार बनने लगे तब कहा जा सकता है कि वाक सिद्धि सक्रिय हो गई है। #कुंडली में वाक सिद्धि योग होना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन वाक सिद्धि योग के भी अलग अलग प्रकार होते हैं। हर वाक सिद्धि योग कही हुई बात को अक्षरशः सत्य नहीं करता।

 

व्यवहारिक जीवन में ऐसे बहुत से लोग दिखते हैं जिनमें यह योग किसी न किसी रूप में कार्य करता है। कई बार व्यक्ति के कहे शब्दों के अलावा उसके अंदेशे या पूर्वानुमान भी सच हो जाते हैं। शेयर मार्केट, कमोडिटी, फिल्म, मूवी, शोबिज, राजनीति, जियोपॉलिटिक्स, यहां तक कि ज्योतिषी, संत, साधु, आध्यात्मिक नेता, मोटिवेशनल स्पीकर, शिक्षक और प्रोफेसर आदि में भी यह योग पाया जा सकता है। ये लोग अपने योग का उपयोग अलग अलग उद्देश्यों के लिए करते हैं। प्रायः ज्योतिषियों में यह योग पेशेवर रूप से स्पष्ट दिखाई देता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह खुलकर सार्वजनिक रूप से दिखे यह आवश्यक नहीं। आज के डिजिटल कंटेंट के युग में, जब विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से बोलते हैं, तब हम प्रत्यक्ष रूप से देख पाते हैं कि उनकी वाक सिद्धि कैसे कार्य कर रही है।

 

यह योग कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण यह देखना होता है कि योग का प्रयोग किस प्रकार और किस स्तर पर है। हर वाक सिद्धि योग को वास्तविक वाक सिद्धि नहीं कहा जा सकता, जब तक उसका संबंध किसी उच्च शक्ति या गहरे प्रभाव से न जुड़ा हो।

 

वाक सिद्धि योग क्या होता है

 

इसे समझने के लिए द्वितीय भाव को विशेष महत्व देना होता है। द्वितीय भाव विचारों और वाणी दोनों से जुड़ा होता है। सामान्य रूप से यदि द्वितीय भाव पर राहु का प्रभाव हो और साथ में चंद्र तथा शनि का प्रभाव भी जुड़ जाए, तो व्यक्ति अपने कंटेंट, भाषण या कथन के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त करता है। इसके अतिरिक्त अष्टम भाव, जो गुप्त रहस्य और गहन विषयों का भाव है, उसके प्रभाव से भी वाक सिद्धि की तीव्रता बढ़ जाती है।

 

अतः द्वितीय भाव, अष्टम भाव और राहु के प्रभाव को विशेष रूप से देखना आवश्यक होता है। इन भावों और ग्रहों से जैसा प्रभाव बनता है, उसी प्रकार की वाक्सिद्धि व्यक्ति के जीवन में प्रकट होती है। उदाहरण के लिए यदि राहु दशम भाव में हो तो वाक सिद्धि का प्रभाव करियर और सार्वजनिक जीवन में अधिक दिखाई देता है। यदि अष्टम भाव का स्वामी द्वितीय भाव में आ जाए तो व्यक्ति को कंटेंट, वाणी और वाक सिद्धि में अतिरिक्त बल मिलता है। ऐसा योग पारिवारिक स्तर से जुड़ी वाक सिद्धि भी दे सकता है।

 

यदि केतु द्वितीय भाव में हो तो व्यक्ति अपनी वाक सिद्धि से स्वयं को या दूसरों को भ्रमित भी करता है। शुक्र के प्रभाव से वाक सिद्धि का प्रयोग प्रायः विपरीत लिंग, विलासिता और भौतिक विषयों में होता है। शनि के प्रभाव से कानून, न्याय व्यवस्था, सरकारी तंत्र या किसी भी प्रकार की संगठित प्रणाली से जुड़ी वाक सिद्धि मिलती है। बुध के प्रभाव से शेयर मार्केट, लॉटरी, कमोडिटी, स्पेकुलेशन, व्यापार संबंधी वाक सिद्धि विकसित होती है। मंगल के प्रभाव से सुरक्षा, साहसिक कार्य और विभिन्न प्रकार के औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी वाक सिद्धि होती है।

 

कोई भी योग अकेले पूर्ण परिणाम नहीं देता। कुंडली को समग्र रूप से देखना आवश्यक होता है। कई बार डिविजनल चार्ट का अध्ययन भी जरूरी होता है। वाक सिद्धि का विश्लेषण अपेक्षाकृत सूक्ष्म होता है, इसलिए ग्रहों और उनके प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझना और याद रखना आवश्यक होता है।

 

संक्षेप में वाक सिद्धि को समझें

 

वाक सिद्धि योग में व्यक्ति के कहे शब्द या विचार घटित होते दिखाई देते हैं, लेकिन इसका सक्रिय होना निरंतर घटनाओं से पहचाना जाता है।

 

कुंडली में वाक सिद्धि योग होना नकारात्मक नहीं है, इसके कई स्तर और प्रकार होते हैं।

 

हर वाक सिद्धि योग कही हुई हर बात को अक्षरशः सत्य नहीं करता।

 

द्वितीय भाव वाक सिद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, यह विचार और वाणी का भाव है।

 

राहु, चंद्र और शनि का प्रभाव द्वितीय भाव पर हो तो व्यक्ति अपने शब्दों या कंटेंट से प्रसिद्धि पा सकता है।

 

अष्टम भाव का प्रभाव वाक सिद्धि को गहराई और रहस्यमय शक्ति देता है।

 

राहु दशम भाव में हो तो वाक सिद्धि का प्रभाव करियर और सार्वजनिक जीवन में अधिक दिखता है।

 

अष्टम भाव का स्वामी द्वितीय भाव में हो तो कंटेंट और वाणी की शक्ति बढ़ जाती है।

 

केतु द्वितीय भाव में हो तो वाक सिद्धि से भ्रम या उलझन भी पैदा हो सकती है।

 

शुक्र से विपरीत लिंग, विलासिता और भौतिक विषयों में वाक सिद्धि मिलती है।

 

शनि से कानून, न्याय व्यवस्था और सिस्टम से जुड़ी वाक सिद्धि बनती है।

 

बुध से शेयर मार्केट, व्यापार और स्पेकुलेशन संबंधी वाक सिद्धि विकसित होती है।

 

मंगल से सुरक्षा, साहसिक और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी वाक सिद्धि मिलती है।

 

किसी एक योग के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए, पूरी कुंडली और डिविजनल चार्ट देखना आवश्यक है।

वाक् सिद्धि योग : वाणी की दिव्य शक्ति और उसका ज्योतिषीय स्वरूप

आप सभी लोगों से निवेदन है कि हमारी पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़कर फायदा मिले |
Share This Article
error: Content is protected !!
×