Sshree Astro Vastu

जब बलवान ग्रह भी बन जाते हैं कष्ट का कारण

जन्मकुंडली में जब कोई ग्रह बलवान होता है तो हम मानते हैं कि कुंडली में कोई ग्रह बलवान है तो वह अपना सर्वश्रेष्ठ फल देगा, हम सब ऐसा जानते और मानते हैं लेकिन अगर मैं ये कहूं कि नहीं जरूरी नहीं कि ग्रह बलवान है तो आपको खुश होने की आवश्यकता है क्योंकि ये ग्रह आपको बहुत कष्ट भी दे सकता है, आइए उदाहरण से समझते हैं :

  सप्तम भाव में यदि बहुत बलवान चन्द्रमा है तो स्त्री पुरुष दोनों के लिये कहा जायेगा कि आपके जीवन साथी को मानसिक रूप से ये अति अस्थिर कर देगा, फ़लतः आपका जो पार्टनर होगा वो बात बात पर रोने वाला हो सकता है।

 

जन्मकुंडली के तीसरे भाव में यदि बहुत बलवान देवगुरु बृहस्पति बैठ जाएं तो भाग्य पक्का देंगे पर ऐसा जातक शारीरिक रूप से महा आलसी हो जायेगा वो बैठे बैठे सिर्फ दूसरों को उपदेश देने का कार्य करेगा, कम शब्दों में कहें तो कर्महीन बन जायेगा।

क्यों?

जन्मकुंडली के तीसरे भाव से देवगुरु की दृष्टि सप्तम नवम और एकादश भाव पर होगी, अब भाग्य भाव और लाभ भाव पर गुरु की दृष्टि के कारण जातक की जो भी इच्छाएं होंगी वो आसानी से पूर्ण हो जायेंगी, अब जरा सोचकर देखिए कि आप वो वाले व्यक्ति हैं कि चले हल नहीं चले कुदारी, बैठे भोजन देहीं मुरारी वाली बात आपके साथ हो जाए तो आप क्या करेंगे? आप कर्महीन बन जायेंगे और बैठे बैठे दूसरों को उपदेश देने का काम करेंगे।

 

जन्मकुंडली के बारहवें भाव में शुक्र यदि बहुत बलवान हो जाएं तो जातक को अत्यंत भोगी बना देंगे, ऐसा जातक चारित्रिक रूप से भी पतित हो सकता है उसके संचित धन का भी पतन होगा, ज़ाहिर सी बात है शुक्र बारहवें भाव में जातक को भोगी बनाते हैं और बहुत पावरफुल हो जाएं तो अति भोगी बना देंगे।

 

जन्मकुंडली में दशम भाव से ज्यादा यदि अष्टम भाव का स्वामी बलवान हो जाए तो जातक का करियर बार बार ऊपर नीचे झूलता रहेगा।

 

जन्मकुंडली में बुध बलवान हों तो क्या ही कहना, ये अदभुत है लेकिन किसी की कुंडली में बुध अति बली होकर द्वादश भाव में बैठ जाएं तब?

बहुत खराब है, क्यों? क्योंकि ये बुध जातक को अनिद्रा, ओवरथिंकिंग आदि की बीमारी दे देंगे, ऐसा जातक वास्तविकता से दूर रहने को बाध्य हो जायेगा, कालपुरुष की कुंडली में बारहवें भाव में मीन राशि होती है और बारहवां भाव व्यय का है वहां बुध बैठकर अपने विचारों का व्यय शुरू कर देगा।

 

बलवान राहु यदि जन्मकुंडली में चौथे भाव में जाकर बैठ जाएं तो वैसे तो बलवान है उसकी अपनी कुछ अच्छाइयां हैं लेकिन सबसे बड़ी बुराई है जातक की माता को अस्वस्थ कर देगा और जातक की माता को ऐसी बीमारियां दे देगा जो पकड़ में ही न आएं।

 

जन्मकुंडली में शनि देव सप्तम में बलवान होकर बैठ जाएं, अब जरा गौर कीजिए कि सप्तम में शनि बलवान होकर दिग्बली होकर बैठ जाएं और ऐसे शनि के साथ मंगल का भी संबंध बन जाए बल्कि मंगल भी सप्तम में ही बलवान होकर बैठ जाएं तो जातक का दाम्पत्य जीवन केवल युद्ध का मैदान ही नहीं बनेगा बल्कि वो युद्ध खून खराबे तक जायेगा।

 

लग्न में बलवान बुद्ध यदि बहुत बलवान है तो ऐसी स्थिति में जातक पूर्णतावादी बन जायेगा, वो हर स्थिति में इतनी कमियां निकालेगा कि जीवन का आनंद ही खो देगा, जाहिर सी बात है बुध की दूसरी अच्छाइयां अवश्य होंगी पर ये बुराई भी होगी।

 

द्वादश भाव में बलवान चन्द्रमा जातक को वास्तविकता से पलायन वादी बना देगा, ऐसा जातक परेशानियां आते ही घबरा जायेगा, नशे की दुनियां में डूबने वाला (यहां दो बातें हैं अगर ऐसे चन्द्रमा राहु आदि से दृष्ट हों तो सामान्य नशा मदिरा इत्यादि और अगर कोई दृष्टि नहीं है तो कल्पनाओं का नशा) बना देगा।

 

अष्टम भाव में बलवान बुध व्यापारिक साझेदारी में ऐसा धोखा दिलाते हैं कि इससे जातक दिवालिया तक हो जाता है।

 

अष्टम भाव में बलवान शनि ऑलरेडी कष्ट देते हैं और ये शनि अगर केतु से युत हो जाएं तो जातक को पैरालिसिस की समस्या देते हैं और जातक को लंबे समय तक बिस्तर पर ला देते हैं।

 इन स्थानों पर इन ग्रहों के बैठने मात्र से ये सूत्र घटित नहीं होंगे बल्कि यदि वे ग्रह अत्यंत बलवान हैं तब ऐसी समस्याओं को जन्म देंगे।

ये जो बलवान ग्रह हैं ये इन परेशानियों को केवल जन्म नहीं देते वरन् जातक को इन परेशानियों को झेलने के लिये बाध्य करते हैं।

आपके उच्च ग्रह कैसा फल देंगे।

संघर्ष कब खत्म होगा जीवन से।

आप सभी लोगों से निवेदन है कि हमारी पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें जिससे अधिक से अधिक लोगों को पोस्ट पढ़कर फायदा मिले |
Share This Article
error: Content is protected !!
×