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चोरी गये या गायब व्यक्ति वस्तु का विचार

गायब हुए व्यक्ति, वस्तु अथवा चोरी गयी वस्तु का विचार भी ज्योतिष शास्त्र से किया जा सकता है ! आइए जाने कैसे विचार करें :—

 

गायब हुये खोये अथवा चोरी गये व्यक्ति वस्तु या धन का पता प्रश्न कुण्डली के प्रथम भाव से किया जाता है ! लग्न में जो राशि या नक्षत्र घटना या प्रश्न का निकलता है प्रथमतः उसी पर विचार किया जाता है ! दूसरे विकल्प के रूप में लग्न में मौजूद ग्रह जिस नक्षत्र में हो, तीसरा विकल्प घटना के समय या प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा जिस नक्षत्र या राशि में हो से विचार करना चाहिए ! हर घटना दैव योग से होती है और प्रश्न पूछने का समय भी संयोग ही होता है, अतः शुद्ध अन्तःकरण से विचार करने पर फल भी उत्तम मिलता है ! परीक्षा लेने या कपट भाव से पूछे प्रश्न अथवा कलुषित अंतःकरण से विचार करने पर फलित भी सही नहीं होगा ! यह विधि का विधान है !

 

ज्योतिष वाकई एक शास्त्र से बढ़कर विज्ञान है, जिसमें प्रत्येक प्रश्न का उत्तर समाया हुआ है ! गायब व्यक्ति, जीव, वस्तु या धन अथवा चोरी गई वस्तु व धन मिलेगी या नहीं मिलेगी ? मिलेगी तो कब तक मिलेगी ? इस बात तक का पता भी ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से लगाया जा सकता है !

 

ज्योतिष के अनुसार अलग-अलग नक्षत्रों में गायब हुए या चोरी गई वस्तुओं के मिलने या न मिलने का अलग-अलग परिणाम होता है ! जिस समय हमें अपनी चोरी गई वस्तु का पता लगे उस समय के नक्षत्र या अंतिम बार आपने फलां वस्तु को किस वक्त देखा था, उस समय के नक्षत्र के अनुसार गायब हुई या चोरी गई वस्तु का विचार किया जाता है !

 

आओ जानते हैं किस नक्षत्र का क्या परिणाम होता है :-

 

1 – रोहिणी, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, विशाखा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा और रेवती को ज्योतिष में अंध नक्षत्र माना गया है ! इन नक्षत्रों में गायब या चोरी होने वाली वस्तु के पूर्व दिशा में जाने की सम्भावना होती है और प्रयास करने पर जल्दी मिल भी जाती है ! इन नक्षत्रों में यदि कोई वस्तु गायब हुई है या चोरी हुई है तो वह अधिक दूर नहीं जाती है उसे आसपास ही तलाशना चाहिए !

 

2 – मृगशिरा, अश्लेषा, हस्त, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, शतभिषा, अश्विनी ये मंद नक्षत्र कहे गए हैं ! इन नक्षत्रों में यदि कोई वस्तु गायब हुई या चोरी होती है तो उसके तीन दिन में मिलने की संभावना रहती है ! इन नक्षत्रों में गई वस्तु दक्षिण दिशा में मिल सकती है ! साथ ही वह वस्तु रसोई, अग्नि या जल के स्थान पर छुपाई हुई होती है !

 

3 – आर्द्रा, मघा, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजीत, पूर्वाभाद्रपद, भरणी ये मध्य लोचन नक्षत्र होते हैं ! इन नक्षत्रों में गायब हुई या चोरी गई वस्तुएं पश्चिम दिशा में मिल सकती हैं ! वस्तु के संबंध में तलाश करने पर उसका पता या जानकारी यदि 64 दिनों के भीतर मिल जाय तब तो  मिलने की संभावना रहती है, यदि 64 दिनों में न पता चले या मिले तो फिर उसके मिलने की सम्भावना समाप्त हो जाती है और कभी नहीं मिलता है ! इस स्थिति में वस्तु के अत्यधिक दूर होने की जानकारी भी मिल सकती है, लेकिन वापस आने या मिलने में संशय रहता है !

4 – पुनर्वसु, पूर्वाफाल्गुनी, स्वाति, मूल, श्रवण, उत्तराभाद्रपद, कृतिका को सुलोचन नक्षत्र कहा गया है ! इनमें गायब वस्तु कभी दोबारा नहीं मिलती है ! लेकिन उसके उत्तर दिशा में जाने की पूर्ण सम्भावना होती है, लेकिन तलाश करने पर भी पता नहीं लग पाता कि वह कहां रखी गई है या आप कहां रखकर भूल गए हैं या कहाँ चला गया !

5 – भद्रा, व्यतिपात और अमावस्या में गया धन कभी भी प्राप्त नहीं होता है !

प्रश्न: लग्न के अनुसार भी चोरी गई वस्तु के संबंध में विचार किया जा सकता है ! यदि कोई व्यक्ति गायब हुई या चोरी गई वस्तु के संबंध में जानने के लिए आए और प्रश्न करे तो जिस समय वह प्रश्न करे उस समय की लग्न कुंडली बना लेना चाहिए, या जिस समय वस्तु चोरी हुई है उस समय गोचर में जो लग्न चल रहा था उसके अनुसार फल कथन किया जाना चाहिए !

       मेष लग्न की चोरी गयी वस्तु  का  चोर ब्राह्मण वर्ण का व्यक्ति हो सकता है, अतः जिन लोगों पर संदेह हो उनमें से जिनके नाम का नक्षत्र ब्राह्मण वर्ग में आता हो उन पर पहले शक केन्द्रित करना चाहिए !

1 – मेष लग्न या मेष राशि की वस्तु चोरी हुई हो प्रश्नकाल में मेष लग्न हो तो चोरी गई वस्तु पूर्व दिशा में होती है ! चोर ब्राह्मण वर्ग का व्यक्ति होता है और उसका नाम स वर्ग अक्षर से प्रारंभ होता है ! नाम में दो या तीन अक्षर होते हैं !

2 – वृषभ लग्न में वस्तु चोरी हुई हो तो वस्तु पूर्व दिशा में होती है और चोर क्षत्रिय वर्ण का होता है ! उसके नाम में आदि अक्षर म से हो सकता है तथा नाम चार अक्षरों वाला होता है !

3 – मिथुन लग्न में चोरी गई वस्तु आग्नेय कोण में होती है ! चोरी करने वाला व्यक्ति वैश्य वर्ण का हो सकता है और उसका नाम  ककार से प्रारंभ होता है, नाम में तीन अक्षर होते हैं !

4 – कर्क लग्न में वस्तु चोरी होने पर दक्षिण दिशा में मिल सकती है और चोरी करने वाला शूद वर्ण का होता है ! उसका नाम त अक्षर से प्रारंभ होता है और नाम में तीन वर्ण होते हैं !

5 – वस्तु सिंह लग्न में चोरी हो तो वस्तु नैऋत्य कोण में होती है ! चोरी करने वाला नौकर, परिचित या सेवक होता है ! चोर का नाम न से प्रारंभ होता है और नाम तीन या चार अक्षरों का होता है !

6 – प्रश्नकाल या चोरी के समय कन्या लग्न हो तो चोरी गई वस्तु पश्चिम दिशा में गयी होती है ! चोरी करने वाली कोई स्त्री होती है और उसका नाम म से प्रारंभ होता है ! नाम में कई वर्ण हो सकते हैं !

7 – चोरी के समय तुला लग्न हो तो वस्तु पश्चिम दिशा में जानना चाहिए ! चोरी करने वाला पुत्र, मित्र, भाई या अन्य कोई सगा संबंधी हो सकता है ! इसका नाम म से प्रारंभ होता है और नाम में तीन वर्ण होते हैं ! तुला लग्न में गई वस्तु बड़ी कठिनाई से प्राप्त होती है !

8 – वृश्चिक लग्न में चोरी गई वस्तु पश्चिम दिशा में होती है ! चोर घर का नौकर ही होता है और उसका नाम स अक्षर से प्रारंभ होता है ! नाम चार अक्षरों वाला होता है ! चोरी करने वाला उत्तम वर्ण का होता है !

9 – प्रश्नकाल या चोरी के समय धनु लग्न हो तो चोरी गई वस्तु वायव्य कोण में होती है ! चोरी करने वाली कोई स्त्री होती है और उसका नाम स अक्षर से प्रारंभ होता है ! नाम में चार वर्ण पाए जाते हैं !

10 – चोरी के समय मकर लग्न हो तो चोरी गई वस्तु उत्तर दिशा में गयी समझनी चाहिए ! चोरी करने वाला वैश्य जाति का होता है ! नाम चार अक्षरों का होता है और वह स से प्रारंभ होता है !

11 – प्रश्नकाल या चोरी के समय कुंभ लग्न हो तो चोरी गई वस्तु उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में गयी  होती है ! इस प्रश्न लग्न के अनुसार चोरी करने वाला व्यक्ति कोई मनुष्य नहीं होता बल्कि चूहों या अन्य जानवरों के द्वारा इधर-उधर कर दी गयी होती है !

12 – मीन लग्न में वस्तु चोरी हुई हो तो वस्तु ईशान कोण में गयी हो सकती है ! चोरी करने वाला निम्न जाति का व्यक्ति होता है ! वह व्यक्ति चोरी करके वस्तु को जमीन में छुपा देता है ! ऐसे चोर का नाम व अक्षर से प्रारंभ होता है और उसके नाम में तीन अक्षर रहते हैं ! चोर कोई परिचित महिला या नौकरानी भी हो सकती है !

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