
1)पिन सारे कागजों को जोड़कर रखना चाहती है लेकिन वह हर कागज को चुभती है
ठीक यही स्थिति परिवार व समाज के ऐसे शख्स की भी होती है जो सभी को जोड़कर रखना चाहता है
कोई दाया तो कोई बाया
किसी १ का पहला चयन हो जाता है
तो किसी निर्बल कागज पर सब का बोझ आ जाता हे
निर्णय…..
2)….
भागवत गीता सुना कर कृष्ण भगवान बन जाते हे
और गलत निर्णय ही
भीष्म पितामह को
तीरों की शय्या पर मृत्यु की राह देखने पड़ जाती हे
कर्म सबको भोगने ही पड़ता है
खैर,
लेकिन वह सभी की ऑंखों में चुभता है कोहरे से हमें यह सीखने को मिलता है
कि धीरे धीरे मंजिल की तरफ आगे बढ़िए रास्ता अपने आप नजर आने लगेगा
जिस प्रकार हर पौधे को हवा पानी और सूरज की रौशनी की जरूरत होती है उसी प्रकार हर रिश्ते को प्यार भावना सच्चे समर्थन की जरूरत होती है
मित्र और चित्र दिल से बनाओगे*
*तो उनके रंग जरूर निखर आयेंगे।*
*समय बहाकर ले जाता है नाम और निशान*
*कोई हम में रह जाता है और कोई अहम में।*
*नीयत कितनी भी अच्छी हो दुनिया आपको आपके दिखावे से जानती है*
*और दिखावा कितना ही अच्छा हो*
*भगवान आपको नीयत से पहचानता है।
*निर्भय वहीं हैं, जो सत्य की शरण में है, जो असत्य का सहारा लेता हैं, वह हमेशा भय में रहता हैं ।
अपना जीवन हमारे अपने हाथ में है
अपने जीवन को खूबसूरत रंगों से भर दो
हर हाल में खुश रहना चाहिए
दुखी रहने से अपने जीवन के रंग ही बिखर जाते हैं