
शिव तंत्र और बाधा मुक्ति: ऋण, रोग और शत्रुओं का शमन
महाशिवरात्रि के पावन पर्व के समीप पहुँचते ही ब्रह्मांड में शिव तत्व की तीव्रता बढ़ने लगी है। आज हम शिव के उस स्वरूप की चर्चा करेंगे जिसे ‘नीलकंठ’ और ‘त्रिपुरांतक’ कहा जाता है—जो बाधाओं को सोख लेते हैं और नकारात्मकता का अंत करते हैं।
१. ऋण (कर्ज) मुक्ति और शिव
आर्थिक तंगी और कर्ज का मुख्य कारण ज्योतिष में मंगल और शनि का प्रतिकूल होना माना जाता है। शिव ‘ऋणमुक्तेश्वर’ हैं। तंत्र शास्त्र के अनुसार, जब तक प्रारब्ध के दोष नहीं कटते, तब तक लक्ष्मी स्थिर नहीं होती। शिव की शरण में जाने से संचित कर्मों का क्षय होता है और आय के नए मार्ग खुलते हैं।
२. शिव के अमोघ अस्त्र: शमी और काली मिर्च
तंत्र में कुछ विशेष वनस्पतियों को शिव का प्रतीक माना गया है:
* शमी पत्र: शमी का संबंध शनि देव से है, जिनके गुरु स्वयं शिव हैं। शिव पर शमी पत्र चढ़ाने से व्यापार में आ रही रुकावटें और ‘साढ़ेसाती’ जैसे दोष शांत होते हैं।
* काली मिर्च और तिल: बाधाओं और अदृश्य शत्रुओं के नाश के लिए काली मिर्च का शिव पूजा में प्रयोग किया जाता है।
३. आर्थिक बाधा निवारण हेतु आज का ‘विशेष तांत्रिक प्रयोग’
यदि आपका पैसा कहीं फंसा हुआ है या कर्ज बढ़ता जा रहा है, तो आज संध्या काल (प्रदोष काल) में यह उपाय करें:
* विधि: ७ दाने काली मिर्च और एक मुट्ठी काले तिल लेकर अपने सिर से ७ बार वार (Rotate) लें।
* अर्पण: इन्हें शिवलिंग पर “ॐ नमः शिवाय” कहते हुए अर्पित कर दें।
* अभिषेक: इसके पश्चात शुद्ध जल से अभिषेक करें।
* प्रभाव: यह प्रयोग आपके ‘राहु’ और ‘शनि’ जनित बाधाओं को सीधे शिव चरणों में भस्म कर देता है।
४. महामृत्युंजय की शक्ति और आरोग्य
समृद्धि के लिए शरीर का स्वस्थ होना अनिवार्य है। यदि घर का धन दवाइयों में जा रहा है, तो आज के दिन महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जप करते हुए ‘कुशोदक’ (कुशा घास मिश्रित जल) से अभिषेक करें। यह नकारात्मक ऊर्जा के ‘विष’ को समाप्त कर घर में आरोग्य का ‘अमृत’ लाता है।
आज का विशेष चिंतन:
शिव ने समुद्र मंथन का विष पिया ताकि सृष्टि सुरक्षित रहे। इसी प्रकार, महाशिवरात्रि के इस समय में हम अपने भीतर के क्रोध, लोभ और अहंकार रूपी विष को शिव को समर्पित कर सकते हैं, ताकि हमारे जीवन में केवल सुख और शांति का अमृत शेष रहे।
भगवान शिव के तांत्रिक (Technological/Methodical) उपायों का महत्व और भी बढ़ जाता है। तंत्र में शिव ‘विज्ञान भैरव’ हैं, जो ऊर्जा के रूपांतरण के स्वामी हैं।
यहाँ मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के लिए विशेष तांत्रिक उपाय और उनका शास्त्रीय आधार दिया गया है:
*🔯 शिव कृपा और समृद्धि लेखमाला: विशेष तांत्रिक अंक 🔯*
शिव तंत्र: ऊर्जा का ऊर्ध्वगामी रूपांतरण
तांत्रिक साधना में शिव का अर्थ शरीर के भीतर की ‘सुषुम्ना नाड़ी’ का जाग्रत होना है। महाशिवरात्रि को जब चंद्रमा अपनी कलाओं के साथ शिवत्व में विलीन होने की तैयारी कर रहा है, तब ये उपाय आपके भौतिक और सूक्ष्म शरीर पर गहरा प्रभाव डालेंगे।
१. पारद शिवलिंग और रस-तंत्र (Wealth & Health)
तंत्र में ‘पारद’ (Mercury) को शिव का वीर्य माना गया है। आज के दिन यदि आपके पास पारद शिवलिंग है, तो उस पर अभिषेक करें।
* तांत्रिक महत्व: पारद शिवलिंग की पूजा से ‘महालक्ष्मी’ स्वतः सिद्ध हो जाती हैं। यदि व्यापार में निरंतर हानि हो रही है, तो पारद शिव पर अष्टगंध अर्पित करना दरिद्रता का नाश करता है।
२. ‘विजया’ (भांग) और मानसिक अवरोधों का अंत
लोग अक्सर भांग को केवल नशा समझते हैं, परंतु तंत्र में इसे ‘विजया’ कहा गया है। यह मन के विकारों पर विजय पाने की औषधि है।
* उपाय: आज शिवलिंग पर दूध में घुली हुई भांग अर्पित करें।
* लाभ: यदि आपको मानसिक तनाव, अनिर्णय या शत्रुओं का भय रहता है, तो यह प्रयोग आपके ‘आज्ञा चक्र’ को शुद्ध कर मानसिक स्पष्टता प्रदान करता है।
३. सपाद (सवा) लाख मंत्र की शक्ति
आज masik shivratri की रात्रि तक एक लघु अनुष्ठान का संकल्प लें।
* तांत्रिक बीज मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं नमः शिवाय
* विधि: इस बीज मंत्र का जप करते हुए काले हकीक या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें। यह मंत्र सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है और तंत्र बाधाओं को वापस भेजने की शक्ति रखता है।
४. अग्नि तंत्र: बाधा निवारण हेतु ‘कपूर’ का प्रयोग
शिव को ‘अग्नि’ का रूप भी माना गया है।
* प्रयोग: आज रात्रि १० बजे के बाद, एक मिट्टी के दीपक में कपूर और २ लौंग जलाकर पूरे घर में घुमाएं।
* महत्व: कपूर की सुगंध और अग्नि का संयोग घर की ‘प्राणिक ऊर्जा’ (Pranic Energy) को शुद्ध करता है और अटके हुए कार्यों को गति प्रदान करता है।
५. बिल्वपत्र और ‘त्रिगुणातीत’ साधना
बिल्वपत्र के तीन दल सत्व, रज और तम के प्रतीक हैं।
* तांत्रिक उपाय: तीन बिल्वपत्र लें। एक पर ‘श्रीं’, दूसरे पर ‘ह्रीं’ और तीसरे पर ‘क्लीं’ चंदन से लिखें। इन्हें एक साथ शिवलिंग पर चढ़ाएं।
* फल: यह प्रयोग आपके जीवन के भौतिक (क्लीं), मानसिक (ह्रीं) और आर्थिक (श्रीं) पक्षों को संतुलित करता है।
विशेष परामर्श: तांत्रिक उपायों में ‘मौन’ का बड़ा महत्व है। आज के दिन जितना संभव हो कम बोलें और अपनी ऊर्जा को भीतर की ओर केंद्रित करें।
यहाँ आज १३ फरवरी के लिए विशेष शिव तांत्रिक बीज मंत्र दिए गए हैं:
🔱 शिव तांत्रिक बीज मंत्र (स्पष्ट स्वरूप) 🔱
१. आर्थिक समृद्धि और लक्ष्मी प्राप्ति हेतु:
*मंत्र: ॐ ह्रीं नम: शिवाय*
(इसमें ‘ह्रीं’ महालक्ष्मी का बीज है जो शिव कृपा के साथ धन के द्वार खोलता है)
२. शत्रुओं के नाश और सुरक्षा कवच हेतु:
*मंत्र:ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं नम: शिवाय।
(यह मंत्र किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा या तंत्र बाधा को नष्ट करने के लिए अमोघ है)
३. आकर्षण और भौतिक सुख-सुविधाओं हेतु:
मंत्र: ॐ क्लीं नम: शिवाय
(शिव और कृष्ण तत्व का मिश्रण, जो जीवन में ऐश्वर्य लाता है)
आज masik sivratri का विशेष तांत्रिक प्रयोग:
यदि आप आज रात इन मंत्रों का जप करते हैं, तो इसे ‘मानसिक जप’ (बिना जीभ हिलाए मन में पढ़ना) के रूप में करें। तांत्रिक पद्धति में मानसिक जप का फल १००० गुना अधिक माना गया है।
जप विधि:
रुद्राक्ष की माला लें।
मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
प्रत्येक मंत्र की कम से कम १ या ३ माला करें।
शिव कृपा और समृद्धि लेखमाला: विशेष सोपान
*️⃣शिव महापुराण और तंत्र के गुप्त प्रयोग: अभाव से महा-ऐश्वर्य की ओर*️⃣
आज १४ फरवरी है। कल आने वाले महाशिवरात्रि के महापर्व से पूर्व आज की यह रात ‘महानिशा’ की तैयारी की रात है। शिव पुराण और तंत्र शास्त्र के अनुसार, जब तक हमारे भीतर के ऊर्जा केंद्र (चक्र) शुद्ध नहीं होते, तब तक ईश्वरीय कृपा का बीजारोपण संभव नहीं होता। महाशिवरात्रि की यह पूर्व संध्या वह समय है जब ब्रह्मांड की ऊर्जा अत्यंत संवेदनशील होती है। महादेव के तांत्रिक प्रयोग जितने सरल हैं, उतने ही सटीक और शक्तिशाली भी। आइए जानते हैं वे गुप्त प्रयोग जो आपके जीवन की दिशा बदल सकते हैं:
१. ‘इत्र’ और ‘भस्म’ का सम्मोहन तंत्र (यश और प्रभाव हेतु)
शिव ‘अघोर’ भी हैं और ‘सुंदरम’ भी। शिव पुराण कहता है कि जो व्यक्ति शिव चरणों की भस्म धारण करता है, उसके व्यक्तित्व में एक दैवीय आकर्षण (Magnetism) आ जाता है।
* प्रयोग: आज रात सफेद चंदन के इत्र (Scent) में थोड़ी सी शुद्ध भस्म मिलाएं। इसे महादेव को स्पर्श कराकर अपने माथे पर तिलक लगाएं। व्यापारिक मीटिंग या महत्वपूर्ण कार्यों के लिए यह अमोघ है।
२. अक्षत और शहद: अखण्ड लक्ष्मी और कर्ज मुक्ति
शिव पुराण के ‘विद्येश्वर संहिता’ में शहद को ‘दरिद्रता नाशक’ और अक्षत को ‘लक्ष्मी प्रदाता’ बताया गया है। शहद ‘मंगल’ और ‘शुक्र’ के संतुलन का प्रतीक है।
* प्रयोग: १२५ ग्राम बिना टूटे बासमती चावल साफ कर लें। कल इन पर शहद की बूंदें डालकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
* दिलचस्प सूत्र: अभिषेक के बाद शिवलिंग से स्पर्श किया हुआ थोड़ा सा शहद अपनी उंगली से लेकर अपनी तिजोरी या धन स्थान पर लगा दें। यह धन-आकर्षण का प्राचीन तांत्रिक तरीका है।
३. सात चक्रों का शोधन और ‘विजया’ तंत्र
शिव साक्षात् ‘सहस्रार चक्र’ में निवास करते हैं। तंत्र में भांग को ‘विजया’ कहा गया है, जो मन के विकारों पर विजय दिलाती है।
* चक्र शुद्धि ध्वनि: आज रात सोने से पूर्व १० मिनट बैठें और इन ध्वनियों का मानसिक जप करें: मूलाधार के लिए ‘लं’, हृदय के लिए ‘यं’ और आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) के लिए ‘ॐ’।
४. काले तिल और ‘अदृश्य बाधा’ निवारण
यदि आपको लगता है कि आपके बनते काम अंतिम समय पर बिगड़ जाते हैं, तो यह ‘नकारात्मक ऊर्जा’ का संकेत है।
* प्रयोग: एक तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें ठीक २१ दाने काले तिल के डालें।
* विधि: कल शिवरात्रि पर इस जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए मन में “ॐ जुं सः” (महामृत्युंजय का लघु रूप) का जप करें। काला तिल ‘शनि’ का प्रतीक है और शिव शनि के गुरु हैं। यह प्रयोग आपके जीवन के बंद रास्तों को खोल देता है।
५. धतूरा और नंदी: मानसिक शांति और प्रार्थना का विज्ञान
धतूरा शिव को अति प्रिय है क्योंकि वह ‘विष’ सोखता है, वहीं नंदी ‘धर्म’ और ‘धैर्य’ के प्रतीक हैं।
* प्रयोग: यदि मानसिक तनाव या शत्रु भय है, तो १ धतूरे पर हल्दी की बिंदी लगाकर शिव को चढ़ाएं। शिव पुराण कहता है कि इससे व्यक्ति के आंतरिक शत्रु (क्रोध, ईर्ष्या) भस्म हो जाते हैं।
* रहस्य: पूजा के बाद नंदी के बाएं (Left) कान में अपनी इच्छा कहें और दूसरा कान हाथ से बंद कर लें, ताकि आपकी ध्वनि ‘मौन’ होकर सीधे शिव के अंतर्मन तक पहुँचे।
६. महा-समृद्धि हेतु बीज मंत्र प्रयोग
आज की रात “शक्ति-युक्त” शिव मंत्र का जप आपके आर्थिक चक्रों (Financial Vortex) को ऊर्जित करता है:
* मंत्र: ॐ ह्रीं नम: शिवाय
(ह्रीं महालक्ष्मी का बीज है, जो शिव कृपा के साथ सौभाग्य और स्थिरता लाता है)
विशेष चिंतन:
शिव कोई बाहर बैठे देवता नहीं, बल्कि आपके भीतर की वह ‘शक्ति’ हैं जो राख (भस्म) से भी नया सृजन (Creation) कर सकती है। यदि आप हार मान चुके हैं या जीवन के संघर्षों से थके हैं, तो याद रखिए—शिव का एक नाम ‘नीलकंठ’ है, वे आपके विष को पीकर आपको सफलता का अमृत देने के लिए तत्पर हैं।