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माघ शुक्ल सप्तमी सूर्यग्रहण के समान होती है ।

माघ शुक्ल सप्तमी :

यस्यां तिथौ रथं पूर्वं प्राप देवो दिवाकरः॥सा तिथिः कथिता विप्रैर्माघे या रथसप्तमी॥

तस्यां दत्तं हुतं चेष्टं सर्वमेवाक्षयं मतम्॥ सर्वदारिद्र्यशमनं भास्करप्रीतये मतम्॥

 

भगवान सूर्य जिस तिथि को पहले-पहल रथ पर आरूढ़ हुए, वह ब्राह्मणों द्वारा माघ मास की सप्तमी बताई गयी है, जिसे रथसप्तमी कहते हैं। उस तिथि को दिया हुआ दान और किया हुआ यज्ञ सब अक्षय माना जाता है। वह सब प्रकार की दरिद्रता को दूर करने वाला और भगवान सूर्य की प्रसन्नता का साधक बताया

गया है।

 

*माघ शुक्ल सप्तमी सूर्यग्रहण के समान होती है ।*

 

इसमें प्रातः काल सूर्योदय के समय स्नान करना चाहिए इस स्नान को महाफल वाला माना गया है ।

 

प्रातःकाल अगर संभव हो तो दीपक बहते हुए जल में छोड़ें ।

 

माघ शुक्ल सप्तमी मन्वादी तिथि है

स्नान और दान का इस दिन करोड़ों गुना फल मिलता है ।

 

स्नान, दान और अर्घ्य से आयु-आरोग्य-और संपत्ति प्राप्त होती है ।

 

स्नान का मंत्र:

 

जो जो सात जन्मों में मैंने पाप किया है मेरे उस पाप को, रोग को और शोक को, मकर सप्तमी दूर करे, इस जन्म के और दुसरे जन्म के मन, वाणी और काया के ज्ञात और अज्ञात पाप को, इस प्रकार सात प्रकार के पापों को सात व्याधियों सहित मकर की सप्तमी मेरे स्नान से नष्ट करो।

 

अर्घ्य देने का मंत्र :

हे सात घोड़ों के रथ में चलने वाले, सातों लोकों को प्रकाशमान करने वाले सूर्य भगवान, सप्तमी सहित आप अर्घ्य को ग्रहण करो ।

 

दान के विषय में बताया गया है की तांबे या मिटटी के पात्र में गुड़ और घी का दान करना चाहिए ।

पात्र संभव न होने पर केवल घी और गुड़ का दान करें ।

 

भगवान सूर्य के निम्न 21 नामों का पाठ करने से मनुष्य को सहस्त्र नाम के पाठ का फल प्राप्त होता है:

 

  1. विकर्तन- विपत्तियों को नष्ट करने वाले
  2. विवस्वान- प्रकाश रूप
  3. मार्तंड
  4. भास्कर
  5. रवि
  6. लोकप्रकाशक
  7. श्रीमान
  8. लोक चक्षु
  9. ग्रहेश्वर
  10. लोक साक्षी
  11. त्रिलोकेश
  12. कर्ता
  13. हर्ता
  14. तमिस्त्रहा- अंधकार को नष्ट करने वाले
  15. तपन
  16. तापन
  17. शुचि- पवित्रतम
  18. सप्ताश्ववाहन
  19. गभस्तिहस्त- किरणें जिनके हाथ स्वरूप हैं
  20. ब्रह्मा
  21. सर्वदेवनमस्कृत.

 

जय हो सूर्य भगवान् की

 

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